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आदिवासी किसान ने उगाया दुनिया का महंगा आम

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आदिवासी किसान ने उगाया दुनिया का महंगा आम - SamacharToday.co.in

ओडिशा के मलकानगिरी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने कृषि क्षेत्र और आम प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिले के एक आदिवासी किसान ने अपने खेत में जापानी मूल के बेहद दुर्लभ और महंगे मियाजाकी आम की सफल खेती कर लोगों को चौंका दिया है। इस आम को दुनिया की सबसे महंगी आम किस्मों में गिना जाता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। इस अनोखी खेती के बाद अब किसान और उनका बगीचा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं।

जानकारी के अनुसार मलकानगिरी जिले के तमसा गांव के रहने वाले किसान देब मडकामी ने अपने बगीचे में इस विशेष आम की खेती की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग हटकर नई तकनीकों और विशेष किस्मों पर काम करने का प्रयास किया। उनकी मेहनत का परिणाम अब सामने दिखाई दे रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों की रुचि बढ़ी है।

मियाजाकी आम अपनी खास बनावट और रंग के कारण दुनिया भर में अलग पहचान रखता है। इस आम को “एग ऑफ द सन” के नाम से भी जाना जाता है। पकने के बाद इन आमों का रंग सामान्य पीले रंग से अलग होकर लाल और बैंगनी मिश्रित दिखाई देता है। इसके अलावा स्वाद और गुणवत्ता के कारण भी यह आम अन्य किस्मों से अलग माना जाता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग काफी अधिक रहती है।

हालांकि इस उपलब्धि के साथ किसान के सामने कई नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस महंगे फल की वजह से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारी कीमत होने के कारण चोरी की आशंका भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि किसान ने बगीचे की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं और लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं।

इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या इस आम की बिक्री को लेकर सामने आई है। मलकानगिरी जैसे दूरदराज के क्षेत्र में इतने महंगे उत्पाद के लिए खरीदार ढूंढना आसान नहीं माना जा रहा। किसान का कहना है कि फसल तैयार होने के बावजूद उसे उचित बाजार और खरीदारों की तलाश बनी हुई है। यह स्थिति उनके लिए नई चुनौती बन गई है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को उचित बाजार और सरकारी सहयोग मिले तो इस प्रकार की विशेष खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। उच्च मूल्य वाली फसलें किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए विपणन और वितरण व्यवस्था का मजबूत होना भी जरूरी माना जाता है।

फिलहाल यह मामला स्थानीय लोगों और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब किसान को उम्मीद है कि संबंधित विभाग और सरकार उन्हें उचित मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराने में सहायता करेंगे। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अनोखी खेती का लाभ किसान को किस रूप में मिलता है।

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। समाचार टुडे में अनूप कुमार की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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