Defense & Security
भारत ने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का सफल परीक्षण किया
भुवनेश्वर — अपनी विश्वसनीय न्यूनतम निवारण (Minimum Deterrence) क्षमता और स्वदेशी रक्षा शक्ति को सुदृढ़ करते हुए, भारत ने 6 फरवरी, 2026 को ओडिशा के तट पर चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM), अग्नि-3 का सफलतापूर्वक प्रशिक्षण लॉन्च किया।
सामरिक बल कमान (SFC) के तत्वावधान में आयोजित इस उड़ान परीक्षण ने सभी परिचालन और तकनीकी मापदंडों को पूरा किया, जिससे हथियार प्रणाली की विश्वसनीयता और सटीकता की पुष्टि हुई। इस प्रक्षेपण को एक नियमित उपयोगकर्ता प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश के परमाणु-क्षम शस्त्रागार की तैयारियों को प्रमाणित करना है।
तकनीकी सटीकता और परिचालन सफलता
अग्नि-3 मिसाइल को सुबह लगभग 10:15 बजे एक मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अधिकारियों के अनुसार, मिसाइल ने अपने निर्धारित पथ (ट्रैजेक्टरी) का पालन किया, अपनी पूरी मारक क्षमता हासिल की और बंगाल की खाड़ी में निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र में उच्च सटीकता के साथ गिरी।
तट के साथ स्थित सभी टेलीमेट्री स्टेशनों, ट्रैकिंग रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणालियों ने पूरी उड़ान पथ की निगरानी की। इस परीक्षण की सफलता यह दर्शाती है कि अग्नि-3 भारत की रणनीतिक प्रहार क्षमता का एक मजबूत और अभिन्न अंग बनी हुई है।
विशेषज्ञ विश्लेषण: राष्ट्रीय सुरक्षा का स्तंभ
रक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि अग्नि-3 का निरंतर सफल परीक्षण क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। कम दूरी के वेरिएंट के विपरीत, अग्नि-3 भारत को 3,000 से 3,500 किलोमीटर के दायरे में महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्यों को कवर करने के लिए आवश्यक पहुंच प्रदान करती है।
अग्नि कार्यक्रम से पहले जुड़े रहे सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “अग्नि-3 भारत के मध्यम दूरी के शस्त्रागार की कार्यवाहक शक्ति (वर्कहॉर्स) है। इसकी उच्च पेलोड क्षमता और परिष्कृत नेविगेशन प्रणालियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि ‘विश्वसनीय न्यूनतम निवारण’ का सिद्धांत एक व्यावहारिक वास्तविकता बना रहे। यह सफल उपयोगकर्ता परीक्षण पुष्टि करता है कि सशस्त्र बलों में इसकी तैनाती को निरंतर तकनीकी विश्वसनीयता का समर्थन प्राप्त है।”
अग्नि श्रृंखला का विकास
अग्नि-3 का पहला सफल परीक्षण 2007 में किया गया था (2006 में शुरुआती विफलता के बाद)। तब से, यह परीक्षण और शोधन के कई दौर से गुजर चुकी है। यह दो चरणों वाली ठोस-प्रणोदक (solid-propellant) मिसाइल है, जिसकी ऊंचाई लगभग 17 मीटर और व्यास 2 मीटर है।
अग्नि-3 की प्रमुख विशेषताएं:
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प्रकार: मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)
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मारक क्षमता (Range): 3,000 से 3,500 किलोमीटर
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पेलोड क्षमता: 1.5 टन तक (परमाणु या पारंपरिक)
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प्रणोदन (Propulsion): दो चरणों वाला ठोस ईंधन इंजन
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नेविगेशन: उन्नत रिंग लेजर गाइरो-आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS)
अग्नि-3 मिसाइल, अग्नि-2 (2,000 किमी) और अग्नि-4 (4,000 किमी) के बीच के महत्वपूर्ण अंतर को भरती है, जिससे एक स्तरीय रक्षा संरचना (layered defense structure) सुनिश्चित होती है। अपनी मारक क्षमता की तुलना में इसका संक्षिप्त आकार इसे रेल और सड़क-मोबाइल लॉन्चरों सहित विभिन्न प्लेटफार्मों से लॉन्च करने की अनुमति देता है, जो युद्ध की स्थिति में इसकी उत्तरजीविता (survivability) को काफी बढ़ाता है।
