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जैस्मीन सैंडलस ने शराब की लत पर खोला राज

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SamacharToday.co.in - जैस्मीन सैंडलस का संघर्ष नशे से रिकवरी की अनकही कहानी

चकाचौंध से भरी फिल्म और संगीत की दुनिया में जहां सितारे अपनी खामियों को छिपाने की कोशिश करते हैं, वहीं पंजाबी और बॉलीवुड की मशहूर गायिका जैस्मीन सैंडलस ने अपनी ज़िंदगी के सबसे काले अध्याय को साझा करने का साहसी कदम उठाया है। हाल ही में रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में जैस्मीन ने शराब की लत (Alcohol Addiction) के साथ अपने संघर्ष पर खुलकर बात की, जिसने उनके करियर के शुरुआती दौर को बुरी तरह प्रभावित किया था।

जैस्मीन का यह खुलासा केवल एक व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि यह मनोरंजन उद्योग में मानसिक स्वास्थ्य और नशे की समस्या पर एक गंभीर विमर्श की शुरुआत है। उनका सफर यह दर्शाता है कि सफलता के शिखर पर भी अकेलापन और दबाव किसी को भी गलत रास्ते पर ले जा सकता है।

शुरुआती सफलता और बिखराव का दौर

“गुलाबी क्वीन” के नाम से मशहूर जैस्मीन ने बताया कि जब वे मात्र 23 साल की थीं, तब उन्होंने अत्यधिक शराब का सेवन शुरू कर दिया था। यह वह समय था जब उनके गाने चार्टबस्टर हो रहे थे, लेकिन निजी ज़िंदगी में वे काफी उथल-पुथल से गुजर रही थीं। जैस्मीन के अनुसार, शोहरत को संभालना और साथ ही व्यक्तिगत भावनात्मक आघातों (Heartbreaks) का सामना करना उनके लिए मानसिक रूप से बोझिल हो गया था।

पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने स्वीकार किया, “लगभग दो से तीन साल का ऐसा दौर था जब मैंने अपनी ज़िंदगी के बहुत सारे गलत फैसले लिए।” उन्होंने बताया कि प्रसिद्धि के साथ आने वाला दबाव और उसके पीछे छिपा अकेलापन ही उनकी इस लत का मुख्य कारण बना।

ग्लैमर की दुनिया का काला सच

मनोरंजन उद्योग में कलाकारों पर हमेशा “परफेक्ट” दिखने और हर समय परफॉर्म करने का भारी दबाव होता है। जैस्मीन की कहानी इस बात की पुष्टि करती है कि अक्सर कलाकारों के पास एक मजबूत भावनात्मक सपोर्ट सिस्टम की कमी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब युवा कलाकार अचानक मिली प्रसिद्धि और सार्वजनिक आलोचना के बीच फंस जाते हैं, तो वे तनाव और चिंता से बचने के लिए नशे को एक “सहारे” (Coping Mechanism) के रूप में देखने लगते हैं।

मनोचिकित्सकों के अनुसार, मनोरंजन की दुनिया में अक्सर निजी संघर्षों को सार्वजनिक छवि के पीछे छिपा दिया जाता है, जिससे समस्या और भी विकराल हो जाती है।

“नशा अक्सर मानसिक तनाव और अकेलेपन की प्रतिक्रिया होती है। जब जैस्मीन सैंडलस जैसी बड़ी हस्तियां इस पर खुलकर बात करती हैं, तो यह समाज में फैली वर्जनाओं को तोड़ने में मदद करता है और अन्य लोगों को मदद मांगने के लिए प्रेरित करता है।” — डॉ. हरीश शेट्टी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक।

परिवार का साथ और सुधार की राह

जैस्मीन ने अपनी रिकवरी का पूरा श्रेय अपने परिवार, विशेष रूप से अपनी मां को दिया। उन्होंने अपनी मां को अपनी “ताकत का स्तंभ” बताया, जिन्होंने उन्हें उस अंधेरे दौर से बाहर निकालने में मदद की। जैस्मीन ने जोर देकर कहा कि नशे से मुक्ति केवल इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि अपनों के निस्वार्थ प्रेम और सहयोग से संभव है।

उनकी रिकवरी रातों-रात नहीं हुई। इसमें वर्षों की आत्मजांच, धैर्य और अपनी जीवनशैली को पूरी तरह बदलने की प्रतिबद्धता शामिल थी। जैस्मीन का यह संदेश साफ है कि यदि आपके पास सही लोग हैं, तो आप किसी भी गर्त से वापस आ सकते हैं।

संगीत में वापसी और नई शुरुआत

तमाम मुश्किलों के बाद, जैस्मीन ने न केवल अपनी लत पर काबू पाया, बल्कि संगीत की दुनिया में भी शानदार वापसी की है। फिल्म ‘धुरंधर’ के उनके हालिया गाने जबरदस्त हिट रहे हैं। उनकी यह वापसी उनकी मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है। उद्योग के जानकारों का मानना है कि जैस्मीन की आवाज़ में अब एक अलग गहराई है, जो शायद उनके जीवन के अनुभवों से उपजी है।

जैस्मीन सैंडलस का संगीत सफर: एक नजर

जालंधर में जन्मी और कैलिफोर्निया में पली-बढ़ी जैस्मीन ने पंजाबी लोक संगीत और आधुनिक पॉप का एक अनूठा मिश्रण पेश किया है। फिल्म ‘किक’ के गाने “यार ना मिले” से उन्हें बॉलीवुड में बड़ी पहचान मिली। उनकी सफलता की कहानी अब उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है जो अपनी कमियों और संघर्षों से लड़ रहे हैं।

जैस्मीन सैंडलस का शराब की लत से लड़कर वापस आना यह याद दिलाता है कि सफलता के पीछे का संघर्ष अक्सर दिखाई नहीं देता। उनकी ईमानदारी ने सोशल मीडिया पर मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। जैस्मीन का सफर यह सिखाता है कि हार मान लेना विकल्प नहीं है, और मदद मांगना कमजोरी नहीं बल्कि ताकत की निशानी है। जैसे-जैसे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, जैस्मीन जैसी कहानियां समाज को अधिक सहानुभूतिपूर्ण और सहायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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