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International Relations

ड्रैगन और हाथी का साथ: गणतंत्र दिवस पर शी जिनपिंग के संदेश के मायने

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SamacharTOday.co.in - ड्रैगन और हाथी का साथ गणतंत्र दिवस पर शी जिनपिंग के संदेश के मायने - Image Credited by India Blooms

हिमालयी कूटनीति की जमी हुई बर्फ पिघलने का संकेत देते हुए, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2026) पर हार्दिक शुभकामनाएं भेजीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने संदेश में, जिनपिंग ने दोनों देशों को “अच्छे पड़ोसी मित्र और भागीदार” बताया। उन्होंने एक बार फिर उस पुराने मुहावरे का प्रयोग किया जो दोनों देशों के संबंधों का पैमाना माना जाता है: “ड्रैगन और हाथी का एक साथ नृत्य।”

भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग ने सोशल मीडिया पर इस संदेश को साझा करते हुए लिखा, “चीन और भारत के लिए यह सही विकल्प होना चाहिए कि वे एक-दूसरे की सफलता में मदद करने वाले मित्र बनें और ड्रैगन और हाथी को मिलकर नृत्य करने दें।”

बर्फ पिघलने के संकेत: संदेश का संदर्भ

शी जिनपिंग का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ महीनों में दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच संबंधों में सुधार देखा गया है। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब बीजिंग से इतनी आत्मीय भाषा का प्रयोग किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे 2024 और 2025 की कुछ प्रमुख घटनाएं हैं:

  • अक्टूबर 2024: कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच 5 साल बाद पहली औपचारिक बातचीत हुई।

  • अगस्त 2025: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के दौरान दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के “उचित समाधान” पर सहमति जताई।

  • अक्टूबर 2025: पांच साल के निलंबन के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुईं।

वैश्विक समीकरण और ‘ट्रम्प फैक्टर’

बीजिंग के इस नरम रुख का एक बड़ा कारण वैश्विक राजनीति में बदलाव भी है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वापसी और उनकी कड़ी टैरिफ नीतियों ने चीन को अपने क्षेत्रीय संबंधों को स्थिर करने के लिए मजबूर किया है।

रणनीतिक मामलों के जानकार डॉ. अरुणा शर्मा कहती हैं, “बीजिंग अपनी दक्षिणी सीमा को शांत रखना चाहता है ताकि वह घरेलू सुधारों और अमेरिकी व्यापार युद्ध पर ध्यान केंद्रित कर सके। भारत के लिए भी स्थायी संकट के बजाय प्रबंधित प्रतिस्पर्धा एक बेहतर विकल्प है।”

शक्ति प्रदर्शन और कूटनीति का संगम

एक तरफ जहां चीन का संदेश शांति की बात कर रहा था, वहीं दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भारत ने अपनी स्वदेशी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। परेड में S-400 मिसाइल प्रणाली और “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़े आधुनिक हथियारों को दिखाया गया।

इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेता—यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन—मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने स्पष्ट किया कि भारत पश्चिम के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए चीन के साथ “सामान्यीकरण” की राह तलाश रहा है।

2026 और ब्रिक्स की अध्यक्षता

2026 में भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता दोनों देशों को सहयोग का एक और अवसर प्रदान करेगी। राष्ट्रपति शी ने अपने संदेश में कहा कि संबंधों में सुधार “विश्व शांति और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण” है।

हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय अभी भी “सतर्क और आशावादी” है। हालांकि सीधी उड़ानें शुरू हो गई हैं और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों की भारी तैनाती अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

देवाशीष पेशे से इंजीनियर हैं और वर्ष 2017 से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें 2017 से पत्रकारिता में निरंतर अनुभव प्राप्त है, जिसके आधार पर उन्होंने डिजिटल और समाचार जगत में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। उन्हें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विषयों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टि के लिए जाना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), संसद, केंद्र सरकार और नीति-निर्माण से जुड़े मामलों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। उनकी मुख्य रुचि और विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय समाचारों, प्रबंधन, व्यापार (बिज़नेस) और खेल जगत की कवरेज में रही है। इसके साथ ही वे सीमित रूप से राजनीति और न्यूज़ प्लेसमेंट से जुड़े विषयों को भी कवर करते हैं। Samachar Today में देवाशीष का फोकस वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक गतिविधियों, खेल समाचारों और रणनीतिक विषयों पर निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और संतुलित रिपोर्टिंग प्रदान करना है।

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