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सरहद पार बॉलीवुड का जादू: वेनेजुएला संकट के बीच पाकिस्तानी डांस वायरल

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SmacharToday.co.in - सरहद पार बॉलीवुड का जादू वेनेजुएला संकट के बीच पाकिस्तानी डांस वायरल - Image Credited by Hindustan Times

भले ही भू-राजनीतिक सीमाएँ और आधिकारिक सेंसरशिप सिनेमा के प्रवाह को रोकने की कोशिश करें, लेकिन बॉलीवुड का सांस्कृतिक आकर्षण एक अजेय शक्ति बना हुआ है। इस सॉफ्ट-पावर (soft-power) घटना का ताज़ा उदाहरण जासूसी थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ है, जिसने न केवल भारतीय बॉक्स ऑफिस पर राज किया है, बल्कि अब सरहद पार पाकिस्तान में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

हाल ही में इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दो पाकिस्तानी महिलाओं को पाकिस्तान में एक शादी समारोह के दौरान फिल्म के गाने ‘शरारत’ पर शानदार डांस करते हुए देखा जा सकता है। मेहमानों की तालियों और उत्साह के बीच, इन महिलाओं ने गाने के मुख्य स्टेप्स को इतनी खूबसूरती से निभाया कि यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया। यह गाना मूल रूप से आयशा खान और क्रिस्टल डिसूजा पर फिल्माया गया है।

प्रतिबंध और लोकप्रियता का विरोधाभास

आदित्य धर द्वारा निर्देशित और रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म ‘धुरंधर’ को अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ा है। फिल्म में पाकिस्तान और विशेष रूप से कराची के लयारी जिले के चित्रण को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इसी वजह से पाकिस्तान सहित बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों के अधिकारियों ने फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया।

हालांकि, ऐसा लगता है कि इस प्रतिबंध ने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘धुरंधर’ पाकिस्तान में सबसे अधिक पायरेटेड भारतीय फिल्मों में से एक बन गई है। अनुमान है कि रिलीज के कुछ ही हफ्तों के भीतर वहां 20 लाख से अधिक बार फिल्म को अवैध रूप से डाउनलोड किया गया। सोशल मीडिया पर ‘शरारत’ गाने के क्रेज ने यह साबित कर दिया है कि कला पर सेंसरशिप की दीवारें टिक नहीं पातीं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने टिप्पणी की, “प्रतिबंध के बावजूद फिल्म के लिए इतना क्रेज! बॉलीवुड का सांस्कृतिक प्रभाव पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर है जिसे कोई भी नियम पूरी तरह से नहीं मिटा सकता।”

‘शरारत’: सरहदों को लांघता गाना

शाश्वत सचदेव द्वारा रचित और मधुबंती बागची व जैस्मीन सैंडलास द्वारा गाया गया गाना ‘शरारत’ फिल्म की सफलता की जान बन गया है। विजय गांगुली द्वारा कोरियोग्राफ किए गए इस गाने के म्यूजिक वीडियो ने यूट्यूब पर 100 मिलियन से अधिक व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया है।

गाने की कोरियोग्राफी इतनी आकर्षक है कि यह दिल्ली से लेकर ढाका और अब कराची तक शादियों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बन गई है। विजय गांगुली ने इस गाने की लोकप्रियता पर कहा:

“‘धुरंधर’ में संगीत कहानी के महत्वपूर्ण क्षणों से जुड़ा हुआ है। हम चाहते थे कि ‘शरारत’ फिल्म की दुनिया के भीतर एक वास्तविक उत्सव जैसा महसूस हो। इसे एक ग्लोबल एंथम बनते देखना, खासकर उन जगहों पर जहाँ फिल्म कानूनी रूप से उपलब्ध नहीं है, लय और नृत्य की सार्वभौमिक भाषा का प्रमाण है।”

ऐतिहासिक संदर्भ: बॉलीवुड और पाकिस्तान का रिश्ता

पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह रिश्ता काफी जटिल हो गया है। 2008 और 2019 के बीच, भारतीय फिल्मों को पाकिस्तानी सिनेमाघरों में कानूनी रूप से प्रदर्शित करने की अनुमति थी, जिससे वहां के थिएटर मालिकों को भारी राजस्व मिलता था। हालांकि, 2019 के सैन्य तनाव के बाद इसे बंद कर दिया गया।

साझा भाषा (उर्दू और हिंदी) और समान विवाह परंपराओं के कारण बॉलीवुड मनोरंजन का प्राथमिक स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही हाल की फिल्मों की राष्ट्रवादी कहानियों की पाकिस्तानी समाजशास्त्री आलोचना करते हों, लेकिन रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना जैसे सितारों की ताकत और संगीत राजनीतिक नाराजगी को पीछे छोड़ देते हैं।

बॉक्स ऑफिस और भविष्य की राह

हालांकि खाड़ी देशों और पाकिस्तान में प्रतिबंध के कारण निर्माताओं को लगभग ₹50-60 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है, लेकिन ‘धुरंधर’ ने घरेलू और अन्य विदेशी बाजारों में इसकी भरपाई कर ली है। जनवरी 2026 की शुरुआत तक, फिल्म ने वैश्विक स्तर पर ₹1200 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे यह 2025 की सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई है।

बाजार संग्रह (अनुमानित)
भारत (नेट) ₹773.78 करोड़
वर्ल्डवाइड (ग्रॉस) ₹1207 करोड़
विदेशी (ग्रॉस) $31 मिलियन

फिल्म का दूसरा भाग, ‘धुरंधर 2’, मार्च 2026 में रिलीज होने के लिए तैयार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी फिल्म इस सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करेगी या दूरियां बढ़ाएगी, लेकिन फिलहाल कराची की शादी में ‘शरारत’ पर थिरकती महिलाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कला की कोई सीमा नहीं होती।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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