Geo-politics
खालिदा ज़िया के बाद तारिक रहमान: क्या बनेंगे बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री?
बांग्लादेश की राजनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन हुआ है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष बेगम खालिदा ज़िया का 30 दिसंबर 2025 की सुबह 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश के राजनीतिक क्षितिज पर उनके बेटे और उत्तराधिकारी तारिक रहमान का उदय हुआ है, जो 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद हाल ही में स्वदेश लौटे हैं।
12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों के लिए तारिक रहमान ने बोगरा-6 और ढाका-17 सीटों से अपनी उम्मीदवारी दाखिल कर दी है। अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के कारण, तारिक को अब प्रधानमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
विरासत और वापसी का संघर्ष
खालिदा ज़िया का निधन उस समय हुआ है जब देश एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने उन्हें “राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत” बताया है। वहीं, तारिक रहमान ने ढाका लौटते ही अपनी जन्मभूमि को चूमकर अपनी राजनीतिक मंशा साफ कर दी है।
दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के अनुसार, “बीएनपी, जिसे हसीना युग के अंत में खत्म मान लिया गया था, अब सत्ता में लौटने के लिए तैयार है। तारिक रहमान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या वह प्रतिशोध की राजनीति को छोड़कर एक खंडित राष्ट्र को एकजुट कर पाएंगे।”
प्रमुख चुनौतियां और चुनावी परिदृश्य
तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पुरानी छवि को सुधारने और युवाओं को यह विश्वास दिलाने की है कि वह एक आधुनिक और पारदर्शी शासन प्रदान कर सकते हैं।
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छात्र आंदोलनों का उदय: जुलाई 2024 की क्रांति से निकली ‘नेशनल सिटीजन पार्टी’ (NCP) और ‘जमात-ए-इस्लामी’ का गठबंधन भी एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
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आर्थिक सुधार: बीएनपी ने अपने चुनावी वादों में 1 करोड़ नई नौकरियां देने का वादा किया है, जो बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा आकर्षण है।
निष्कर्ष
क्या तारिक रहमान अपनी माँ की विरासत को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा पाएंगे? 17 साल के निर्वासन ने उन्हें कितना बदला है, इसका असली इम्तिहान फरवरी 2026 के चुनावों में होगा। फिलहाल, ढाका की सड़कों पर बीएनपी समर्थकों का उत्साह यह संकेत दे रहा है कि “राजकुमार” की ताजपोशी का समय करीब आ सकता है।
