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International Relations

बांग्लादेश में हिंदू मॉब लिंचिंग पर भारत में आक्रोश; पुरी में विरोध प्रदर्शन

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SamacharTOday.co.in - बांग्लादेश में हिंदू मॉब लिंचिंग पर भारत में आक्रोश; पुरी में विरोध प्रदर्शन - Image Credited by The Indian Express

बांग्लादेश में दो हिंदू पुरुषों की नृशंस हत्या के बाद भारत में भारी गुस्सा और विरोध की लहर दौड़ गई है। शुक्रवार को ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के बाहर हिंदू संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह आक्रोश बांग्लादेश के मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास और राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल की मॉब लिंचिंग के बाद उपजा है। इन घटनाओं ने पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत के विभिन्न शहरों में विरोध की गूंज

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बाहर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पुतले जलाए। दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर भी तनाव देखा गया, जहाँ प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई। 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास की हत्या विशेष रूप से वीभत्स थी; भीड़ ने ईशनिंदा के झूठे आरोपों में उसे पीट-पीटकर मार डाला और फिर उसके शव को आग लगा दी। इसके कुछ ही दिनों बाद अमृत मंडल की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

तारिक रहमान की 17 साल बाद घर वापसी

बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में भी एक बड़ा उलटफेर हुआ है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद गुरुवार को ढाका लौटे। उनके आगमन पर हवाई अड्डे से लेकर राजधानी की सड़कों तक उनके समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। जनरल जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की वापसी को फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, वे ऐसे समय में लौटे हैं जब देश कानून-व्यवस्था के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता और चुनाव की चुनौती

नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने शेख हसीना की आवामी लीग पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध पर चिंता जताई है और कहा है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक है। भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध भी इस समय बेहद तनावपूर्ण हैं, जिसे सुधारना यूनुस प्रशासन और भविष्य की निर्वाचित सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

सब्यसाची एक अनुभवी और विचारशील संपादक हैं, जो समाचारों और समसामयिक विषयों को गहराई से समझने के लिए जाने जाते हैं। उनकी संपादकीय दृष्टि सटीकता, निष्पक्षता और सार्थक संवाद पर केंद्रित है। सब्यसाची का मानना है कि संपादन केवल भाषा सुधारने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विचारों को सही दिशा देने की कला है। वे प्रत्येक लेख और रिपोर्ट को इस तरह से गढ़ते हैं कि पाठकों तक न केवल सूचना पहुँचे, बल्कि उसका सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखे। उन्होंने विभिन्न विषयों—राजनीति, समाज, संस्कृति, शिक्षा और पर्यावरण—पर संतुलित संपादकीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके संपादन के माध्यम से समाचार टुडे में सामग्री और भी प्रासंगिक, विश्वसनीय और प्रभावशाली बनती है। समाचार टुडे में सब्यसाची की भूमिका: संपादकीय सामग्री का चयन और परिष्करण समाचारों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना लेखकों को मार्गदर्शन और संपादकीय दिशा प्रदान करना रुचियाँ: लेखन, साहित्य, समसामयिक अध्ययन, और विचार विमर्श।

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