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राजपाल यादव का संकट: क्या सच में दिवालिया हो गया है कॉमेडी किंग?

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SamacharToday.co.in - राजपाल यादव का संकट क्या सच में दिवालिया हो गया है कॉमेडी किंग - Image Credited Her Zindagi

नई दिल्ली — पिछले दो दशकों से, राजपाल यादव का पर्दे पर आना ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी रहा है। ‘छोटा डॉन‘ से लेकर ‘नटवर’ तक, यादव ने हिंदी सिनेमा में खुद को एक विश्वसनीय कॉमेडी स्टार के रूप में स्थापित किया है। लेकिन आज, लाखों को हंसाने वाला यह कलाकार तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे है। 12 फरवरी, 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई फिर से शुरू हुई, जिससे उनके भविष्य पर सस्पेंस बना हुआ है।

राजपाल यादव लगभग ₹9 करोड़ के कर्ज और चेक बाउंस मामले में 5 फरवरी से जेल में बंद हैं। यह मामला करीब 16 साल पुराना है। इस घटना ने एक नई बहस छेड़ दी है: क्या बॉलीवुड का यह दिग्गज अभिनेता वास्तव में दिवालिया हो गया है, या यह केवल वित्तीय कुप्रबंधन का परिणाम है?

निर्देशकीय सपना जो बन गया गले की फांस

राजपाल यादव की मुसीबतों की शुरुआत 2010 में हुई थी। अभिनय से आगे बढ़कर उन्होंने फिल्म निर्देशन में हाथ आजमाया और ‘अता पता लापत्ता’ नामक फिल्म बनाई। इस फिल्म के लिए उन्होंने दिल्ली के व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल की कंपनी ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ से ₹5 करोड़ उधार लिए थे।

2012 में रिलीज हुई इस फिल्म में ओम पुरी और दारा सिंह जैसे दिग्गज कलाकार थे, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही। ₹5 करोड़ का वह कर्ज समय के साथ ब्याज और कानूनी जुर्माने के कारण बढ़कर करीब ₹9 करोड़ हो गया। अदालत ने पाया कि यादव ने कर्ज चुकाने के लिए जो चेक दिए थे, वे बाउंस हो गए, जिसके बाद उन पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

दिवालियापन या कुप्रबंधन? जनता की राय

यादव की वित्तीय स्थिति को लेकर लोग बंटे हुए हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि ‘भूल भुलैया 3’ और ‘बेबी जॉन’ जैसी बड़ी फिल्मों में काम करने के बावजूद राजपाल ₹9 करोड़ का कर्ज क्यों नहीं चुका पाए?

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में राजपाल ने विभिन्न प्रोजेक्ट्स से ₹7-8 करोड़ कमाए हैं। उनकी हालिया फीस इस प्रकार बताई जा रही है:

  • भूल भुलैया 3: ₹2–3 करोड़

  • चंदू चैंपियन: ₹2 करोड़

  • बेबी जॉन, ड्रीम गर्ल, कटहल: ₹1-1 करोड़

इसके बावजूद, उनके वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि अभिनेता पूरी राशि जुटाने में असमर्थ हैं। उन्होंने ₹25 लाख जैसी छोटी किस्तों में भुगतान करने की पेशकश की, जिसे अदालत ने अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया।

बॉलीवुड का समर्थन: संकट में एकजुटता

इस मुश्किल घड़ी में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे राजपाल के समर्थन में आए हैं। उनके मैनेजर गोल्डी ने पुष्टि की है कि सलमान खान, अजय देवगन, वरुण धवन और फिल्म निर्माता डेविड धवन जैसे दिग्गजों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज फेडरेशन (FWICE) ने भी उद्योग से अपील करते हुए कहा कि राजपाल की यह स्थिति उनके चरित्र का नहीं, बल्कि नियंत्रण से बाहर हुई परिस्थितियों का परिणाम है।

मदद के लिए सबसे पहले आगे आने वाले सोनू सूद ने कहा: “अगली फिल्म के लिए दिया गया एडवांस कोई दान नहीं, बल्कि सम्मान है। जब हमारा अपना कोई कठिन दौर से गुजर रहा हो, तो उद्योग को उसे याद दिलाना चाहिए कि वह अकेला नहीं है।”

पत्नी राधा यादव का अटूट साथ

राजपाल की पत्नी राधा यादव उनके हर उतार-चढ़ाव में ढाल बनकर खड़ी रही हैं। सरेंडर के एक दिन बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हर कोई उनके साथ खड़ा है। फिल्म उद्योग ने बहुत सहयोग किया है। जो लोग भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद।”

प्रसिद्धि और वित्त का सबक

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से तिहाड़ जेल तक का राजपाल यादव का सफर फिल्म उद्योग की अस्थिरता का एक जीवंत उदाहरण है। आज की जमानत सुनवाई पर उनकी किस्मत टिकी है। क्या वह एक आजाद इंसान बनकर बाहर आएंगे या उन्हें अपनी सजा पूरी करनी होगी, यह तो अदालत तय करेगी, लेकिन भारतीय सिनेमा के “नटवर” के सामने आज अपनी वित्तीय और व्यक्तिगत गरिमा को वापस पाने की सबसे बड़ी चुनौती है।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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