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भारत-माली व्यापार मंच से आर्थिक साझेदारी को मिली नई गति
भारत और माली ने अपने बढ़ते आर्थिक संबंधों को नई दिशा देते हुए बामाको में पहले भारत-माली निर्यात प्रोत्साहन मंच (India–Mali Forum for the Promotion of Exports) का शुभारंभ किया। “व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाना” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय मंच का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति देना है।
इस मंच का संयुक्त आयोजन माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय, बामाको स्थित भारतीय दूतावास और माली निर्यात संवर्धन एजेंसी (APEX-Mali) ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री मेजर जनरल अब्दुलाये माइगा ने की। इसमें भारत और माली के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ लगभग 30 भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव (एफटी-अफ्रीका) अमित कुमार ने किया, जबकि माली में भारत के राजदूत डॉ. एन. नंदकुमार भी उपस्थित रहे।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और माली के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक है। माली से भारत को मुख्य रूप से कच्चा कपास, तैयार चमड़ा, काजू, सीसा, गोंद अरबिक और तिल का निर्यात होता है, जबकि भारत से दवाइयां, सूती कपड़ा, दोपहिया एवं तिपहिया वाहन तथा साइकिलों का निर्यात किया जाता है। सरकार के अनुसार, भारत की ड्यूटी-फ्री टैरिफ प्रेफरेंस (DFTP) योजना ने इस व्यापार वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उद्घाटन सत्र के बाद प्रतिनिधियों ने भारतीय और माली प्रदर्शनी स्टॉलों का दौरा किया, जहां सोनालिका ट्रैक्टर, महिंद्रा और टाटा मोटर्स के वाहनों सहित विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। मंच के दौरान बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B), बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (B2G) और गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (G2G) बैठकें आयोजित की गईं। इनमें अक्षय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र उद्योग, ऑटोमोबाइल विनिर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
दूसरे दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्री मूसा अलासाने डियालो से मुलाकात की। APEX-Mali ने तत्काल निवेश योग्य कई परियोजनाओं की प्रस्तुति दी। दोनों देशों ने कपास एवं वस्त्र उद्योग, खनन एवं ऊर्जा, कृषि-आधारित उद्योग, शीया प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स तथा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।
माली ने भारत से अपने सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन प्रणाली के डिजिटलीकरण और भारतीय दवाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने में सहयोग का अनुरोध किया। वहीं भारत ने माली से शीया नट निर्यात पर लगे प्रतिबंध की समीक्षा करने तथा देश में भारतीय नागरिकों और निवेशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के समापन पर माली ने Vision Mali 2063 के तहत सुरक्षित और निवेश-अनुकूल कारोबारी माहौल उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही घोषणा की गई कि 3-4 दिसंबर 2026 को एक विशेष निवेश सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें वैश्विक निवेशकों के लिए नई परियोजनाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
