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International Relations

तैयार हो रहा है दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता: भारत के लिए इसके मायने

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SamacharToday.co.in - तैयार हो रहा है दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता भारत के लिए इसके मायने - Image Credited by The Economic Times

जैसे-जैसे राष्ट्रीय राजधानी भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह और 26 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ (EU) शिखर सम्मेलन के लिए यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मेजबानी के लिए तैयार हो रही है, मंच एक ऐसे समझौते के लिए तैयार है जो इस दशक के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक बन सकता है।

यदि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यात्रा के दौरान इस पर सहमति बन जाती है, तो लंबे समय से लंबित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA)—जिसे औपचारिक रूप से व्यापक व्यापार और निवेश समझौता (BTIA) कहा जाता है—एक रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक मोड़ साबित होगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह सभी समझौतों की जननी (Mother of all deals) होगी।”

लगभग दो अरब लोगों के साझा बाजार के साथ, यह समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं को ऐसे समय में जोड़ेगा जब दुनिया भर में संरक्षणवाद (protectionism) बढ़ रहा है और स्थापित व्यापार मार्ग बाधित हो रहे हैं।

दो दशकों का सफर: उतार-चढ़ाव से तेजी तक

इस समझौते की नींव 2007 में रखी गई थी। 2007 और 2013 के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन बाजार पहुंच, टैरिफ, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), श्रम और पर्यावरण मानकों पर गहरे मतभेदों के कारण बातचीत विफल रही। ऑटोमोबाइल और शराब पर भारत के उच्च आयात शुल्क और यूरोपीय संघ द्वारा कड़े आईपीआर नियमों की मांग ने 2013 में बातचीत को पूरी तरह से ठप कर दिया था।

2020 के बाद वैश्विक परिदृश्य बदलने के साथ इसमें वास्तविक सफलता मिली। महामारी और भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को हिलाकर रख दिया। जून 2022 में, भारत और यूरोपीय संघ ने औपचारिक रूप से बातचीत फिर से शुरू की। फरवरी 2025 में उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा के बाद बातचीत में काफी तेजी आई और अब अधिकारियों का संकेत है कि केवल कुछ ही मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।

समय का महत्व: वैश्विक व्यापार में बदलाव

इस समझौते के पीछे की तात्कालिकता वैश्विक व्यापार परिदृश्य में आए बदलावों से जुड़ी है। अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ ने पारंपरिक व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है। ऐसे संदर्भ में, यूरोपीय संघ, जो पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, विविधीकरण (diversification) के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

2024 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार 120 बिलियन यूरो (लगभग 140 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया। यूरोपीय संघ भारत के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा है।

आईसीआरआईईआर (ICRIER) की प्रोफेसर डॉ. अर्पिता मुखर्जी के अनुसार, “यह समझौता केवल बैलेंस शीट के बारे में नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक लचीलेपन के बारे में है। वैश्विक व्यापार के विखंडन के दौर में, भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक व्यापक समझौता एक स्थिर, नियम-आधारित विकल्प प्रदान करता है।”

आर्थिक सौदा: बाजार पहुंच और चुनौतियां

प्रस्तावित एफटीए का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बाजारों को खोलना है, हालांकि इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। यूरोपीय संघ भारत पर कारों, चिकित्सा उपकरणों, वाइन और स्पिरिट पर आयात शुल्क कम करने के लिए दबाव डाल रहा है। भारत के लिए कारों पर आयात शुल्क वर्तमान में 100 प्रतिशत से अधिक है।

  • ऑटोमोबाइल और स्टील: ये मुख्य विवादित बिंदु बनकर उभरे हैं। जहां यूरोपीय संघ अपने कार निर्माताओं के लिए अधिक पहुंच चाहता है, वहीं भारत को चिंता है कि उसका स्टील निर्यात यूरोपीय संघ के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) से प्रभावित हो सकता है।

  • कृषि: यह भारत के लिए एक ‘रेड लाइन’ बनी हुई है। भारतीय अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि करोड़ों किसानों की आजीविका को देखते हुए भारत अपने कृषि या डेयरी क्षेत्रों को पूरी तरह से नहीं खोलेगा। हालांकि, कुछ उच्च-मूल्य वाले कृषि उत्पादों को शामिल करने पर सहमति बन सकती है।

भारतीय निर्यात और सेवाओं को बढ़ावा

भारत के लिए, सबसे तत्काल लाभ श्रम-प्रधान क्षेत्रों (labour-intensive sectors) में मिलेगा। शून्य या कम शुल्क से भारतीय गारमेंट्स, टेक्सटाइल, लेदर उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। विशेष रूप से कपड़ा क्षेत्र (textiles) के लिए यह महत्वपूर्ण है, जहाँ वर्तमान में भारतीय निर्यात पर 12-16 प्रतिशत का टैरिफ लगता है।

सेवा क्षेत्र में भी भारत को बड़े लाभ की उम्मीद है। आईटी, दूरसंचार और परिवहन सेवाओं के निर्यात में पर्याप्त वृद्धि होने की संभावना है। यूरोपीय संघ के दृष्टिकोण से, यह समझौता भारत के 1.4 अरब लोगों के विशाल उपभोक्ता बाजार के द्वार खोलता है।

निवेश और स्थिरता

व्यापार के अलावा, यह समझौता निवेश को भी गति देगा। अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 के बीच यूरोपीय संघ से भारत में 117.4 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। एफटीए से नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और हरित प्रौद्योगिकियों में यूरोपीय निवेश बढ़ सकता है।

स्थिरता और पर्यावरण मानकों पर तालमेल बिठाना बातचीत का एक जटिल हिस्सा रहा है। यूरोपीय संघ चाहता है कि व्यापारिक भागीदार पेरिस जलवायु समझौते और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन करें।

वैश्विक प्रभाव वाला समझौता

यदि यह समझौता संपन्न होता है, तो यह केवल एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं होगा। यह एक संकेत होगा कि संरक्षणवाद के उदय के बावजूद बड़ी और विविध अर्थव्यवस्थाएं व्यापक समझौते कर सकती हैं। जैसा कि वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संकेत दिया है, बातचीत फिनिश लाइन के “बेहद करीब” है। इसे “सभी समझौतों की जननी” कहा जाना अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि इसका आर्थिक वजन और रणनीतिक महत्व भारत और यूरोप की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है।

देवाशीष एक समर्पित लेखक और पत्रकार हैं, जो समसामयिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से सीधा जुड़ाव बनाने वाली है। देवाशीष का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच फैलाने की जिम्मेदारी भी निभाती है। वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न केवल जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों को विचार और समाधान की दिशा में प्रेरित भी करते हैं। समाचार टुडे में देवाशीष की भूमिका: स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, पठन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक विमर्श।

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