International Relations
त्रिशंकु संसद की साजिश? बांग्लादेश चुनाव पर पाकिस्तान की काली छाया
बांग्लादेश में होने वाले 2026 के आम चुनावों से पहले बाहरी हस्तक्षेप की आशंकाएं गहरा गई हैं। CNN को मिले खुफिया इनपुट्स के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और वहां का राजनयिक मिशन बांग्लादेश में एक “त्रिशंकु संसद” (Hung Parliament) बनाने की साजिश रच रहे हैं। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों ने भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया में हलचल मचा दी है।
खुफिया सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान का लक्ष्य बांग्लादेश में एक ऐसी कमजोर गठबंधन सरकार बनाना है, जो बाहरी दबाव में रहे और भारत विरोधी एजेंडे को हवा दे सके।
ISI की सक्रियता और विपक्षी दलों को समर्थन
रिपोर्टों के अनुसार, ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में एक विशेष ‘ISI सेल’ स्थापित किया गया है, जो खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी जैसे समूहों के संपर्क में है।
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वित्तीय सहायता के आरोप: यह आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान इन समूहों को गुप्त रूप से आर्थिक मदद पहुंचा रहा है ताकि वे चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकें।
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1971 की विरासत पर हमला: कट्टरपंथी समूहों द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़े प्रतीकों को निशाना बनाना इस “बदलाव” का संकेत माना जा रहा है।
भारत की चिंताएं
भारत के लिए यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यदि ढाका और इस्लामाबाद के बीच कोई औपचारिक रक्षा समझौता होता है, तो भारत के लिए अपने पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को लेकर एक नया मोर्चा खुल सकता है। पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों ने भी नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
“बांग्लादेशी जनता अपनी समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से हल करने में सक्षम है, और हम उनकी संप्रभुता में हस्तक्षेप नहीं करते,” पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा। हालांकि, जमीन पर पाकिस्तान की “अति-सक्रिय” कूटनीति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
फरवरी 2026 के चुनाव यह तय करेंगे कि बांग्लादेश एक स्थिर लोकतंत्र की ओर बढ़ेगा या फिर बाहरी शक्तियों के खेल का हिस्सा बनकर रह जाएगा। मुहम्मद यूनुस प्रशासन की भूमिका अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कड़ी निगरानी में है।
