International Relations
रूस की कड़ी चेतावनी: “यूरोपीय हमला हुआ तो परिणाम होंगे विनाशकारी”
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रविवार को यूरोप और पश्चिमी देशों को एक बेहद सख्त संदेश देते हुए चेतावनी दी कि यदि रूस की संप्रभुता पर कोई भी हमला किया जाता है, तो उसका जवाब “विनाशकारी” होगा। लावरोव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण शांति बैठक कर रहे हैं।
रूस के इस कड़े रुख ने न केवल यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है, बल्कि वैश्विक मंच पर जारी तनावपूर्ण कूटनीतिक माहौल को भी और अधिक जटिल बना दिया है।
यूरोपीय देशों को लावरोव की दो टूक
सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ (TASS) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में विदेश मंत्री लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस का इरादा किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने का नहीं है। हालांकि, उन्होंने यूरोपीय नेताओं—विशेष रूप से जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों—के प्रति कड़ा लहजा अपनाया।
लावरोव ने कहा, “यूरोपीय राजनेताओं के लिए मेरा संदेश यह है कि रूस के किसी पर हमला करने की आशंका से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन, यदि कोई रूस पर हमला करने पर विचार भी करता है, तो उसे विनाशकारी प्रहार का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने यूरोपीय संघ के भीतर मौजूद कुछ धड़ों को ‘युद्ध पक्ष’ (War Party) करार देते हुए कहा कि ये नेता यूक्रेन में शांति प्रयासों में सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं।
ट्रंप-जेलेंस्की बैठक और शांति योजना
लावरोव की यह टिप्पणी उस दिन आई जब पूरी दुनिया की नजरें फ्लोरिडा पर टिकी थीं। वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वलोडिमिर जेलेंस्की के बीच यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए ’20-सूत्रीय शांति योजना’ पर चर्चा हो रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, यह शांति योजना लगभग 90% से 95% तक तैयार हो चुकी है, जिसमें द्विपक्षीय सुरक्षा गारंटी और एक संभावित संघर्ष विराम शामिल है।
हालांकि, मॉस्को को इस बात पर गहरी आपत्ति है कि कुछ यूरोपीय देश सुरक्षा गारंटी के हिस्से के रूप में यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती पर जोर दे रहे हैं। लावरोव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यूक्रेन की धरती पर तैनात कोई भी विदेशी सैनिक रूस के लिए एक ‘वैध लक्ष्य’ (Legitimate Target) होगा।
ट्रंप और शांति वार्ता पर रूस का रुख
दिलचस्प बात यह है कि लावरोव ने राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम द्वारा शांति समझौते के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस संघर्ष के मूल कारणों को दूर करने के लिए अमेरिकी वार्ताकारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
“हम राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हैं। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद, अब यूरोप और यूरोपीय संघ शांति की राह में मुख्य बाधा बनकर उभरे हैं। वे इस बात को छिपा नहीं रहे हैं कि वे युद्ध के मैदान में रूस से लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।” — सर्गेई लावरोव, रूस के विदेश मंत्री
चीन और ताइवान पर ‘परम मित्रता’ का प्रदर्शन
इंटरव्यू के दौरान लावरोव ने केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर भी बात की। उन्होंने ताइवान के मुद्दे पर बीजिंग को पूर्ण समर्थन देने का वादा किया। लावरोव ने 2001 की ‘रूस-चीन मैत्री संधि’ का हवाला देते हुए कहा कि यदि ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो रूस चीन की राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में उसके साथ खड़ा रहेगा।
उन्होंने पश्चिम पर आरोप लगाया कि वह ताइवान का उपयोग चीन के खिलाफ सैन्य-रणनीतिक बाधा के रूप में कर रहा है। लावरोव ने कहा, “ताइवान चीन का अभिन्न अंग है और रूस किसी भी रूप में इसकी स्वतंत्रता का विरोध करता है।”
2025 का बदलता वैश्विक परिदृश्य
साल 2025 रूस-यूक्रेन संघर्ष के लिए एक निर्णायक वर्ष साबित हो रहा है। फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध ने अब एक ऐसे मोड़ पर दस्तक दी है जहां कूटनीति और सैन्य धमकियां साथ-साथ चल रही हैं। यूरोप में नाटो का विस्तार और यूक्रेन को उन्नत पश्चिमी हथियारों की आपूर्ति ने रूस को अपनी परमाणु नीति और रक्षा रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाने पर मजबूर किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लावरोव के ताजा बयानों का उद्देश्य यूरोपीय नेताओं के बीच फूट डालना और उन्हें यूक्रेन में सीधे हस्तक्षेप करने से रोकना है। साथ ही, चीन के साथ अपनी निकटता प्रदर्शित करके रूस यह संदेश देना चाहता है कि वह अंतरराष्ट्रीय अलगाव से पूरी तरह मुक्त है।
शांति या बड़ा संघर्ष?
मार-ए-लागो में ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात के बाद ट्रंप ने इसे ‘अत्यंत उत्पादक’ बताया और कहा कि दोनों पक्ष एक समझौते के बहुत करीब हैं। लेकिन लावरोव की “विनाशकारी प्रतिक्रिया” की चेतावनी यह स्पष्ट करती है कि रूस किसी भी ऐसे शांति समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करता हो या जिसमें यूरोपीय सेना की उपस्थिति हो।
आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वाशिंगटन मॉस्को और ब्रुसेल्स (यूरोपीय संघ) के बीच के इस गतिरोध को सुलझाने में सफल होता है, या फिर यूरोप एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा होगा।
