Health
आयातित दवाओं के नियमों में बदलाव की तैयारी
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने आयातित दवाओं के शेल्फ लाइफ (Shelf Life) से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव जारी करते हुए आम जनता, दवा उद्योग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य दवा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक कुशल बनाना, दवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाना है। इसके लिए मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 में संशोधन का मसौदा सार्वजनिक किया है।
22 जून 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना (G.S.R. 505(E)) के अनुसार, सरकार आयातित दवाओं के लिए मौजूदा शर्त में बदलाव करना चाहती है। वर्तमान नियम के तहत किसी भी आयातित दवा के भारत पहुंचने के समय उसकी कुल शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शेष होना अनिवार्य है। नए प्रस्ताव के अनुसार इस व्यवस्था को बदलकर केवल इतना आवश्यक होगा कि दवा के आयात के समय उसकी कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ बची हो।
हालांकि मंत्रालय ने जैविक उत्पादों (Biological Products) और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स (Radiopharmaceuticals) के लिए मौजूदा 60 प्रतिशत शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता को बरकरार रखने का प्रस्ताव दिया है। मंत्रालय का कहना है कि इन दवाओं की प्रकृति विशेष होती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से इनके लिए मौजूदा नियमों में बदलाव उचित नहीं माना गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन से दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। यदि किसी आयातित दवा के पास कम से कम एक वर्ष की उपयोग अवधि उपलब्ध होगी, तो उसके देशभर में वितरण और मरीजों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे दवाओं की अनावश्यक बर्बादी भी कम होगी और स्टॉक प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
मंत्रालय का मानना है कि इस बदलाव से फार्मास्यूटिकल कंपनियों की इन्वेंट्री मैनेजमेंट में सुधार होगा, सप्लाई चेन की लागत घटेगी और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता देशभर में और मजबूत होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण दवाएं समय पर पहुंचें, जबकि उद्योग को भी अनावश्यक नियामकीय बोझ से राहत मिले।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन केवल आयात के समय दवाओं की शेष शेल्फ लाइफ से संबंधित है। इससे दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत लागू सभी गुणवत्ता और सुरक्षा मानक पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।
मंत्रालय ने इस मसौदे को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है और उद्योग संगठनों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सा पेशेवरों तथा आम नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम संशोधन अधिसूचित किया जाएगा।
इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी (ड्रग्स), कर्तव्य भवन-1, नई दिल्ली को भेज सकते हैं। इसके अलावा सुझाव ईमेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं। मंत्रालय का कहना है कि सभी हितधारकों की राय पर विचार करने के बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे, ताकि उद्योग और मरीजों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
