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iPhone निर्यात ने भारत के 2025 टेक व्यापार को चमकाया
नई दिल्ली – भारत के व्यापार परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव के तहत, स्मार्टफोन 2025 में देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा है, जिसने ऑटोमोटिव डीजल जैसे पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को पीछे छोड़ दिया है। मुख्य रूप से एप्पल (Apple) के आक्रामक विनिर्माण विस्तार के कारण, स्मार्टफोन निर्यात 30.13 अरब डॉलर के चौंकाने वाले आंकड़े तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 20.44 अरब डॉलर से 47% अधिक है।
आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले एप्पल के आईफोन (iPhone) का इन शिपमेंट में 23 अरब डॉलर का योगदान था, जो भारत से होने वाले कुल स्मार्टफोन निर्यात का लगभग 76% है। इस उछाल ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स केंद्र के रूप में प्रभावी ढंग से पुनर्स्थापित किया है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका इन हाई-टेक निर्यातों के लिए प्राथमिक गंतव्य बना हुआ है।
पीएलआई (PLI) और विनिर्माण विस्तार का प्रभाव
इस घातीय वृद्धि का श्रेय व्यापक रूप से भारत सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को दिया जा रहा है, जिसने स्थानीय असेंबली और घटक विनिर्माण को प्रोत्साहित किया है। वर्तमान में, एप्पल भारत में पांच विशाल असेंबली प्लांट संचालित करता है—तीन टाटा समूह द्वारा और दो फॉक्सकॉन द्वारा प्रबंधित हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र लगभग 45 कंपनियों के नेटवर्क द्वारा समर्थित है, जिसमें कई एमएसएमई (MSME) शामिल हैं जो महत्वपूर्ण पुर्जों की आपूर्ति करते हैं।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए, इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के अध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा: “स्मार्टफोन निर्यात पावरहाउस बनने की दिशा में भारत का उदय ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता का प्रमाण है। आईफोन के नेतृत्व में स्मार्टफोन निर्यात में 30 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करना यह साबित करता है कि भारत वैश्विक गुणवत्ता और पैमाने की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। हमारा अगला लक्ष्य लागत के नुकसान की भरपाई के लिए देश के भीतर ‘वैल्यू एडिशन’ को और गहरा करना है।”
प्रतिस्पर्धी चुनौतियां और नीतिगत दृष्टिकोण
रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों के बावजूद, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की राह चुनौतीपूर्ण है। नीति आयोग का अनुमान है कि चीन की तुलना में भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में अभी भी 11% से 14% की लागत संबंधी विसंगति का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, स्मार्टफोन के लिए वर्तमान पांच वर्षीय पीएलआई योजना मार्च 2026 में समाप्त होने वाली है, जिससे इस गति को बनाए रखने के लिए “पीएलआई 2.0” की आवश्यकता पर चर्चा शुरू हो गई है।
2025 में निर्यात में आई यह तेजी भू-राजनीतिक कारकों, विशेष रूप से चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स पर पिछले अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था से भी प्रेरित थी। हालांकि, वैश्विक व्यापार नीतियों में हालिया अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शुल्कों के संभावित पुनर्मूल्यांकन के साथ, भारतीय निर्माता तुलनात्मक लागत लाभों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
बदलता निर्यात ढांचा
दशकों से भारत की निर्यात टोकरी में रिफाइंड पेट्रोलियम, रत्न और आभूषणों का दबदबा था। 2025 के आंकड़े एक संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाते हैं। 30.13 अरब डॉलर के साथ, स्मार्टफोन ने अब ऑटोमोटिव डीजल ईंधन (16.34 अरब डॉलर) और दवाओं तथा मोटर गैसोलीन जैसे अन्य प्रमुख मदों को पीछे छोड़ दिया है।
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल फोन निर्माता के रूप में, भारत अब अपनी घरेलू मोबाइल फोन आवश्यकता का 99% से अधिक स्थानीय स्तर पर असेंबल करता है। उपभोग-प्रधान बाजार से निर्यात-उन्मुख निर्माता की ओर यह संक्रमण एक परिपक्व औद्योगिक आधार का संकेत देता है। हालांकि, 2026 में पीएलआई योजना की समाप्ति इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के लिए नीतिगत विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण बिंदु बनी हुई है।
