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International Relations

गाज़ा पर ट्रंप का दबाव: मुनीर की अगली चाल

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SamacharToday.co.in - गाज़ा पर ट्रंप का दबाव मुनीर की अगली चाल - Image Credited by Times NOW

पाकिस्तान के पिछले कई दशकों के सबसे शक्तिशाली सैन्य व्यक्तित्व, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, इस समय एक ऐसी भू-राजनीतिक बिसात पर खड़े हैं जो देश के भविष्य और अमेरिका के साथ उसके संबंधों को फिर से परिभाषित कर सकती है। वाशिंगटन द्वारा “गाजा स्थिरता बल” (Gaza Stabilization Force) के लिए दबाव डालने के साथ ही, मुनीर के सामने एक कठिन विकल्प है: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध को पूरा करें या अपने ही देश की जनता के गुस्से का सामना करें।

मुनीर की शक्ति वर्तमान में अपने चरम पर है। उन्हें हाल ही में ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ नियुक्त किया गया है, जिससे थल सेना, नौसेना और वायुसेना उनके अधीन आ गई हैं। इसके अलावा, उनका कार्यकाल 2030 तक बढ़ा दिया गया है। लेकिन गाजा में पाकिस्तानी सैनिकों को भेजने का प्रस्ताव उनकी सत्ता को राष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ खड़ा कर सकता है।

ट्रंप की योजना: मुस्लिम देशों से सैन्य मदद की मांग

इस तनाव की मुख्य वजह राष्ट्रपति ट्रंप की गाजा के लिए “20-सूत्रीय योजना” है। इस योजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय “बोर्ड ऑफ पीस” (Board of Peace) के गठन की बात कही गई है, जो गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी करेगा। इस योजना का मुख्य हिस्सा एक ऐसी सेना है जिसमें मुख्य रूप से मुस्लिम देशों के सैनिक शामिल हों।

ट्रंप के लिए पाकिस्तान एक आदर्श भागीदार है। एक परमाणु शक्ति संपन्न देश और अनुभवी सेना होने के नाते, पाकिस्तान की भागीदारी इस बल को वैश्विक मान्यता प्रदान करेगी। सूत्रों के अनुसार, मुनीर अगले कुछ हफ्तों में वाशिंगटन का दौरा कर सकते हैं, जहां गाजा में सैनिकों की तैनाती मुख्य मुद्दा होगी।

विशेषज्ञों की राय: ‘ना’ कहना आसान नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर और ट्रंप के बीच बढ़ती नजदीकी की एक “कीमत” भी है। अटलांटिक काउंसिल के माइकल कुगेलमैन ने कहा, “सैनिक न भेजना ट्रंप को नाराज कर सकता है, जो पाकिस्तान जैसे देश के लिए अच्छी बात नहीं है, क्योंकि उसे अमेरिकी निवेश और सुरक्षा सहायता की सख्त जरूरत है।”

रक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दीका का मानना है कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता के कारण मुनीर पर दबाव और बढ़ गया है। उन्होंने कहा, “मुनीर पर अपनी क्षमता साबित करने का भारी दबाव है।” मुनीर ने हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र और कतर जैसे देशों का दौरा किया है, जिसे इस सैन्य बल पर क्षेत्रीय सहमति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

घरेलू मोर्चे पर बड़ा खतरा

मुनीर के पास असीमित शक्तियां और कानूनी सुरक्षा (Immunity) होने के बावजूद, सबसे बड़ा खतरा जनता का विरोध है। पाकिस्तान में फिलिस्तीन के प्रति गहरी सहानुभूति है। अगर पाकिस्तानी सैनिकों को ऐसी किसी सेना का हिस्सा बनाया जाता है जो हमास को निहत्था करने का काम करे, तो इसे देश में “इजरायल और अमेरिका की गुलामी” के रूप में देखा जाएगा।

विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान शांति सेना में योगदान पर विचार कर सकता है, लेकिन “हमास को निहत्था करना हमारा काम नहीं है।”

फील्ड मार्शल का जोखिम

आसिम मुनीर अब जीवन भर के लिए फील्ड मार्शल हैं और उन्हें किसी भी कानूनी कार्रवाई से स्थायी छूट प्राप्त है। कुगेलमैन के अनुसार, “मुनीर के पास जितनी शक्ति है, वैसी बहुत कम लोगों के पास होती है।” लेकिन पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि असीमित शक्ति भी जन-आंदोलनों के सामने टिक नहीं पाती।

यदि मुनीर गाजा के लिए सैनिक भेजते हैं, तो वे ट्रंप प्रशासन के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध सुनिश्चित करेंगे। यदि वे मना करते हैं, तो वे घरेलू विद्रोह से तो बच जाएंगे, लेकिन वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ सकते हैं। वाशिंगटन यात्रा से पहले मुनीर को यह तय करना होगा कि वे कौन सा जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं।

देवाशीष पेशे से इंजीनियर हैं और वर्ष 2017 से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें 2017 से पत्रकारिता में निरंतर अनुभव प्राप्त है, जिसके आधार पर उन्होंने डिजिटल और समाचार जगत में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। उन्हें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विषयों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टि के लिए जाना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), संसद, केंद्र सरकार और नीति-निर्माण से जुड़े मामलों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। उनकी मुख्य रुचि और विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय समाचारों, प्रबंधन, व्यापार (बिज़नेस) और खेल जगत की कवरेज में रही है। इसके साथ ही वे सीमित रूप से राजनीति और न्यूज़ प्लेसमेंट से जुड़े विषयों को भी कवर करते हैं। Samachar Today में देवाशीष का फोकस वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक गतिविधियों, खेल समाचारों और रणनीतिक विषयों पर निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और संतुलित रिपोर्टिंग प्रदान करना है।

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