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कुकिंग के सपनों से लेकर स्टारडम तक: ईशा गुप्ता का प्रेरणादायक सफर
बॉलीवुड की कहानियों में अक्सर केवल चमक-धमक दिखाई जाती है, लेकिन उस चकाचौंध के पीछे वर्षों का संघर्ष और अटूट संकल्प छिपा होता है। ईशा गुप्ता का सफर भी कुछ ऐसा ही है। दिल्ली की एक साधारण लड़की, जिसने न तो हार मानी और न ही किसी सिफारिश का इंतजार किया, आज भारतीय सिनेमा का एक जाना-माना नाम है।
बावर्ची बनने के सपने और शुरुआती संघर्ष
फिल्मी दुनिया में कदम रखने से बहुत पहले, ईशा गुप्ता ने अपने लिए एक अलग ही भविष्य सोचा था। वह एक पेशेवर शेफ (बावर्ची) बनना चाहती थीं। हालांकि, उनकी शाकाहारी जीवनशैली और इस पेशे की मांगों के बीच तालमेल नहीं बैठ पाया। इसके बाद उनका झुकाव मॉडलिंग की ओर हुआ और फिर अभिनय की ओर। इंडस्ट्री में कोई पहचान न होने के कारण, उन्हें शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कई बार खुले तौर पर स्वीकार किया है कि उन्हें दूसरों के मुकाबले दोगुनी मेहनत करनी पड़ी क्योंकि उनके पास कोई ‘गॉडफादर’ नहीं था।
रूढ़िवादी सुंदरता के पैमानों को दी चुनौती
मुंबई में अपने शुरुआती दिनों में, ईशा को कास्टिंग निर्देशकों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्हें उनके रंग और बॉडी टाइप के लिए काफी कुछ सुनाया गया। उस समय की फिल्म इंडस्ट्री में “सांवले रंग” को पारंपरिक नायिका के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था। कई लोगों ने उन्हें अपना रंग गोरा करने की सलाह दी, लेकिन ईशा ने अपनी स्वाभाविकता से समझौता नहीं किया।
‘जन्नत 2’ और सफलता का आगाज़
ईशा की किस्मत तब बदली जब मुकेश भट्ट ने उन्हें ‘जन्नत 2’ के लिए चुना। 2012 में इमरान हाशमी के साथ उनकी यह फिल्म न केवल हिट रही, बल्कि ईशा को इसके लिए फिल्मफेयर का बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड भी मिला। इस फिल्म ने उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया जिन्होंने कभी उन्हें नकारा था। ईशा आज भी मुकेश भट्ट का आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने उनके टैलेंट पर उस वक्त भरोसा किया जब कोई और तैयार नहीं था।
करियर और निजी जीवन का नया मोड़
‘जन्नत 2’ के बाद ईशा ‘राज 3D’, ‘रुस्तम’, ‘टोटल धमाल’ और ‘हमशकल्स’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। उन्होंने न केवल ग्लैमरस भूमिकाएं निभाईं, बल्कि अपनी अभिनय क्षमता का लोहा भी मनवाया। 2026 तक, ईशा ने न केवल अपना करियर संवारा है, बल्कि उनके निजी जीवन में भी स्थिरता आई है। वह स्पेनिश व्यवसायी मैनुअल कैंपोस गुआर (Manuel Campos Guallar) के साथ रिश्ते में हैं, जो माबेल कैपिटल (Mabel Capital) के सह-संस्थापक हैं।
अनुभवी फिल्म निर्माता रमेश तौरानी ने एक बार कहा था:
“बॉलीवुड में एक बाहरी व्यक्ति के रूप में टिके रहने के लिए अपार धैर्य की आवश्यकता होती है। ईशा गुप्ता उस पीढ़ी की अभिनेत्रियों का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्होंने अवसरों का इंतजार नहीं किया, बल्कि अपनी मेहनत से उन्हें हासिल किया।”
आज ईशा गुप्ता जल्द ही ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म में नजर आने वाली हैं। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि आप खुद पर विश्वास रखते हैं, तो दुनिया की कोई भी आलोचना आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
