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बिग टेक का सफर: अमेज़न, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट के कार्य-संस्कृति का विश्लेषण

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SamacharToday.co.in - बिग टेक का सफर अमेज़न, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट के कार्य-संस्कृति का विश्लेषण - Image Credited by MoneyControl

वैश्विक प्रौद्योगिकी के प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में, भारतीय इंजीनियरों की सफलता की कहानियाँ अक्सर पेशेवर उत्कृष्टता का उदाहरण पेश करती हैं। अमेरिका में स्थित 32 वर्षीय वरिष्ठ सॉफ्टवेयर डेवलपर नंदिता गिरी इस विमर्श में एक प्रमुख आवाज़ बनकर उभरी हैं। उनकी अमेज़न, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट—दुनिया की तीन सबसे बड़ी टेक कंपनियों—की यात्रा यह समझने का एक दुर्लभ अवसर देती है कि इन दिग्गजों की कार्य-संस्कृति और अपेक्षाएं एक-दूसरे से कितनी भिन्न हैं।

हरियाणा के शैक्षणिक संस्थानों से लेकर माइक्रोसॉफ्ट के मुख्यालय तक का नंदिता का सफर उद्योग में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है: कोडिंग से बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रणनीतिक कार्यान्वयन की ओर बढ़ना।

शैक्षणिक आधार: एनआईटी कुरुक्षेत्र से सिएटल तक

नंदिता की कहानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), कुरुक्षेत्र से शुरू हुई। कई सफल भारतीय इंजीनियरों की तरह, उनका प्रशिक्षण गणित और एल्गोरिदम समस्याओं को हल करने पर आधारित था। यही अनुशासन उनके लिए वैश्विक मंच का टिकट बना, जब अमेज़न ने उन्हें कैंपस भर्ती के जरिए सीधे चुन लिया। 2018 में, नंदिता सिएटल चली गईं, जिससे अमेरिकी तकनीकी उद्योग के केंद्र में उनका प्रवेश हुआ।

अमेज़न: स्केलेबिलिटी और ओनरशिप की संस्कृति

अमेज़न में नंदिता का सामना एक ऐसे कार्य परिवेश से हुआ जो अपने ‘नेतृत्व सिद्धांतों’ (Leadership Principles) के लिए जाना जाता है। अमेज़न की “डे 1” (Day 1) फिलॉसफी कंपनी को हमेशा एक स्टार्टअप की तरह ऊर्जावान बनाए रखने पर जोर देती है।

नंदिता ने बताया, “अमेज़न में केवल सही उत्तर प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं था। आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप रखरखाव (maintainability), स्केलेबिलिटी और दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में गहराई से सोचें।” यहाँ तकनीकी क्षमता के साथ-साथ कंपनी की संस्कृति के साथ तालमेल बिठाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

AI की ओर झुकाव: स्व-शिक्षित सफलता

नंदिता के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने AI को एक शौक के रूप में अपनाया। काम के घंटों के बाद, उन्होंने यूट्यूब ट्यूटोरियल देखने और ब्लॉग पढ़ने में समय बिताया।

उन्होंने कहा, “AI के बारे में मैं जो कुछ भी जानती हूँ, वह मैंने खुद सीखा है।” उन्होंने छोटे स्तर पर व्यक्तिगत कार्यों के लिए AI एजेंट बनाकर शुरुआत की। जिस काम को पूरा करने में उन्हें दो दिन लगते थे, वह अब एक घंटे से भी कम समय में होने लगा। इसी स्व-शिक्षित विशेषज्ञता ने मेटा जैसी कंपनियों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया।

मेटा: गति और एकीकृत ढांचा

2022 में, नंदिता मेटा (पूर्व में फेसबुक) से जुड़ीं। अमेज़न और मेटा के बीच का अंतर स्पष्ट था। मेटा का इंजीनियरिंग वातावरण समझने में तेज़ लगा, क्योंकि यहाँ फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्मों के लिए एक एकीकृत कोडबेस (unified codebase) है। मेटा का “मूव फास्ट” (तेजी से आगे बढ़ें) मंत्र उनके कार्य करने के तरीके में साफ झलकता है।

माइक्रोसॉफ्ट: एंटरप्राइज और प्रोडक्टिविटी पर ध्यान

2023 में, नंदिता माइक्रोसॉफ्ट में शामिल हुईं, जहाँ वे Copilot जैसे महत्वपूर्ण AI उत्पादों पर काम कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट की संस्कृति अन्य टेक दिग्गजों से काफी अलग है। यह ग्राहकों से अधिक व्यावसायिक उत्पादकता (business productivity) पर केंद्रित है।

नंदिता के अनुसार, “जहाँ अमेज़न और मेटा गति और गहन सीखने पर जोर देते हैं, वहीं माइक्रोसॉफ्ट का वातावरण दीर्घकालिक व्यावसायिक प्रभाव को प्राथमिकता देता है।”

उभरते इंजीनियरों के लिए सबक

नंदिता गिरी का करियर निरंतर सीखने के महत्व का प्रमाण है। एक शौक के रूप में AI सीखकर उन्होंने खुद को एक कैंपस रिक्रूट से एक ऐसे वरिष्ठ डेवलपर में बदल दिया जो दुनिया की सबसे शक्तिशाली कंपनियों का हिस्सा है। उनकी यात्रा हमें याद दिलाती है कि आज के दौर में सबसे मूल्यवान कौशल केवल वह नहीं है जो आप जानते हैं, बल्कि यह है कि आप कितनी जल्दी खुद को नई तकनीकों के लिए तैयार कर सकते हैं।

देवाशीष एक समर्पित लेखक और पत्रकार हैं, जो समसामयिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से सीधा जुड़ाव बनाने वाली है। देवाशीष का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच फैलाने की जिम्मेदारी भी निभाती है। वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न केवल जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों को विचार और समाधान की दिशा में प्रेरित भी करते हैं। समाचार टुडे में देवाशीष की भूमिका: स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, पठन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक विमर्श।

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