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उच्च-रिज़ॉल्यूशन अध्ययन में छिपे सुपरमैसिव ब्लैक होल का खुलासा
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों सहित अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों की एक टीम ने उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो अवलोकनों की मदद से निकटवर्ती आकाशगंगाओं में छिपे हुए कमजोर सक्रिय सुपरमैसिव ब्लैक होल की एक बड़ी आबादी का पता लगाया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज आकाशगंगाओं के विकास की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अनुसार, यह अध्ययन उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो सर्वेक्षणों में से एक है, जो सांख्यिकीय रूप से पूर्ण है और उन बेहद कमजोर सक्रिय ब्लैक होल का पता लगाने में सक्षम है, जिन्हें पारंपरिक अवलोकन तकनीकों से पहचानना मुश्किल था।
यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने Palomar Sample से चुनी गई 280 निकटवर्ती आकाशगंगाओं का अवलोकन ब्रिटेन स्थित e-MERLIN रेडियो टेलीस्कोप नेटवर्क के माध्यम से किया। सात रेडियो टेलीस्कोपों से बना यह नेटवर्क एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन इंटरफेरोमीटर की तरह कार्य करता है।
इस शोध दल में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिक डॉ. अरु बेरी भी शामिल थे। IIA, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने लगभग एक-चौथाई आकाशगंगाओं के केंद्र से सघन रेडियो उत्सर्जन का पता लगाया, जो कमजोर रूप से सक्रिय सुपरमैसिव ब्लैक होल की मौजूदगी का संकेत देता है। इनमें से अधिकांश स्रोत अत्यधिक सघन पाए गए, जबकि कुछ में आकाशगंगा के केंद्र से कई पारसेक तक फैली जेट जैसी रेडियो संरचनाएं भी देखी गईं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग हर आकाशगंगा के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल मौजूद होता है, लेकिन इनमें से कई इतने कमजोर होते हैं कि उन्हें सामान्य अवलोकन तकनीकों से पहचानना संभव नहीं हो पाता। इसके बावजूद ये ब्लैक होल आकाशगंगाओं के विकास और उनमें होने वाली तारों की उत्पत्ति को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोध के अनुसार, ये ब्लैक होल जेट और आउटफ्लो के माध्यम से अपने आसपास ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, जिससे तारों के निर्माण की गति और आकाशगंगाओं के दीर्घकालिक विकास पर प्रभाव पड़ता है।
रेडियो अवलोकनों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों ने नासा के चंद्रा एक्स-रे वेधशाला से प्राप्त आंकड़ों का भी विश्लेषण किया। बहु-तरंगदैर्ध्य अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि प्राप्त रेडियो संकेत वास्तव में सक्रिय सुपरमैसिव ब्लैक होल से उत्पन्न हुए थे, न कि तारों के निर्माण क्षेत्रों, सुपरनोवा अवशेषों या एक्स-रे बाइनरी जैसी अन्य खगोलीय वस्तुओं से।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन संकेत देता है कि वर्तमान ब्रह्मांड में ब्लैक होल की वृद्धि का प्रमुख तरीका निम्न-स्तरीय सक्रियता हो सकता है। साथ ही यह खोज दर्शाती है कि उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो खगोल विज्ञान भविष्य में ऐसे अनेक छिपे हुए सक्रिय ब्लैक होल की पहचान करने में अहम भूमिका निभाएगा।
