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रश्मिका-विजय की ‘शादी’ की तस्वीरों का सच: AI का धोखा

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SamacharToday.co.in - रश्मिका-विजय की 'शादी' की तस्वीरों का सच AI का धोखा - Image Credited by Newsable Asianet News

दक्षिण भारतीय सिनेमा के दो बड़े सितारों, रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की “शादी” की खबरों ने एक बार फिर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। दिसंबर 2025 में, जहाँ उनकी फरवरी 2026 में होने वाली संभावित शादी की चर्चाएँ तेज हैं, वहीं हाल ही में वायरल हुई उनकी “गुप्त विवाह” की तस्वीरें पूरी तरह से फर्जी और एआई (AI) द्वारा निर्मित पाई गई हैं।

वायरल तस्वीरों के पीछे की सच्चाई

सोशल मीडिया पर प्रसारित इन तस्वीरों में विजय शेरवानी में और रश्मिका पारंपरिक दुल्हन के लिबास में नजर आ रहे हैं। भ्रम तब और बढ़ गया जब तस्वीरों में महेश बाबू और उनकी पत्नी नम्रता शिरोडकर को इस “जोड़े” को आशीर्वाद देते हुए दिखाया गया। तकनीकी विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि ये तस्वीरें डीपफेक तकनीक का उपयोग करके बनाई गई हैं।

अपनी पहचान के इस दुरुपयोग पर रश्मिका मंदाना ने हाल ही में कहा, “जब सच्चाई को बनाया जा सकता है, तो विवेक ही हमारा सबसे बड़ा बचाव है। हमें एआई का उपयोग एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए करना चाहिए, न कि जनता को गुमराह करने वाले झूठ के लिए।”

दोस्ती से प्यार तक का सफर

इन दोनों सितारों के बीच संबंधों की खबरें 2018 की सुपरहिट फिल्म ‘गीता गोविंदम’ के सेट से शुरू हुई थीं। इसके बाद 2019 में ‘डियर कॉमरेड’ में उनकी केमिस्ट्री ने इन अफवाहों को और हवा दी। हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन अक्टूबर 2025 में हैदराबाद में उनकी सगाई की खबरों और हाल ही में रश्मिका की उंगली में दिखी हीरे की अंगूठी ने प्रशंसकों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है।

वर्तमान में, विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि यह जोड़ी 26 फरवरी, 2026 को उदयपुर में सात फेरे ले सकती है। तब तक, पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी किसी भी “लीक” तस्वीर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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