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बांग्लादेश के पिरोजपुर में हिंदू घर फूंका: हिंसा से दहशत

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SamacharToday.co.in - बांग्लादेश के पिरोजपुर में हिंदू घर फूंका हिंसा से दहशत - Image Credited by MoneyControl

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा के बीच, 27 दिसंबर 2025 की तड़के दक्षिणी बांग्लादेश के पिरोजपुर सदर उपजिला के पश्चिम दुमरीतला गांव में एक हिंदू परिवार के घर को आग के हवाले कर दिया गया। इस हमले ने देश में अल्पसंख्यकों के बीच व्याप्त असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।

दुमरीतला गांव में रहने वाले साहा परिवार के पांच कमरों को उपद्रवियों ने उस समय आग लगा दी जब पूरा परिवार सो रहा था। इस आगजनी में पलाश कांति साहा, शिब साहा, दीपक साहा, श्यामलेंदु साहा और अशोक साहा का घर पूरी तरह राख हो गया। पीड़ित परिवारों के अनुसार, आग में उनके कपड़े, फर्नीचर, नकद राशि के साथ-साथ जमीन के दस्तावेज और शैक्षिक प्रमाणपत्र भी जलकर खाक हो गए।

हिंसा का बढ़ता सिलसिला

पिरोजपुर की यह घटना हाल के दिनों में बांग्लादेश में भड़की हिंसा की एक कड़ी है। 12 दिसंबर को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी पर हुए हमले और 18 दिसंबर को सिंगापुर में उनकी मृत्यु के बाद देश भर में दंगे भड़क उठे। हादी की मौत के बाद कट्टरपंथी समूहों ने कई स्थानों पर तोड़फोड़ की।

इससे पहले 18 दिसंबर को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक की ‘ईशनिंदा’ के झूठे आरोपों में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को जला दिया गया। इसके कुछ ही दिनों बाद राजबारी में अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई।

सरकार पर उठते सवाल

नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर इन हमलों को रोकने में विफल रहने के आरोप लग रहे हैं। प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए लिखा, “पिरोजपुर के दुमरीतला गांव में साहा परिवार के पांच कमरों को हिंदू विरोधी जिहादियों ने जला दिया। वे हिंदुओं को जिंदा जलाना चाहते हैं… क्या यूनुस सिर्फ बांसुरी बजा रहे हैं?”

कूटनीतिक दबाव और सुरक्षा की मांग

इन घटनाओं के कारण भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव भी बढ़ गया है। भारत ने एक ही सप्ताह में दो बार बांग्लादेशी उच्चायुक्त को तलब कर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा की 2,400 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं।

“विश्वास के मतभेद या अफवाहें कभी भी हिंसा का बहाना नहीं बन सकतीं। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है,” अंतरिम सरकार के कार्यालय ने एक बयान में कहा।

अनिश्चित भविष्य

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की जनसंख्या में लगातार गिरावट आ रही है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, यह 2011 में 13.5% थी जो अब घटकर लगभग 8% रह गई है। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। पिरोजपुर की आगजनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना कड़ी कानूनी कार्रवाई के, अल्पसंख्यकों का भविष्य अंधकारमय बना रहेगा।

सब्यसाची एक अनुभवी और विचारशील संपादक हैं, जो समाचारों और समसामयिक विषयों को गहराई से समझने के लिए जाने जाते हैं। उनकी संपादकीय दृष्टि सटीकता, निष्पक्षता और सार्थक संवाद पर केंद्रित है। सब्यसाची का मानना है कि संपादन केवल भाषा सुधारने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विचारों को सही दिशा देने की कला है। वे प्रत्येक लेख और रिपोर्ट को इस तरह से गढ़ते हैं कि पाठकों तक न केवल सूचना पहुँचे, बल्कि उसका सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखे। उन्होंने विभिन्न विषयों—राजनीति, समाज, संस्कृति, शिक्षा और पर्यावरण—पर संतुलित संपादकीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके संपादन के माध्यम से समाचार टुडे में सामग्री और भी प्रासंगिक, विश्वसनीय और प्रभावशाली बनती है। समाचार टुडे में सब्यसाची की भूमिका: संपादकीय सामग्री का चयन और परिष्करण समाचारों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना लेखकों को मार्गदर्शन और संपादकीय दिशा प्रदान करना रुचियाँ: लेखन, साहित्य, समसामयिक अध्ययन, और विचार विमर्श।

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