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नोवार्टिस बड़े सौदे के साथ भारतीय इकाई से बाहर
मुंबई – शुक्रवार को भारतीय दवा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब स्विस फार्मा दिग्गज नोवार्टिस एजी (Novartis AG) ने अपनी सूचीबद्ध भारतीय सहायक कंपनी, नोवार्टिस इंडिया लिमिटेड (NIL) से पूरी तरह बाहर निकलने के अपने फैसले की घोषणा की। इस खबर के बाद शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया और नोवार्टिस इंडिया के शेयर 20% की तेजी के साथ ₹996 प्रति शेयर के ऊपरी सर्किट (upper circuit) पर पहुंच गए।
वेवराइज इन्वेस्टमेंट्स (WaveRise Investments), क्रिसकैपिटल (ChrysCapital) और टू इनफिनिटी पार्टनर्स (Two Infinity Partners) के एक कंसोर्टियम ने मूल कंपनी की पूरी 70.68% हिस्सेदारी लगभग ₹1,446 करोड़ में खरीदने के लिए एक समझौता किया है। यह सौदा ₹860.64 प्रति शेयर की कीमत पर तय किया गया है, जो पिछले दिन की बंद कीमत पर प्रीमियम दर्शाता है।
सौदे की संरचना और ओपन ऑफर
शेयर खरीद समझौते (SPA) के बाद, कंसोर्टियम ने सार्वजनिक शेयरधारकों से अतिरिक्त 26% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक अनिवार्य ‘ओपन ऑफर’ (खुला प्रस्ताव) पेश किया है। यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अधिग्रहण नियमों के तहत आवश्यक है। यदि यह ओपन ऑफर पूरी तरह सफल रहता है, तो नए मालिकों द्वारा कुल निवेश ₹1,998 करोड़ से अधिक हो जाएगा।
अधिग्रहण के बाद, वेवराइज के पास 72.78% की बहुमत हिस्सेदारी होने की उम्मीद है, जबकि क्रिसकैपिटल फंड X और टू इनफिनिटी पार्टनर्स के पास क्रमशः 17.33% और 6.57% हिस्सेदारी होगी। नए मालिकों ने कंपनी का नाम बदलने का प्रस्ताव भी रखा है, जिसके लिए विनियामक मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
रणनीतिक बदलाव पर टिप्पणी करते हुए, मुंबई की एक प्रमुख ब्रोकरेज के वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा: “सूचीबद्ध इकाई से नोवार्टिस का बाहर निकलना दो साल की रणनीतिक समीक्षा का परिणाम है। हालांकि स्विस मूल कंपनी भारत में अपनी पुरानी सूचीबद्ध इकाई से हट रही है, लेकिन क्रिसकैपिटल जैसे बड़े खिलाड़ी का प्रवेश यह बताता है कि घरेलू निजी इक्विटी अभी भी ‘वोवेरन’ जैसे स्थापित ब्रांडों के वितरण और साख में अपार मूल्य देखती है।”
रणनीतिक धुरी: वैश्विक संदर्भ
यह निकास ऐसे समय में हुआ है जब नोवार्टिस एजी अपने वैश्विक पदचिह्न (global footprint) को पुनर्गठित कर रहा है। अप्रैल 2025 में, कंपनी ने अमेरिका में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए $23 बिलियन की भारी निवेश योजना की घोषणा की थी। इस कदम को अमेरिकी प्रशासन के तहत संभावित दवा आयात शुल्क और व्यापार बाधाओं के खिलाफ एक रक्षात्मक रणनीति के रूप में देखा गया था।
ऐतिहासिक रूप से, नोवार्टिस इंडिया ने विनिर्माण केंद्र के बजाय मुख्य रूप से विपणन और वितरण शाखा के रूप में कार्य किया है। कंपनी भारतीय बाजार में अपने दर्द निवारक दवा ‘वोवेरन’ और विभिन्न कैल्शियम सप्लीमेंट्स के लिए सबसे ज्यादा जानी जाती है। सूचीबद्ध इकाई से बाहर निकलकर, स्विस मूल कंपनी अपने संचालन को सुव्यवस्थित कर सकती है, हालांकि उम्मीद है कि वह हैदराबाद जैसे शहरों में अपनी गैर-सूचीबद्ध उपस्थिति और बड़े पैमाने के सेवा केंद्रों को बनाए रखेगी।
पृष्ठभूमि: दो साल की समीक्षा
बेचने का फैसला अप्रत्याशित नहीं था। नोवार्टिस ने 2024 में अपने भारतीय परिचालन की रणनीतिक समीक्षा शुरू की थी, जिसमें मुंबई स्थित फर्म में अपनी 70.68% हिस्सेदारी की व्यवहार्यता का आकलन किया गया था। भारत में एक जाना-माना नाम होने के बावजूद, सूचीबद्ध इकाई को बहुराष्ट्रीय सहायक कंपनियों के लिए सामान्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें सीमित स्थानीय विनिर्माण और पुराने ब्रांडों पर केंद्रित पोर्टफोलियो शामिल था।
नए निवेशकों के लिए, यह अधिग्रहण एक गहरे वितरण नेटवर्क के साथ बना-बनाया मंच प्रदान करता है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारत की सबसे सक्रिय निजी इक्विटी फर्मों में से एक, क्रिसकैपिटल, घरेलू फार्मा व्यवसायों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण विशेषज्ञता लाती है।
जैसे-जैसे यह सौदा पूरा होने की ओर बढ़ेगा, बाजार कंपनी की रीब्रांडिंग और नए कंसोर्टियम द्वारा प्रतिस्पर्धी भारतीय बाजार में उत्पाद पाइपलाइन को पुनर्जीवित करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर करीब से नज़र रखेगा।
