Connect with us

International Relations

बढ़ते तनाव के बीच बांग्लादेश के साथ संबंधों पर भारत का रुख

Published

on

SamacharToday.co.in - बढ़ते तनाव के बीच बांग्लादेश के साथ संबंधों पर भारत का रुख - Image Credited by NewsPoint

सीमा पार बढ़ती अस्थिरता के बीच, भारत ने बांग्लादेश के साथ अपनी दीर्घकालिक मित्रता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन साथ ही अपने राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख भी अपनाया है। ढाका में हालिया राजनीतिक परिवर्तन और भारत विरोधी बयानबाजी में वृद्धि के बाद, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

सत्ता नहीं, लोगों पर आधारित संबंध

गुवाहाटी में एक हालिया चर्चा के दौरान, पूर्व राजनयिक जयदीप मजूमदार ने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश के प्रति भारत का दृष्टिकोण हमेशा ‘रणनीतिक धैर्य’ और ‘जन-जन के जुड़ाव’ पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा क्षेत्र और मानव विकास में भारत का निवेश एक ऐसी दोस्ती का प्रमाण है जो किसी विशेष राजनीतिक शासन से परे है।

मजूमदार ने टिप्पणी की, “हमारे विकास संबंधी संबंध किसी एक प्रशासन से बहुत आगे तक फैले हुए हैं, जिसे अक्सर भारत विरोधी विमर्श को बढ़ावा देने वालों द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है।” उन्होंने संकेत दिया कि कुछ गुट बांग्लादेशी युवाओं के मन में शत्रुता पैदा करके उन्हें भारत से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके क्षेत्र के लिए गंभीर सामाजिक-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

कट्टरपंथ का साया और राजनयिक सुरक्षा

बांग्लादेश के वर्तमान हालात ने नई दिल्ली में गहरी चिंता पैदा कर दी है। पिछली सरकार के पतन के बाद से, कट्टरपंथी समूहों ने अभूतपूर्व प्रभाव हासिल किया है। यह बदलाव भारतीय राजनयिक मिशनों को निशाना बनाने के कई प्रयासों के रूप में सामने आया है, विशेष रूप से युवा नेता उस्मान हादी की मृत्यु के बाद हुई हिंसा के दौरान।

कुछ चरमपंथी हलकों में बयानबाजी इस हद तक बढ़ गई है कि कुछ नेताओं ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विलय तक की मांग कर दी है। हालांकि नई दिल्ली ने इन उकसावे वाली बातों को काफी हद तक नजरअंदाज किया है, लेकिन अपने राजनयिकों की सुरक्षा एक गैर-परक्राम्य (non-negotiable) प्राथमिकता बनी हुई है। मजूमदार ने चेतावनी दी कि यदि राजनयिक मिशनों पर हमले जारी रहते हैं, तो इसके “गंभीर परिणाम” होंगे जो दशकों की आर्थिक प्रगति को रोक सकते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1971 से वर्तमान तक

वर्तमान तनाव को समझने के लिए संबंधों की नींव को देखना आवश्यक है। 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और तब से दोनों देशों ने एक जटिल लेकिन बड़े पैमाने पर सहयोगात्मक इतिहास साझा किया है। पिछले दशक में, संबंधों के “सोनाली अध्याय” (स्वर्ण अध्याय) के तहत भूमि और समुद्री सीमा विवादों को सुलझाया गया और मैत्री पाइपलाइन और सीमा पार रेल लिंक जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में भारी वृद्धि देखी गई।

हालांकि, बांग्लादेश में आंतरिक राजनीतिक बदलाव अक्सर घरेलू बहस में “भारत कारक” को सामने लाते हैं। पूर्व शासन के आलोचक अक्सर नई दिल्ली को राज्य के बजाय एक विशिष्ट राजनीतिक दल के समर्थक के रूप में चित्रित करते रहे हैं—एक ऐसा दावा जिसे भारतीय अधिकारियों ने हमेशा सिरे से नकारा है।

आंतरिक संप्रभुता पर भारत का रुख

भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सामने आने वाली आंतरिक कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों के संबंध में कड़ा तटस्थ रुख अपनाया है। नई दिल्ली इन्हें बांग्लादेश के आंतरिक न्यायिक मामले मानता है। भारत का प्राथमिक हित व्यवस्था की बहाली और वैध, समावेशी चुनाव सुनिश्चित करने में है।

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पड़ोसी अध्ययन की प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. श्रीराधा दत्ता इस बदलाव पर संतुलित विचार रखती हैं। उन्होंने कहा, “भारत वर्तमान में ‘रुको और देखो’ की स्थिति में है। हालांकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और चरमपंथी तत्वों के उदय को लेकर बेचैनी है, लेकिन नई दिल्ली का उद्देश्य ढाका में जनादेश रखने वाले किसी भी पक्ष के साथ कार्यात्मक संबंध बनाए रखना है। चुनौती यह सुनिश्चित करने में है कि राजनीतिक उथल-पुथल से पैदा हुए शून्य को ऐसी ताकतों द्वारा न भरा जाए जो भारतीय सुरक्षा हितों के प्रतिकूल हों।”

पूर्वोत्तर के लिए सुरक्षा निहितार्थ

भारत के पूर्वोत्तर की सुरक्षा बांग्लादेश की स्थिरता से अटूट रूप से जुड़ी हुई है। वर्षों तक, ढाका का सहयोग सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय विद्रोही समूहों को खत्म करने में सहायक रहा है। सुरक्षा सहयोग में किसी भी प्रकार की कमी या प्रतिकूल शासन का उदय सीमा पार आतंकवाद और अवैध प्रवासन की चिंताओं को फिर से बढ़ा सकता है।

जैसे-जैसे नई दिल्ली स्थिति की निगरानी कर रही है, संदेश स्पष्ट है: भारत आपसी विकास की दिशा में ढाका में एक वैध सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है, बशर्ते कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आपसी सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों का सम्मान किया जाए।

देवाशीष एक समर्पित लेखक और पत्रकार हैं, जो समसामयिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से सीधा जुड़ाव बनाने वाली है। देवाशीष का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच फैलाने की जिम्मेदारी भी निभाती है। वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न केवल जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों को विचार और समाधान की दिशा में प्रेरित भी करते हैं। समाचार टुडे में देवाशीष की भूमिका: स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, पठन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक विमर्श।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2017-2025 SamacharToday.