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‘द राजा साब’ बॉक्स ऑफिस: प्रभास की फिल्म ने प्रशंसको के शोर के बीच ₹124 करोड़ का आंकड़ा पार किया

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मुंबई — नेशनल अवार्ड विजेता सुपरस्टार प्रभास ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे बॉक्स ऑफिस के बेताज बादशाह हैं। मारुति द्वारा निर्देशित उनकी नवीनतम फिल्म, द राजा साब, जो एक हॉरर-कॉमेडी है, ने अपनी रिलीज के पहले छह दिनों के भीतर घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹120 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया और बीच के दिनों में कमाई की रफ्तार धीमी होने के बावजूद, फिल्म का प्रदर्शन देश भर में प्रभास की जबरदस्त लोकप्रियता को दर्शाता है।

आज, 15 जनवरी 2026 तक, फिल्म ने भारत में कुल ₹124.71 करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है। हालांकि, इस व्यावसायिक सफलता पर ओडिशा में हुई एक नाटकीय घटना का साया पड़ गया है, जहाँ प्रशंसकों के जश्न ने एक खतरनाक रूप ले लिया।

छठे दिन का विश्लेषण: तेलुगु बेल्ट में पकड़ मजबूत

अपने छठे दिन (बुधवार) को, द राजा साब ने सभी भाषाओं में लगभग ₹5.25 करोड़ की कमाई की। पहले दिन की ₹53 करोड़ से अधिक की कमाई के मुकाबले यह आंकड़ा काफी कम है, लेकिन बुधवार को संग्रह में आई 9% की मामूली बढ़त संकेत देती है कि संक्रांति की छुट्टियों के दौरान फिल्म ने पारिवारिक दर्शकों के बीच अपनी जगह बना ली है।

छठे दिन की कमाई का भाषाई विवरण इस प्रकार है:

  • तेलुगु: ₹3.35 करोड़

  • हिंदी: ₹1.85 करोड़

  • तमिल/कन्नड़: ₹4 लाख (कुल)

  • मलयालम: ₹1 लाख

तेलुगु मार्केट में फिल्म ने 26.80% की सम्मानजनक ऑक्यूपेंसी बनाए रखी, जबकि शाम के शो में यह बढ़कर 33.91% तक पहुंच गई। हिंदी संस्करण की रफ्तार हालांकि धीमी रही, लेकिन रात के शो में दर्शकों की संख्या बढ़ी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तर भारत में प्रभास का जादू अब भी कायम है।

ओडिशा में हंगामा: आरती और पटाखों ने मचाई अफरा-तफरी

बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के जश्न के बीच, ओडिशा के रायगढ़ा जिले के अशोक टॉकीज में हुई एक घटना ने देश भर में थिएटर सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है।

फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य—प्रभास की शानदार एंट्री—के दौरान, कुछ उत्साहित प्रशंसकों ने हॉल के भीतर दीये जलाकर आरती करनी शुरू कर दी और पटाखे फोड़ने लगे। पटाखों की चिंगारी से दर्शकों द्वारा फेंके गए कागज़ के टुकड़ों (confetti) में आग लग गई, जिससे पर्दे के पास अचानक लपटें उठने लगीं।

स्क्रीन के पास आग की लपटें देखकर दर्शकों में भगदड़ मच गई। सौभाग्य से, थिएटर स्टाफ और सतर्क प्रशंसकों ने तुरंत आग पर काबू पा लिया। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने थिएटर मालिकों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है।

कहानी और कलाकार: एक नया प्रयोग

द राजा साब प्रभास के लिए एक अलग तरह का अनुभव है, जिन्होंने पिछले एक दशक में बाहुबली और कल्कि 2898 AD जैसी भारी-भरकम एक्शन फिल्में दी हैं। इस फिल्म के जरिए वे अपने पुराने “डार्लिंग” वाले अंदाज़ में वापस लौटे हैं।

फिल्म की कहानी राजा (प्रभास) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी दादी गंगम्मा (जरीना वहाब) के साथ रहता है। गंगम्मा अल्जाइमर से पीड़ित हैं और उनकी आखिरी इच्छा अपने खोए हुए पति कनकराजा (संजय दत्त) को देखने की है। दादाजी की तलाश राजा को नरसापुर जंगल के एक रहस्यमयी महल में ले जाती है, जहाँ डरावनी और अलौकिक शक्तियों का सामना होता है।

फिल्म की प्रतिक्रिया पर बात करते हुए, निर्देशक मारुति ने हाल ही में हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा:

“हम दर्शकों को लगातार एक्शन फिल्मों के बाद एक पूर्ण मनोरंजन देना चाहते थे। कुछ लोगों को कहानी थोड़ी ढीली लगी, इसलिए हमने फीडबैक सुनकर दूसरे हाफ को काट-छाँट कर छोटा और रोमांचक बना दिया है। प्रभास गारू को इस मज़ेदार भूमिका में देखना हमारी सबसे बड़ी जीत है।”

निष्कर्ष: संक्रांति का महासंग्राम

जैसे ही द राजा साब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर रही है, ध्यान “शुरुआती भीड़” से हटकर “लगातार दर्शकों” की ओर चला गया है। आने वाले दिनों में पारिवारिक दर्शकों को आकर्षित करने की क्षमता ही यह तय करेगी कि यह फिल्म एक ब्लॉकबस्टर बनेगी या केवल प्रभास के प्रशंसकों तक ही सीमित रहेगी।

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। समाचार टुडे में अनूप कुमार की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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