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न्यूजीलैंड के कठिन जॉब मार्केट में प्रवासियों का संघर्ष

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SamacharToday.co.in - न्यूजीलैंड के कठिन जॉब मार्केट में प्रवासियों का संघर्ष - Image Credited by News18

दशकों से, न्यूजीलैंड को एक ऐसे स्वर्ग के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है जो संतुलित जीवनशैली और सभी के लिए “समान अवसर” प्रदान करता है। हालांकि, जैसे-जैसे 2026 का वर्ष आगे बढ़ रहा है, कुशल प्रवासियों का एक बड़ा वर्ग, विशेष रूप से भारत से, एक अलग ही वास्तविकता बयां कर रहा है। यहाँ का जॉब मार्केट अब “स्थानीय अनुभव” (local experience) की मांग से घिरा हुआ है, जिसे कई लोग अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को रोकने वाली एक अदृश्य दीवार मान रहे हैं।

यह चर्चा तब और तेज हो गई जब एक भारतीय महिला, जो हाल ही में अमेरिका से न्यूजीलैंड शिफ्ट हुई थी, ने सोशल मीडिया पर अपने संघर्षों को साझा किया। उनके वीडियो ने उन हजारों पेशेवरों की भावनाओं को व्यक्त किया जो एक अजीब स्थिति में फंसे हैं: बिना न्यूजीलैंड के अनुभव के नौकरी नहीं मिलती, और बिना नौकरी के अनुभव नहीं मिलता।

वायरल पोस्ट: अनिश्चितता और धैर्य की कहानी

महिला ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि उन्होंने भारत और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में काम किया है, लेकिन न्यूजीलैंड में कदम रखना उनके लिए सबसे कठिन रहा है। उन्होंने कहा, “जब से मैं यहाँ आई हूँ, मेरे दोस्त मुझसे जॉब मार्केट के बारे में पूछ रहे हैं। ईमानदारी से कहूँ तो, अभी स्थिति काफी कठिन है। नौकरियां सीमित हैं और कंपनियां स्थानीय अनुभव वाले लोगों को प्राथमिकता देती हैं।”

इस पोस्ट पर कमेंट करने वाले अन्य लोगों ने भी इसी तरह की आपत्तियां जताईं। एक यूजर ने लिखा कि 5,000 आवेदन भेजने के बाद उन्हें सिर्फ एक ऑफर मिला, जबकि दूसरे ने बताया कि 5 महीनों में 110 से अधिक आवेदन देने के बावजूद उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।

2026 की आर्थिक स्थिति

रोजगार के लिए यह संघर्ष केवल “किस्मत” का खेल नहीं है, बल्कि गिरती अर्थव्यवस्था का परिणाम है। ‘स्टैट्स एनजेड’ (Stats NZ) के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की शुरुआत में न्यूजीलैंड में बेरोजगारी की दर 5.4% तक पहुंच गई है, जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है।

इस बदलाव के मुख्य कारण हैं:

  • स्थानीय अनुभव का फिल्टर: न्यूजीलैंड के नियोक्ता अक्सर जोखिम लेने से बचते हैं और “सांस्कृतिक तालमेल” के नाम पर घरेलू कार्य अनुभव को प्राथमिकता देते हैं।

  • इमिग्रेशन नियम: मार्च 2026 में, सरकार ने प्रवासियों के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 35.00 न्यूजीलैंड डॉलर प्रति घंटा कर दिया है, जिससे कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करना महंगा हो गया है।

  • वीजा नियमों में बदलाव: 20 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले नए नियमों ने ‘ओपन वर्क वीजा’ धारकों की लचीलापन कम कर दी है।

विशेषज्ञ की राय: कौशल का अंतर

भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि सामान्य बाजार कठिन है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी भारी मांग है। जहाँ आईटी और प्रशासनिक पदों के लिए भारतीय पेशेवर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कर्मियों की कमी है।

“2026 में न्यूजीलैंड का जॉब मार्केट अब प्रवासियों के लिए एक जैसा नहीं रह गया है,” सारा मिशेल, एक वरिष्ठ टैलेंट कंसल्टेंट ने कहा। “हम देख रहे हैं कि जहाँ 67% पेशेवर एआई (AI) में कौशल बढ़ा रहे हैं, वहीं सबसे बड़ी रिक्तियां अभी भी बुनियादी सेवाओं में हैं। प्रवासियों को सफल होने के लिए केवल अपने पुराने सीवी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि नेटवर्किंग के जरिए स्थानीय ज्ञान की कमी को पूरा करना चाहिए।”

आगे की राह: धैर्य और हकीकत

कई भारतीय प्रवासियों के लिए, न्यूजीलैंड का सपना अब ऑस्ट्रेलिया या मध्य पूर्व के विकल्पों के सामने फीका पड़ रहा है। फिर भी, जो लोग यहाँ रुकने का फैसला कर रहे हैं, उनके लिए “धैर्य” ही एकमात्र सहारा है।

वायरल पोस्ट साझा करने वाली महिला ने अपनी यात्रा के लचीलेपन को इन शब्दों में समेट दिया: “हर अध्याय सुंदर नहीं होता। अभी यह धैर्य, निरंतरता और अनिश्चितता के बीच खुद पर विश्वास रखने के बारे में है। नए देश में नौकरी ढूंढना आसान नहीं है, लेकिन मुझे पता है कि यह दौर मुझे मजबूत बना रहा है।”

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