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रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स — सस्पेंस और अभिनय का शानदार संगम

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SamacharToday.co.in - रात अकेली है द बंसल मर्डर्स — सस्पेंस और अभिनय का शानदार संगम - Image Credited by The Daily Jagran

साल 2020 में आई नेटफ्लिक्स की चर्चित फिल्म ‘रात अकेली है’ के बाद, निर्देशक हनी त्रेहन एक बार फिर दर्शकों को अपराध और रहस्य की एक अंधेरी दुनिया में वापस ले गए हैं। 19 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई फिल्म ‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’ (Raat Akeli Hai: The Bansal Murders) ने अपनी रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया और समीक्षकों के बीच धूम मचा दी है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और राधिका आप्टे अभिनीत यह फिल्म न केवल एक साधारण ‘मर्डर मिस्ट्री’ है, बल्कि यह सत्ता, लालच और गहरे पारिवारिक रहस्यों की एक जटिल परतों वाली कहानी है।

कहानी की पृष्ठभूमि: रसूखदार परिवार और सामूहिक हत्याकांड

फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के कानपुर-लखनऊ बेल्ट के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ एक प्रभावशाली मीडिया मुगल महेंद्र बंसल के परिवार के छह सदस्यों की उनके आलीशान बंगले में बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गुत्थी सुलझाने का जिम्मा एक बार फिर इंस्पेक्टर जटिल यादव (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) को सौंपा जाता है।

जहाँ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और रसूखदार लोग इस मामले को जल्द से जल्द रफा-दफा करना चाहते हैं, वहीं जटिल यादव की ईमानदार अंतरात्मा उन्हें सच की गहराई तक जाने के लिए प्रेरित करती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, परिवार के भीतर छिपे हुए विश्वासघात, अवैध भूमि सौदों और एक रहस्यमयी आध्यात्मिक गुरु (दीप्ति नवल) के प्रभाव जैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं।

सोशल मीडिया पर शुरुआती प्रतिक्रियाएं

रिलीज के कुछ ही घंटों बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म ट्रेंड करने लगी। अधिकांश दर्शकों ने इसे 4/5 की रेटिंग दी है। एक यूजर ने फिल्म की प्रशंसा करते हुए लिखा, “यह इस साल की सबसे बेहतरीन थ्रिलर है! नवाजुद्दीन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह जटिल किरदारों के राजा क्यों हैं।” वहीं अन्य दर्शकों ने फिल्म के संवादों की भी सराहना की, विशेष रूप से वह सीन जहाँ जटिल यादव भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं, “आप लोगों को अपना काम सही ना करने पर नींद आती है, मेरे को नहीं।”

अभिनय और निर्देशन की चमक

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इंस्पेक्टर जटिल यादव के किरदार में एक बार फिर अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। उनका अभिनय संतुलित और गहराई से भरा है। इस बार फिल्म में रेवती ने एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. पणिक्कर के रूप में नई ऊर्जा भरी है, जिनके साथ जटिल यादव की नोक-झोंक फिल्म को दिलचस्प बनाती है।

चित्रांगदा सिंह ने मीरा बंसल के रूप में एक रहस्यमयी और प्रभावशाली भूमिका निभाई है। राधिका आप्टे, हालांकि कैमियो जैसी भूमिका में हैं, लेकिन जटिल यादव के भावनात्मक पक्ष को उभारने में उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण रही है। निर्देशक हनी त्रेहन के बारे में बात करते हुए नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने एक साक्षात्कार में कहा:

“हनी की फिल्मों की खासियत यह है कि उनके किरदार और दुनिया हमारे आसपास की असल जिंदगी से जुड़ी होती है। जब आप ऐसे अनुभवी निर्देशकों के साथ काम करते हैं, तो उनका नजरिया यथार्थ के बहुत करीब होता है, जो एक अभिनेता के लिए काफी संतोषजनक होता है।”

फिल्म का सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ

फिल्म केवल हत्या की गुत्थी नहीं सुलझाती, बल्कि समाज के ‘चौथे स्तंभ’ (मीडिया) के भीतर की सड़न, जातिगत विशेषाधिकार और व्यवस्था की क्रूरता पर भी कड़ा प्रहार करती है। लेखक स्मिता सिंह की पटकथा में ‘बुलडोजर’ और ‘अवैध बस्तियों’ जैसे समकालीन प्रतीकों का उपयोग कर फिल्म को वर्तमान राजनीतिक माहौल से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

हालांकि कुछ समीक्षकों ने फिल्म की धीमी गति (स्लो-बर्न) और क्लाइमेक्स को थोड़ा कमजोर बताया है, लेकिन फिल्म का निर्माण स्तर और बैकग्राउंड म्यूजिक इसे एक ‘मस्ट-वॉच’ थ्रिलर बनाता है।

निष्कर्ष: क्या यह पहले भाग से बेहतर है?

जहाँ ‘रात अकेली है’ (2020) एक बंद कमरे की मर्डर मिस्ट्री थी, वहीं ‘द बंसल मर्डर्स’ कैनवास को बड़ा करती है। यह केवल ‘किसने किया’ (Whodunnit) के बजाय ‘क्यों किया’ (Whydunit) पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है। अगर आप डार्क, गंभीर और विचारोत्तेजक सिनेमा के शौकीन हैं, तो नेटफ्लिक्स पर यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित होगी।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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