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आयकर रिटर्न सीजन शुरू: AY 2026-27 के लिए पोर्टल और यूटिलिटीज लाइव
डिजिटल दक्षता और करदाता सुविधा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, आयकर विभाग ने आधिकारिक तौर पर निर्धारण वर्ष (Assessment Year – AY) 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने पुष्टि की है कि ITR-1 (सहज) और ITR-4 (सुगम) के लिए ऑनलाइन फाइलिंग सुविधा और डाउनलोड करने योग्य एक्सेल यूटिलिटीज अब ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव हो गई हैं।
इस शुरुआती शुरुआत से व्यक्तिगत करदाताओं, वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे व्यवसायियों को 31 जुलाई, 2026 की समय सीमा से काफी पहले अपना रिटर्न तैयार करने का मौका मिलेगा। यह सीजन इसलिए भी खास है क्योंकि यह नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य कर व्यवस्था को सरल और आधुनिक बनाना है।
“नए अधिनियम” का युग: सरलीकरण और आधुनिकीकरण
1 अप्रैल, 2026 से लागू हुए आयकर अधिनियम, 2025 ने अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए कई बदलाव किए हैं। नए अधिनियम ने 800 से अधिक धाराओं को लगभग 536 में समेकित किया है, जिससे कानूनी भाषा को समझना आसान हो गया है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अनुसार, इसका उद्देश्य “डेटा-संचालित” प्रशासन की ओर बढ़ना है। विभाग ने हाल ही में एक मार्गदर्शन नोट में कहा, “आयकर अधिनियम, 2025 को एक सरल और आधुनिक टैक्स कोड प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया है। हमारा ध्यान अनुपालन को आसान बनाने, व्यापार करने की सुगमता (ease of doing business) को बढ़ावा देने और भारतीय कर प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने पर है।”
AY 2026-27 के लिए मुख्य संरचनात्मक बदलाव
इस साल करदाताओं को कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, जिन्हें नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी राहत में, CBDT ने ITR-1 (सहज) के दायरे को बढ़ा दिया है। पहले, एक से अधिक घर रखने वाले व्यक्तियों को अनिवार्य रूप से ITR-2 फाइल करना पड़ता था, जो काफी जटिल होता था। अब, ₹50 लाख तक की कुल आय वाले निवासी व्यक्ति ITR-1 का उपयोग कर सकते हैं, भले ही उनके पास दो घर की संपत्तियां हों।
फॉर्म 26AS से फॉर्म 168 का सफर
पुराने फॉर्म 26AS को अब फॉर्म 168 से बदल दिया गया है। यह नया फॉर्म एक ‘एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट’ की तरह काम करता है, जो कई स्रोतों से डेटा प्राप्त करता है। इसमें न केवल TDS और TCS, बल्कि शेयरों के बायबैक से होने वाले नुकसान और म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन जैसे उच्च-मूल्य वाले लेनदेन भी शामिल हैं।
सख्त अनुपालन: जुर्माना और खुलासे
प्रणाली सरल होने के साथ-साथ सख्त भी हुई है:
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संशोधित रिटर्न पर जुर्माना: नई धारा 234I के तहत, देरी से संशोधित रिटर्न फाइल करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का शुल्क लिया जाएगा।
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विस्तृत रिपोर्टिंग: अब फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) टर्नओवर, इंट्राडे ट्रेडिंग और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के लिए अलग और स्पष्ट विवरण देना अनिवार्य होगा।
महत्वपूर्ण समय सीमाएं
आयकर विभाग ने करदाताओं से अंतिम समय की प्रतीक्षा न करने का आग्रह किया है। मुख्य समय सीमाएं इस प्रकार हैं:
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वेतनभोगी व्यक्ति / गैर-ऑडिट मामले: 31 जुलाई, 2026
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गैर-ऑडिट व्यवसाय और ट्रस्ट: 31 अगस्त, 2026
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ऑडिट मामले (व्यवसाय/पेशेवर): 31 अक्टूबर, 2026
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ट्रांसफर प्राइसिंग मामले: 30 नवंबर, 2026
चूंकि एक्सेल यूटिलिटीज अब लाइव हैं, करदाता अपना डेटा ऑफलाइन तैयार कर सकते हैं, JSON फाइल जेनरेट कर सकते हैं और इसे सीधे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं।
