Environment
टिपिंग पॉइंट: पृथ्वी कैसे एक ‘हॉट लूप’ की चपेट में आ सकती है
मानव सभ्यता हजारों वर्षों से होलोसीन (Holocene) युग की जलवायु स्थिरता में फली-फूली है। लेकिन, ‘वन अर्थ’ (One Earth) पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिरता समाप्त हो रही है। जलवायु वैज्ञानिक विलियम जे. रिपल और जोहान रॉकस्ट्रोम सहित शोधकर्ताओं ने एक “हॉटहाउस अर्थ ट्रेजेक्ट्री” (Hothouse Earth trajectory) का जोखिम बताया है—एक ऐसा रास्ता जहाँ जलवायु प्रणाली एक ऐसे बिंदु पर पहुँच जाती है जहाँ से वापसी संभव नहीं है।
वार्मिंग कैसे खुद को बढ़ावा देती है?
अध्ययन में “एम्प्लीफाइंग फीडबैक लूप्स” (Amplifying Feedback Loops) के बारे में बताया गया है। इसे एक ऐसे थर्मोस्टेट की तरह समझें जो खुद ही तापमान बढ़ाने लगता है। उदाहरण के लिए, जब आर्कटिक की बर्फ पिघलती है, तो सफेद सतह (जो सूरज की रोशनी को परावर्तित करती थी) की जगह गहरा समुद्री पानी ले लेता है। यह पानी गर्मी सोखता है, जिससे और अधिक बर्फ पिघलती है और गर्मी बढ़ती जाती है।
वैज्ञानिकों ने ऐसे दर्जनों लूप्स की पहचान की है:
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पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना: जमी हुई जमीन के पिघलने से उसमें दबी कार्बन और मीथेन बाहर निकलती है।
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जंगलों का खत्म होना: मरते हुए जंगल कार्बन सोखने के बजाय उसे छोड़ना शुरू कर देते हैं।
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एरोसोल का प्रभाव: जैसे-जैसे दुनिया कोयले और तेल से दूर हो रही है, प्रदूषण से होने वाला ‘कूलिंग इफेक्ट’ खत्म हो रहा है, जिससे तापमान में 0.5°C की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
टिपिंग एलिमेंट्स और उनका प्रभाव
पृथ्वी प्रणाली के सोलह “टिपिंग एलिमेंट्स” की पहचान की गई है, जिनमें ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर और अमेज़न के वर्षावन शामिल हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं। यदि एक तत्व अपनी सीमा (Threshold) पार करता है, तो वह दूसरे को भी प्रभावित कर सकता है। इसे “टिपिंग कैस्केड” कहा जाता है, जिससे स्वतः चलने वाला जलवायु परिवर्तन शुरू हो सकता है।
वर्तमान स्थिति और आंकड़े
2015 के पेरिस समझौते में वार्मिंग को 1.5°C तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 2024 में लगातार बारह महीनों तक यह सीमा पार रही। वार्मिंग की दर अब पहले से छह गुना तेज हो गई है:
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ऐतिहासिक दर: 20वीं सदी के मध्य में 0.05°C प्रति दशक।
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वर्तमान दर: लगभग 0.31°C प्रति दशक।
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कार्बन उत्सर्जन: 2024 में वैश्विक ऊर्जा संबंधी CO2 उत्सर्जन रिकॉर्ड 37.8 बिलियन टन तक पहुँच गया।
निष्कर्ष और आगे की राह
अध्ययन स्पष्ट करता है कि टिपिंग पॉइंट के बारे में अनिश्चितता देरी का कारण नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई का कारण होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, वर्तमान नीतियां 2100 तक पृथ्वी को लगभग 2.8°C वार्मिंग की ओर ले जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि “हॉटहाउस ट्रेजेक्ट्री” एक दिशा है जिसे अभी भी बदला जा सकता है, लेकिन यदि यह “हॉटहाउस स्टेट” में बदल गया, तो समुद्र का स्तर कई मीटर बढ़ जाएगा और अत्यधिक गर्मी स्थायी हो जाएगी।
