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मैनेजमेंट बनाम ‘हिटमैन’: कोच पर बरसे मनोज तिवारी

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SamacharToday.co.in - मैनेजमेंट बनाम 'हिटमैन' कोच पर बरसे मनोज तिवारी - Image Generated AI

भारतीय क्रिकेट की उच्च-दबाव वाली दुनिया में, जहां हर रन और हर टिप्पणी की सूक्ष्म जांच होती है, न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतिम वनडे से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री मनोज तिवारी ने भारत के सहायक कोच रयान टेन डोशेट पर तीखा पलटवार किया है, और दिग्गज रोहित शर्मा के कद का बचाव किया है।

यह विवाद 14 जनवरी, 2026 को राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में न्यूजीलैंड के हाथों भारत की सात विकेट से हार के बाद शुरू हुआ। इस हार से तीन मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर हो गई, लेकिन असली गहमागहमी मैदान के बाहर तब शुरू हुई जब टेन डोशेट ने पूर्व कप्तान के वर्तमान फॉर्म का स्पष्ट और थोड़ा आलोचनात्मक विश्लेषण पेश किया।

“फ्लुएंसी” की बहस: विवाद की जड़ क्या है?

रोहित शर्मा, जिन्होंने 2024 विश्व कप जीत के बाद टी20 से संन्यास लिया और 2025 के अंत में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया, मौजूदा सीरीज में अपनी लय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वडोदरा में 26 और राजकोट में 24 रन बनाने वाले “हिटमैन” उन शुरुआत को बड़ी पारियों में नहीं बदल पाए हैं, जिसके लिए वे जाने जाते हैं।

राजकोट मैच के बाद, टेन डोशेट ने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “मैच अभ्यास” की कमी—चयनात्मक प्रारूप में खेलने के कारण—क्रीज पर उनकी सहजता (fluency) को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई के लिए कुछ विजय हजारे ट्रॉफी मैच खेलने के बावजूद, रोहित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की लय से थोड़ा दूर नजर आ रहे हैं।

तिवारी का तीखा प्रहार: “सम्मान करना सीखें”

मनोज तिवारी, जो अपने बेबाक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, ने इन टिप्पणियों को हल्के में नहीं लिया। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में चार सीजन तक टेन डोशेट के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने वाले तिवारी ने उनके व्यक्तिगत संबंधों को स्वीकार किया, लेकिन उनके पेशेवर विश्लेषण की कड़ी आलोचना की।

तिवारी ने मीडिया से कहा, “बहुत सम्मान के साथ, मैं रयान टेन डोशेट को बताना चाहूंगा… उन्होंने जिस तरह की टिप्पणी की है, मुझे लगता है कि उन्हें इसके बारे में सोचना चाहिए था। उन्होंने नीदरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है। यदि आप उनके प्रदर्शन को देखें, तो यह रोहित के करियर की उपलब्धियों का 5% भी नहीं है, न केवल एक बल्लेबाज के रूप में बल्कि एक कप्तान के रूप में भी।”

तिवारी ने आगे इस बात पर जोर दिया कि मैनेजमेंट के भीतर से ऐसे सार्वजनिक बयान एक वरिष्ठ खिलाड़ी के मनोबल को गिरा सकते हैं। “वह मैनेजमेंट का हिस्सा हैं। अपने ही खिलाड़ी के बारे में ऐसा कहना मनोबल गिराने वाला है। मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। उन्हें इस पर विचार करना चाहिए।”

रणनीतिक बदलाव: चैंपियंस ट्रॉफी के बाद का दौर

यह तनाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय टीम नेतृत्व के बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। 2025 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत के बाद, कप्तानी शुभमन गिल को सौंप दी गई थी। हालांकि इस कदम को “2027 विश्व कप के लिए विजन” बताया गया था, लेकिन तिवारी ने पहले भी आरोप लगाया है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर के तहत माहौल ने रोहित और विराट कोहली की भूमिकाओं को कम करने को प्रभावित किया होगा।

“रोहित ने चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर देश को इतनी खुशी दी है… और उसके बाद, जब आप टीम मैनेजमेंट में हों, तब ऐसी बात करना मनोबल गिराने वाला है। उन्हें ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।” — मनोज तिवारी, पूर्व भारतीय क्रिकेटर

रयान टेन डोशेट और रोहित का समीकरण

रयान टेन डोशेट को 2024 के अंत में गौतम गंभीर के चुने हुए सपोर्ट स्टाफ के हिस्से के रूप में भारतीय कोचिंग सेटअप में लाया गया था। एसोसिएट देशों के दिग्गज खिलाड़ी के रूप में अपनी दृढ़ता के लिए जाने जाने वाले टेन डोशेट का “सीधे बोलने” का अंदाज कभी-कभी वरिष्ठ खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने की पारंपरिक भारतीय क्रिकेट संस्कृति से टकरा जाता है।

हालांकि टेन डोशेट का तर्क था कि पिच की कठिन परिस्थितियां और नई गेंद की चुनौतियों के साथ-साथ मैच अभ्यास की कमी ने रोहित जैसे “टच प्लेयर” के लिए लय पाना मुश्किल कर दिया, लेकिन सीरीज के निर्णायक मैच से ठीक पहले इस तरह की टिप्पणी की टाइमिंग पर कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए हैं।

इंदौर की राह: एक हाई-स्टेक फाइनल

जैसे ही टीमें 18 जनवरी को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में तीसरे वनडे के लिए पहुंचेंगी, सबका ध्यान रोहित शर्मा पर रहेगा। सीरीज दांव पर है और विराट कोहली वर्तमान में वनडे रैंकिंग में शीर्ष पर हैं, ऐसे में रोहित यह साबित करने के लिए बेताब होंगे कि “क्लास परमानेंट है” और लय केवल कुछ चौकों की दूरी पर है।

मैनेजमेंट के लिए चुनौती इन बाहरी विवादों को शांत करने की होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मैदान पर टीम के प्रदर्शन पर इसका कोई असर न पड़े।

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