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सुजलॉन एनर्जी: क्यों ₹55 का स्तर है इस स्टॉक के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

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SamacharToday.co.in - सुजलॉन एनर्जी क्यों ₹55 का स्तर है इस स्टॉक के लिए 'करो या मरो' की स्थिति - Image Credited by Business Today

मुंबईसुजलॉन एनर्जी, जो कभी भारत की अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की “मल्टीबैगर” तेजी का निर्विवाद चेहरा हुआ करता था, आज एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। पांच वर्षों में जबरदस्त रिटर्न देने के बाद, यह विंड एनर्जी दिग्गज वर्तमान में मंदी (bear grip) की मार झेल रहा है, जिसके कारण पिछले कुछ महीनों में स्टॉक के बाजार मूल्य में भारी गिरावट आई है। जैसे-जैसे शेयर अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच रहा है, तकनीकी विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों ने ₹55 के स्तर को एक निर्णायक (make-or-break) स्तर माना है, जो यह तय करेगा कि स्टॉक वापसी करेगा या गिरावट के गहरे दौर में जाएगा।

मंगलवार के कारोबारी सत्र में, सुजलॉन एनर्जी के शेयर ₹46.33 पर सपाट (flat) कारोबार कर रहे थे। ₹63,531 करोड़ के मार्केट कैप के साथ, स्टॉक की वर्तमान चाल 2025 के मध्य में देखी गई तेजी के बिल्कुल विपरीत है।

तकनीकी दलदल: मंदी के जाल की पुष्टि

सुजलॉन एनर्जी का अल्पकालिक तकनीकी सेटअप काफी कमजोर नजर आ रहा है। पिछले छह महीनों में स्टॉक में 22.71% की गिरावट आई है और इस साल अब तक यह लगभग 12% नीचे है। तकनीकी व्यापारियों के लिए अधिक चिंता की बात यह है कि स्टॉक प्रमुख मनोवैज्ञानिक और गणितीय बेंचमार्क के ऊपर अपनी स्थिति बनाए रखने में विफल रहा है।

वर्तमान में, सुजलॉन अपने 5-दिन, 10-दिन, 20-दिन, 30-दिन, 50-दिन, 100-दिन, 150-दिन और 200-दिन के ‘सिंपल मूविंग एवरेज’ (SMA) से नीचे कारोबार कर रहा है। तकनीकी भाषा में, 200-दिवसीय SMA से नीचे ट्रेड करना दीर्घकालिक मंदी का स्पष्ट संकेत है, जो यह दर्शाता है कि संस्थागत और खुदरा निवेशकों के बीच “हर उछाल पर बिकवाली” (sell-on-rise) की रणनीति हावी है।

रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI), जो कीमतों के उतार-चढ़ाव की गति को मापता है, न्यूट्रल जोन में थोड़े समय रहने के बाद फिर से नीचे की ओर मुड़ गया है, जो मंदी के रुख की पुष्टि करता है।

₹55 का प्रतिरोध (Resistance) और ₹45 का समर्थन (Support)

शेयरधारकों के लिए, रिकवरी की राह में ₹55 पर एक बड़ी बाधा खड़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर पिछले सपोर्ट (जो अब रेजिस्टेंस बन गया है) और प्रमुख ‘फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट’ स्तरों का संगम है।

बोनान्ज़ा पोर्टफोलियो के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट कुणाल कांबले वर्तमान मूल्य स्तरों की गंभीरता पर जोर देते हैं। कांबले ने कहा, “सुजलॉन वर्तमान में ₹46-45 के मजबूत सपोर्ट जोन के पास कारोबार कर रहा है। ₹74 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर से गिरने के बाद स्टॉक ने अपने पिछले लाभ का लगभग 40% हिस्सा गँवा दिया है।”

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि गिरावट का जोखिम अभी भी अधिक है। “₹45 से नीचे जाने पर स्टॉक ₹42 और फिर ₹38 तक गिर सकता है। जब तक स्टॉक ₹55 के नीचे है, मंदी का रुझान बना रह सकता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, नई खरीदारी (positions) से बचना ही बेहतर है।”

मौलिक मजबूती बनाम तकनीकी कमजोरी

हालांकि चार्ट एक निराशाजनक तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन सुजलॉन की मौलिक कहानी (fundamental story) लचीलेपन और विकास की बात करती है। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में अपने बैलेंस शीट को काफी हद तक कर्ज मुक्त (deleveraged) करने में सफलता हासिल की है।

दिसंबर 2025 तक, सुजलॉन की ऑर्डर बुक बढ़कर 6.2 गीगावाट (GW) हो गई है, जो पिछले वित्त वर्ष के अंत में 5.6 GW थी। यह वृद्धि 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के भारत के आक्रामक लक्ष्य से प्रेरित है।

स्वतंत्र इक्विटी रणनीतिकार राहुल शर्मा का कहना है, “सुजलॉन के शेयर की कीमत और उसके व्यावसायिक प्रदर्शन के बीच का अंतर स्पष्ट है। जहां बाजार स्टॉक को उसकी पिछली अत्यधिक तेजी और उच्च वैल्यूएशन के लिए दंडित कर रहा है, वहीं विंड सेगमेंट में कंपनी का जमीनी प्रदर्शन कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर है। हालांकि, अल्पावधि में तकनीकी कारक हमेशा मौलिक कारकों पर हावी रहते हैं।”

मल्टीबैगर विरासत

वर्तमान चिंता को समझने के लिए सुजलॉन की ऐतिहासिक तेजी को देखना होगा। यह स्टॉक एक असाधारण वेल्थ क्रिएटर रहा है, जिसने तीन वर्षों में 421% और पांच वर्षों की अवधि में 865% का रिटर्न दिया है। इस तेजी के पीछे सफल QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट), पुराने कर्जों का निपटान और विंड-सोलर हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स के लिए अनुकूल सरकारी नीतियां थीं।

हालांकि, 30 मई 2025 को ₹74.30 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद, स्टॉक में गिरावट और ठहराव का दौर शुरू हुआ, जिसने ऊंचे स्तरों पर निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ली है।

ग्रीन एनर्जी का भविष्य

सुजलॉन एनर्जी एक ‘वर्टिकली इंटीग्रेटेड‘ अक्षय ऊर्जा कंपनी बनी हुई है। विंड टर्बाइन निर्माण के अलावा, यह जमीन अधिग्रहण से लेकर परिसंपत्ति प्रबंधन तक संपूर्ण सौर ऊर्जा समाधान भी प्रदान करती है। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर ESG निवेश बढ़ रहा है, सुजलॉन “ग्रीन कैपिटल” के प्रवाह का प्राथमिक लाभार्थी बना रहेगा, बशर्ते यह अपने स्टॉक की कीमत को स्थिर कर सके।

फिलहाल, बाजार का संदेश स्पष्ट है: ₹45 के सपोर्ट स्तर पर अपनी सांसें थामकर नजर रखें। यदि यह स्तर बना रहता है, तो ₹55 की ओर धीमी वापसी शुरू हो सकती है। यदि यह टूटता है, तो इस मल्टीबैगर के लिए “सर्दियों का मौसम” और लंबा खिंच सकता है।

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। समाचार टुडे में अनूप कुमार की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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