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अमेरिका ने खत्म किया एच-1बी लॉटरी सिस्टम; आईटी शेयर गिरे
वाशिंगटन से आए एक बड़े नीतिगत बदलाव के बाद मंगलवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। 24 दिसंबर को सुबह के कारोबार के दौरान कोफोर्ज (Coforge), टेक महिंद्रा और विप्रो जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वर्क वीजा के लिए लंबे समय से चली आ रही ‘रैंडम लॉटरी’ प्रणाली को समाप्त करने की घोषणा के बाद आई है।
अमेरिकी होमलैंड सुरक्षा विभाग (DHS) ने पुष्टि की है कि वह लॉटरी के स्थान पर एक ‘भारित चयन प्रक्रिया’ (Weighted Selection Process) लागू कर रहा है। यह नया ढांचा उन विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता देता है जिन्हें उच्च वेतन और उन्नत कौशल वाले पदों की पेशकश की गई है, जिससे वीजा आवंटन में “भाग्य-आधारित” युग का प्रभावी रूप से अंत हो गया है।
बाजार की प्रतिक्रिया और शेयरों का प्रदर्शन
देश के प्रमुख तकनीकी निर्यातकों के प्रदर्शन पर नजर रखने वाला निफ्टी आईटी इंडेक्स सुबह के सत्र में 0.3% गिरकर 39,050 पर कारोबार कर रहा था। बिकवाली का दबाव मिड-कैप और लार्ज-कैप कंपनियों में सबसे ज्यादा स्पष्ट था। कोफोर्ज और टेक महिंद्रा ने लगभग 1% की गिरावट के साथ नुकसान का नेतृत्व किया, जबकि विप्रो भी पीछे नहीं रही। परसिस्टेंट सिस्टम्स और इंफोसिस के मूल्यांकन में भी लगभग 0.5% की कमी आई।
आईटी क्षेत्र के लिए गिरावट का यह लगातार दूसरा सत्र है। बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि यह गिरावट परिचालन लागत में संभावित वृद्धि और योग्यता-आधारित वीजा व्यवस्था के अनुकूल होने के लिए आवश्यक संरचनात्मक परिवर्तनों को लेकर निवेशकों की चिंता को दर्शाती है।
लॉटरी से योग्यता की ओर बदलाव
दशकों से, एच-1बी वीजा—जो एक गैर-प्रवासी वीजा है और अमेरिकी कंपनियों को विशिष्ट व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है—एक कंप्यूटर जनित लॉटरी के माध्यम से वितरित किया जाता था। 27 फरवरी, 2026 से प्रभावी होने वाले नए नियम के तहत, DHS वेतन स्तरों के आधार पर पंजीकरणों को रैंक करेगा।
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों के वेतन की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि 85,000 वीजा (सामान्य आवेदकों के लिए 65,000 और उन्नत डिग्री धारकों के लिए 20,000) की सीमित सीमा को सबसे उच्च कुशल व्यक्ति ही भरें। इसके अलावा, प्रशासन के “राष्ट्रपति उद्घोषणा” (Presidential Proclamation) में एक कड़ी शर्त जोड़ी गई है: नियोक्ताओं को पात्रता की शर्त के रूप में प्रति वीजा अतिरिक्त $100,000 का भुगतान करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का नजरिया और वित्तीय प्रभाव
हालांकि शुरुआती आंकड़ों ने बाजार में घबराहट पैदा की, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी दिग्गजों पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव सीमित हो सकता है।
मुंबई की एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक आशीष गुप्ता कहते हैं, “भारतीय आईटी क्षेत्र ने पिछले दशक में बड़े संरचनात्मक बदलाव किए हैं। कंपनियों ने अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्ती करके और भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को बढ़ाकर एच-1बी वीजा पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है। हालांकि $100,000 का शुल्क बहुत अधिक लगता है, लेकिन यह मुख्य रूप से नए आवेदनों को लक्षित करता है, जिससे मौजूदा कार्यबल को सुरक्षा मिलती है।”
ग्लोबल ब्रोकरेज सीएलएसए (CLSA) ने उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए आय पर सबसे बुरा प्रभाव लगभग 6% हो सकता है। वहीं नोमुरा (Nomura) ने मार्जिन पर 10 से 100 बेसिस पॉइंट्स के मामूली प्रभाव का अनुमान लगाया है।
घरेलू फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने रेखांकित किया कि इस आदेश को अमेरिकी अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने नोट किया कि चूंकि भारतीय वेंडर्स पहले से ही “ऑफशोर” मॉडल की ओर बढ़ चुके हैं, इसलिए एच-1बी वीजा की अनिवार्यता पहले की तुलना में कम हो गई है।
