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भाई के निधन के बाद राहुल रामकृष्ण की प्रतिबंध की अपील

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SamacharToday.co.in - भाई के निधन के बाद राहुल रामकृष्ण की प्रतिबंध की अपील - Image Credited by Zee News

एक हृदयविदारक अपील में, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है, प्रशंसित तेलुगु अभिनेता और लेखक राहुल रामकृष्ण ने शाकनाशी (herbicide) ‘पैराक्वाट’ (Paraquat) पर तत्काल राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यह अपील गुरुवार, 26 मार्च 2026 को इस अत्यधिक जहरीले रसायन के कारण उनके भाई की दुखद मृत्यु के बाद आई है।

‘अर्जुन रेड्डी’, ‘आरआरआर’ और ‘अला वैकुंठपुरमुलु’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना दुख और चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को टैग करते हुए, उन्होंने इस पदार्थ की घातक क्षमता और इसकी आसान उपलब्धता पर प्रकाश डाला।

एक व्यक्तिगत त्रासदी बनी सार्वजनिक मांग

राहुल रामकृष्ण ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज पैराक्वाट के जहर के कारण मैंने अपने भाई को खो दिया। यह भयानक रूप से घातक है और आत्म-विनाश के लिए इसका व्यापक रूप से दुरुपयोग किया जाता है। मैं हैरान हूं कि यह हर जगह कितनी आसानी से उपलब्ध है। डॉक्टर मामलों की संख्या से परेशान हैं। कृपया जल्द से जल्द इस पर प्रतिबंध लगाएं और जान बचाएं।” उनकी यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और ग्रामीण व अर्ध-शहरी भारत में लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर सबका ध्यान खींचा।

पैराक्वाट की घातकता को समझना

पैराक्वाट एक तीव्र गति से काम करने वाला शाकनाशी है। कृषि में प्रभावी होने के बावजूद, मनुष्यों के लिए इसकी विषाक्तता चरम पर है। कई अन्य जहरों के विपरीत, पैराक्वाट का कोई ज्ञात मारक (Antidote) नहीं है।

जब इसका सेवन किया जाता है, तो यह मुंह, पेट और आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। रक्तप्रवाह में प्रवेश करने के बाद, यह फेफड़ों में जमा हो जाता है, जिससे सांस लेना असंभव हो जाता है। यह गुर्दे और लीवर को भी विफल कर देता है। वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसके संपर्क में रहने को पार्किंसंस रोग के बढ़ते जोखिम से भी जोड़ा है।

हैदराबाद के एक प्रमुख अस्पताल के वरिष्ठ विषविज्ञानी डॉ. वी. नवीन ने कहा: “पैराक्वाट शायद भारत में वर्तमान में उपलब्ध सबसे खतरनाक पदार्थों में से एक है। इसकी घातक खुराक बहुत कम होती है। कई देशों ने पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया है, और अब समय आ गया है कि भारत ऐसी दुखद मौतों को रोकने के लिए इसकी उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन करे।”

निष्कर्ष और आगे की राह

पैराक्वाट पहले से ही यूरोपीय संघ सहित 30 से अधिक देशों में प्रतिबंधित है। भारत में, स्वास्थ्य कार्यकर्ता वर्षों से इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए अभियान चला रहे हैं। राहुल रामकृष्ण की इस व्यक्तिगत क्षति ने अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस घातक रसायन की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाती है। फिलहाल, पूरा फिल्म उद्योग और प्रशंसक इस दुख की घड़ी में अभिनेता के साथ खड़े हैं।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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