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आर्टेमिस II का प्रक्षेपण: 54 साल बाद फिर चांद की ओर मानव
मानव अन्वेषण के इतिहास में 54 वर्षों के अंतराल को समाप्त करते हुए, नासा (NASA) के ‘आर्टेमिस II’ (Artemis II) मिशन ने गुरुवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में उड़ान भरी। अपोलो युग के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा की ओर ले जाने वाला यह ऐतिहासिक मिशन भारतीय समयानुसार तड़के 3:35 बजे (1 अप्रैल, पूर्वी डेलाइट समय शाम 6:35 बजे) फ्लोरिडा के तट से रवाना हुआ। 322 फीट ऊंचे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) रॉकेट ने 88 लाख पाउंड का थ्रस्ट पैदा करते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा के पार पहुँचाया।
यह मिशन एक पूरी पीढ़ी के लिए मानव अंतरिक्ष उड़ान की सबसे बड़ी छलांग है। 1972 के बाद यह पहली बार है जब मानव चंद्रमा के करीब जाने का साहस कर रहा है। ‘ओरियन’ (Orion) अंतरिक्ष यान, जिसे चालक दल ने “इंटीग्रिटी” (Integrity) नाम दिया है, अब छह दिनों में चंद्रमा तक पहुँचने के मार्ग पर है।
एक सटीक प्रक्षेपण का विवरण
मिशन कंट्रोलर्स ने इस लॉन्च को “एकदम सटीक” बताया है। 57.5 लाख पाउंड वजनी इस रॉकेट को उठाने के लिए आवश्यक प्रारंभिक शक्ति का 75% हिस्सा जुड़वां ‘सॉलिड रॉकेट बूस्टर्स’ से प्राप्त हुआ। इसके साथ ही चार RS-25 इंजनों ने मिलकर रॉकेट को लॉन्च पैड से ऊपर धकेला।
उड़ान के शुरुआती मिनटों में, बूस्टर्स और ओरियन का ‘लॉंच एबॉर्ट सिस्टम’ सफलतापूर्वक अलग हो गए, जिससे अंतरिक्ष यान पहली बार अंतरिक्ष के निर्वात (vacuum) के संपर्क में आया। प्रक्षेपण के लगभग 50 मिनट बाद, रॉकेट के ऊपरी हिस्से ने कक्षा को 115 मील पर स्थिर किया। दो घंटे बाद एक और इंजन फायर ने यान को 43,760 मील की ऊँचाई तक पहुँचा दिया।
नए युग के खोजकर्ता
आर्टेमिस II के चालक दल में कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। अगले 24 घंटों तक यह दल पृथ्वी की ऊंची कक्षा में रहकर ओरियन के संचार, नेविगेशन और जीवन रक्षक प्रणालियों की जांच करेगा। एक बार सभी प्रणालियों के दुरुस्त पाए जाने पर, वे चंद्रमा की ओर चार दिनों की यात्रा शुरू करेंगे।
नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने इस क्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा: “ओरियन पर सवार ये चार असाधारण खोजकर्ता उस मिशन की तैयारी कर रहे हैं जो उन्हें एक पीढ़ी के किसी भी मानव की तुलना में अधिक दूर और अधिक तेज़ ले जाएगा। आर्टेमिस II केवल एक मिशन नहीं, बल्कि चंद्रमा पर हमारी स्थायी वापसी की शुरुआत है।”
चंद्रमा की ‘फिगर-एट’ यात्रा
यह मिशन चंद्रमा पर उतरने के बजाय उसके करीब से गुजरने (Flyby) के लिए बनाया गया है। 6 अप्रैल को अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह के सबसे करीब होंगे और इतिहास में पहली बार चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far Side) की उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेंगे। इसके बाद, ओरियन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके ‘फिगर-एट’ (8 के आकार) के पथ पर पृथ्वी की ओर लौटेगा। 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में इसके ‘स्प्लैशडाउन’ (समुद्र में उतरने) की उम्मीद है।
एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर अमित क्षत्रिय ने कहा: “रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी ओरियन की क्षमताओं का परीक्षण करेंगे ताकि आने वाले भविष्य के चालक दल पूरे आत्मविश्वास के साथ चंद्रमा की सतह पर उतर सकें। हम एक लंबे अभियान के शुरुआती दौर में हैं।”
चंद्र अर्थव्यवस्था का उदय
आर्टेमिस II की सफलता भविष्य की मंगल यात्राओं और चंद्रमा पर स्थायी बेस (Moon Base) बनाने की नींव रखेगी। यह मिशन न केवल वैज्ञानिक डेटा लाएगा, बल्कि एक नई “चंद्र अर्थव्यवस्था” (Lunar Economy) की संभावनाओं को भी जन्म देगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नज़रें उन चार साहसी अंतरिक्ष यात्रियों पर टिकी हैं जो 21वीं सदी में पृथ्वी के आंगन को छोड़कर गहरे अंतरिक्ष में कदम रखने वाले पहले मानव बन गए हैं।
