भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा, व्यापार से सुरक्षा तक सहयोग होगा मजबूत

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भारत और न्यूजीलैंड ने अपनी हाल ही में उन्नत हुई रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को नई दिशा देने के लिए व्यापार, निवेश, सुरक्षा, शिक्षा, पारंपरिक चिकित्सा, समुद्री सहयोग, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक रूप से मजबूत करने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान आयोजित विशेष मीडिया ब्रीफिंग में दोनों देशों के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौतों और भविष्य की सहयोग रूपरेखा की जानकारी दी।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच अब संबंध केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था, नवाचार और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े विषय भी साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे।

टंडन ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत की और व्यापार एवं निवेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हाल ही में संपन्न भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) व्यवसायों, किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा आयोजित विशेष दोपहर भोज में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और उन्हें विश्वास है कि एफटीए के लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों में व्यापार दोगुना किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड द्वारा भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योगों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए टंडन ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में से एक है और एफटीए लागू होने के बाद निवेश के अवसर स्वतः बढ़ेंगे।

दोनों देशों ने शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को भी द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ माना। संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, दोनों प्रधानमंत्रियों ने कृषि, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही, 2025 शिक्षा सहयोग व्यवस्था के तहत छात्र आदान-प्रदान, अनुसंधान साझेदारी और संस्थागत सहयोग को भी विस्तार देने का निर्णय लिया गया।

ऊर्जा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। न्यूजीलैंड ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस में शामिल होने का स्वागत किया गया, जबकि दोनों देशों ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) के माध्यम से साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा, भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के बीच सहयोग समझौते पर भी सहमति बनी।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा में पारंपरिक चिकित्सा और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को भी विशेष महत्व दिया गया। टंडन ने कहा कि भारत की आयुष प्रणाली और न्यूजीलैंड की माओरी पारंपरिक चिकित्सा के बीच सहयोग भविष्य का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से मानते रहे हैं कि पारंपरिक चिकित्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का एक प्रभावी और निवारक हिस्सा हो सकती है। दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े एफटीए परिशिष्ट के तहत इस दिशा में ठोस पहल की जाएगी।

सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप 2030 के तहत लागू की जाएगी। टंडन ने कहा कि भारत आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ हमेशा से स्पष्ट और सख्त रुख अपनाता रहा है तथा इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते। संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने पहलगाम (अप्रैल 2025) और दिल्ली के लाल किले के निकट (नवंबर 2025) हुए आतंकी हमलों का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाने, आतंकी वित्तपोषण रोकने और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों देशों ने मुक्त, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों का समर्थन किया। साथ ही समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मौजूदा रक्षा सहयोग ढांचे के तहत समुद्री सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने की भी घोषणा की गई।

खेल सहयोग को भी दोनों देशों ने नई प्राथमिकता दी है। टंडन ने कहा कि न्यूजीलैंड खेलों में विश्वस्तरीय उपलब्धियों वाला देश है और भारत राष्ट्रमंडल खेलों तथा भविष्य में ओलंपिक की मेजबानी की अपनी महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए न्यूजीलैंड के अनुभवों से काफी कुछ सीख सकता है। इसके अलावा भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने से जुड़े हालिया सुधारों के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई गई।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान टंडन ने न्यूजीलैंड की वीजा नीति से जुड़े सवाल पर कहा कि यह पूरी तरह न्यूजीलैंड का संप्रभु निर्णय है। उन्होंने कहा कि जब तक दोनों देशों के व्यवसाय, छात्र और विभिन्न आदान-प्रदान कार्यक्रम सुचारु रूप से चलते रहेंगे, भारत इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यात्रा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी सीधे जनता से संवाद को प्राथमिकता देते हैं और यही उनकी राजनीतिक शैली की सबसे बड़ी विशेषता है।

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