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“डोनाल्ड ट्रम्प अस्थायी हैं” अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने सहयोगियों को दिया भरोसा

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SamacharToday.co.in - डोनाल्ड ट्रम्प अस्थायी हैं अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने सहयोगियों को दिया भरोसा - Image Credited by Times NOW

म्यूनिख — जैसे-जैसे 2026 म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSC) ट्रांसअटलांटिक तनाव और बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों की पृष्ठभूमि में शुरू हुआ, अमेरिकी डेमोक्रेट्स के एक उच्च-स्तरीय दल ने एक विशेष मिशन के साथ बवेरिया की राजधानी में कदम रखा: एक सतर्क यूरोप को यह विश्वास दिलाना कि “अमेरिका फर्स्ट” का वर्तमान युग केवल एक गुजरता हुआ तूफान है।

2028 के राष्ट्रपति पद के कई संभावित दावेदारों वाले इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए, कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने यूरोपीय नेताओं और राजनयिकों को एक बेबाक संदेश दिया। न्यूजॉम ने शुक्रवार को खचाखच भरे कमरे में कहा, “यदि आज मैं कोई और बात नहीं पहुँचा पा रहा हूँ, तो बस इतना जान लें: डोनाल्ड ट्रम्प अस्थायी हैं। वह तीन साल में चले जाएंगे।” राष्ट्रपति ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दूसरे वर्ष से घबराए सहयोगियों को सांत्वना देने के उद्देश्य से की गई उनकी इस टिप्पणी ने अमेरिकी नेतृत्व के भविष्य के दो विपरीत दृष्टिकोणों के बीच होने वाली चर्चा का सुर तय कर दिया।

तनाव में एक महाद्वीप: 2026 का संदर्भ

2026 का यह सम्मेलन एक विशेष रूप से अस्थिर क्षण में आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प की व्हाइट हाउस में वापसी के एक साल के भीतर, ट्रांसअटलांटिक गठबंधन कई अपरंपरागत नीतिगत कदमों के कारण दबाव में है। इनमें शामिल हैं:

  • टैरिफ अस्थिरता: यूरोपीय स्टील और ऑटोमोबाइल पर “कभी शुरू-कभी बंद” होने वाले टैरिफ का पुन: अधिरोपण।

  • “डॉनरो सिद्धांत” (The Donroe Doctrine): 19वीं शताब्दी के मोनरो सिद्धांत की एक नई परिकल्पना, जो पश्चिमी गोलार्ध के संसाधनों पर अमेरिकी प्रभुत्व का दावा करती है।

  • ग्रीनलैंड की महत्वाकांक्षाएं: ग्रीनलैंड को अधिग्रहित करने के नए और विवादास्पद प्रस्ताव, जिन्हें डेनमार्क और यूरोपीय संघ (EU) ने कड़ी फटकार लगाई है।

  • ‘काइनेटिक’ कूटनीति: निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी सैन्य अभियान और ईरानी परमाणु स्थलों पर हमलों ने बिना किसी समन्वय के सैन्य तनाव बढ़ने का डर पैदा कर दिया है।

विचारधाराओं का टकराव: रूबियो बनाम डेमोक्रेट्स

जहाँ विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रशासन की नीतियों को थोड़ा “पारंपरिक” रूप देने का प्रयास किया, वहीं उनके भाषण ने एक मौलिक बदलाव को रेखांकित किया। रूबियो ने अमेरिका और यूरोप को केवल हितों के भागीदार के रूप में नहीं, बल्कि “पश्चिमी सभ्यता के उत्तराधिकारियों” के रूप में वर्णित किया। साझा विरासत के उनके बचाव के लिए कुछ लोगों ने खड़े होकर तालियाँ बजाईं, लेकिन ट्रम्प की शर्तों पर एक “पुनर्जीवित गठबंधन” का उनका आह्वान—जिसमें उन्होंने “जलवायु उग्रवाद” और “वैश्विक संरचनाओं” को खारिज करने की बात कही—कई यूरोपीय अधिकारियों को संशय में छोड़ गया।

इसके विपरीत, न्यूजॉम, सीनेटर रूबेन गैलेगो और प्रतिनिधि एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ (AOC) सहित डेमोक्रेटिक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखी और इसे “श्रमिक वर्ग के लिए विदेश नीति” करार दिया।

अधिनायकवाद पर AOC की चेतावनी

प्रतिनिधि एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने अधिनायकवाद (authoritarianism) के वैश्विक उदय को सीधे तौर पर आर्थिक उपेक्षा से जोड़ा। लोकलुभावनवाद पर एक महत्वपूर्ण पैनल के दौरान उन्होंने चेतावनी दी, “यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपनी आर्थिक व्यवस्था को दुरुस्त करें और श्रमिक वर्ग के लिए ठोस लाभ प्रदान करें।” उन्होंने तर्क दिया कि आय की अत्यधिक असमानता को दूर किए बिना, दुनिया “अधिनायकवादियों द्वारा शासित एक अधिक अलग-थलग दुनिया बन जाएगी, जो कामकाजी लोगों के लिए कुछ भी नहीं करते।”

घरेलू चिंताएं: 2026 मध्यावधि चुनाव

घबराहट केवल विदेशी सीमाओं तक सीमित नहीं थी। सीनेटर मार्क वार्नर (डी-वीए) ने घरेलू चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश किया। उन्होंने चेतावनी दी कि राष्ट्रपति द्वारा चुनावों का “राष्ट्रीयकरण” करने और कार्यकारी आदेश के माध्यम से ‘वोटर आईडी’ अनिवार्य करने की चर्चा ने आगामी 2026 मध्यावधि चुनावों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। वार्नर ने टिप्पणी की, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे 2026 के अमेरिका में यह कहना पड़ेगा,” जो घर में लोकतांत्रिक मानदंडों को लेकर गहरे डर को उजागर करता है।

विशेषज्ञ विश्लेषण: म्यूनिख का “अंतराल”

विशेषज्ञ इस वर्ष के MSC को “अंतराल” (interregnum) की अवधि के रूप में देखते हैं—जो पुराने नियमों पर आधारित व्यवस्था और एक अनिश्चित नई दुनिया के बीच का समय है।

“यूरोपीय सहयोगियों के लिए, म्यूनिख में डेमोक्रेट्स की उपस्थिति इस बात की याद दिलाती है कि अमेरिका एक अखंड विचार वाला देश नहीं है। हालांकि, उन लोगों से आश्वासन मिलना जिनके पास वर्तमान में सत्ता की बागडोर नहीं है, एक कठिन सौदा है, विशेष रूप से तब जब प्रशासन सक्रिय रूप से नाटो और व्यापार मानदंडों को नया आकार दे रहा है।” — सीनियर फेलो, सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस।

दृढ़ता का संदेश

जैसे ही सम्मेलन समाप्त हुआ, डेमोक्रेटिक पार्टी का संदेश लचीलेपन और दृढ़ता का था। सीनेटर रूबेन गैलेगो ने दर्शकों को याद दिलाया कि “यह सब केवल ट्रम्प नहीं है… हम अभी भी यहाँ हैं।” क्या यह “दूसरा अमेरिका” 2028 के चुनाव से पहले विश्वास की खाई को सफलतापूर्वक पाट सकता है, यह वर्तमान ट्रांसअटलांटिक संबंधों का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। फिलहाल, यूरोप ट्रम्प की “रेकिंग बॉल पॉलिटिक्स” (सब कुछ तहस-नहस करने वाली राजनीति) की वास्तविकता और डेमोक्रेट्स के “नियम-आधारित व्यवस्था” की वापसी के वादे के बीच फंसा हुआ है।

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