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International Relations

तारिक रहमान की वापसी: बांग्लादेश की राजनीति में नए समीकरण

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SamacharToday.co.in - तारिक रहमान की वापसी बांग्लादेश की राजनीति में नए समीकरण - Image Credited by India Blooms

25 दिसंबर, 2025 को बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया, जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के आत्म-निर्वासन के बाद लंदन से ढाका लौटे। ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके उतरते ही समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। रहमान की इस वापसी ने न केवल बीएनपी में नई जान फूंक दी है, बल्कि जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी समूहों के समीकरणों को भी बिगाड़ दिया है।

अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश एक अस्थिर दौर से गुजर रहा है। अब 12 फरवरी, 2026 को होने वाले आम चुनावों की घोषणा के साथ, तारिक रहमान की मौजूदगी ने बीएनपी को देश की सबसे बड़ी चुनावी ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है।

जमात की बेचैनी और धमकियां

रहमान की वापसी के कुछ ही घंटों बाद जमात-ए-इस्लामी से जुड़े एक वकील, बैरिस्टर शहरयार कबीर ने एक विवादित बयान दिया। उन्होंने रहमान पर “भारत की शर्तें मानने” और अपने माता-पिता—दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया—की विरासत से गद्दारी करने का आरोप लगाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जमात की यह तीखी प्रतिक्रिया उसकी बढ़ती घबराहट का संकेत है। रहमान की अनुपस्थिति में जमात ने छात्र आंदोलनों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की थी, लेकिन रहमान के “राष्ट्रीय एकता” और “समय पर चुनाव” के आह्वान ने जमात की रणनीति को फेल कर दिया है।

“न दिल्ली, न पिंडी”: संप्रभुता का नारा

ढाका की एक विशाल रैली में रहमान ने एक नारा दिया जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया: “न दिल्ली, न पिंडी—सबसे पहले बांग्लादेश।” इस नारे के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी विदेश नीति किसी दूसरे देश के दबाव में नहीं होगी।

भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पारंपरिक रूप से भारत के संबंध बीएनपी के साथ ठंडे रहे हैं, लेकिन अब जबकि अवामी लीग चुनावों से बाहर है और रहमान कट्टरपंथ के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं, नई दिल्ली और बीएनपी के बीच संबंधों में सुधार की संभावना देखी जा रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा, “भारत बांग्लादेश में शांति और स्थिरता का पक्षधर है और हम वहां स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव चाहते हैं।”

अशांति और हत्याओं का साया

बांग्लादेश में चुनावी माहौल अभी भी तनावपूर्ण है। हाल ही में युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने पूरे देश में विरोध की लहर पैदा कर दी है। हादी के परिवार का आरोप है कि यह हत्या चुनावों को टालने के लिए एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। रहमान ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील की है। उन्होंने अपने संबोधन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जिक्र करते हुए कहा, “मेरे पास एक योजना है,” जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों सहित सभी नागरिकों के लिए एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना है।

निर्वासन से सत्ता की दहलीज तक

तारिक रहमान 2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद लंदन चले गए थे। शेख हसीना के शासनकाल के दौरान उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई थी, लेकिन हाल ही में कई मामलों में बरी होने और हसीना सरकार के गिरने के बाद उनके लौटने का रास्ता साफ हुआ।

आज जबकि उनकी मां खालिदा जिया गंभीर रूप से बीमार हैं, 60 वर्षीय तारिक रहमान बीएनपी का एकमात्र चेहरा बन चुके हैं। हालिया ओपिनियन पोल्स के अनुसार, बीएनपी 2026 के चुनावों में सबसे आगे है और करीब 47% लोग रहमान को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं। 12 फरवरी के चुनाव यह तय करेंगे कि क्या रहमान इस लहर को बहुमत में बदल पाते हैं।

देवाशीष एक समर्पित लेखक और पत्रकार हैं, जो समसामयिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से सीधा जुड़ाव बनाने वाली है। देवाशीष का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच फैलाने की जिम्मेदारी भी निभाती है। वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न केवल जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों को विचार और समाधान की दिशा में प्रेरित भी करते हैं। समाचार टुडे में देवाशीष की भूमिका: स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, पठन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक विमर्श।

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