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बाजार में गिरावट: रिलायंस की लोटस चॉकलेट का मुनाफा 97% गिरा

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SamacharToday.co.in - बाजार में गिरावट रिलायंस की लोटस चॉकलेट का मुनाफा 97% गिरा - Image Credited by the Economic Times

भारतीय अर्थव्यवस्था का गौरव माना जाने वाला 250 अरब डॉलर का सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र एक कठिन वित्तीय चुनौती का सामना कर रहा है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज (Jefferies) की एक तीखी क्षेत्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत के चार नए श्रम संहिताओं (labour codes) के आगामी कार्यान्वयन से उद्योग के त्रैमासिक लाभ का पांचवां हिस्सा खत्म हो सकता है। यह चेतावनी उस उद्योग के लिए खतरे की घंटी है जो पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विघटनकारी ताकतों और सुस्त वैश्विक खर्च के माहौल से जूझ रहा है।

नवंबर 2025 में 29 पुराने श्रम कानूनों का चार सरलीकृत संहिताओं में विलय प्रभावी होने के साथ ही, आईटी क्षेत्र के वेतन ढांचे (compensation structure) में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। जेफ़रीज का अनुमान है कि वैधानिक देनदारियों (statutory liabilities) में भारी एकमुश्त उछाल के कारण दिसंबर-तिमाही (Q3 FY26) के मुनाफे में 10% से 20% तक की गिरावट आ सकती है।

मार्जिन पर दबाव का गणित

इस मुद्दे की जड़ नए वेतन कोड (New Wage Code) में “मजदूरी” (wages) की परिभाषा में छिपी है। वर्तमान में, कई आईटी कंपनियां ‘बेसिक सैलरी’ को कम (CTC का लगभग 30%–40%) रखकर और बाकी हिस्सा विभिन्न भत्तों के माध्यम से देकर वेतन ढांचा तैयार करती हैं। नई व्यवस्था के तहत, “मजदूरी” कुल CTC का कम से कम 50% होनी चाहिए।

चूँकि भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) जैसे वैधानिक लाभ “मजदूरी” के प्रतिशत के रूप में गिने जाते हैं, इसलिए 50% की यह न्यूनतम सीमा नियोक्ता (employer) के योगदान में भारी वृद्धि करेगी। जेफ़रीज का अनुमान है कि यह योगदान 27% से 70% तक बढ़ सकता है, जिससे कंपनियों को एक ही तिमाही में अपने पूरे कार्यबल के लिए उच्च देनदारियों को दर्ज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

जेफ़रीज ने कहा, “यह वृद्धि दिसंबर-25 के परिणामों में एकमुश्त प्रभाव के रूप में पहचानी जाएगी।” ब्रोकरेज ने चेतावनी दी कि अनुमानों के निचले स्तर पर भी, इस क्षेत्र की त्रैमासिक कमाई का 10%–20% हिस्सा खत्म हो जाएगा।

कर्मचारी लागत में संरचनात्मक बदलाव

बैलेंस शीट पर तत्काल झटके के अलावा, नए कोड ऐसे संरचनात्मक बदलाव ला रहे हैं जो वित्त वर्ष 2027 और उसके बाद भी मार्जिन पर दबाव बनाए रखेंगे:

  • अल्पकालिक कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी: वर्तमान पांच साल की पात्रता नियम के विपरीत, अब फिक्स्ड-टर्म (निश्चित अवधि) कर्मचारी केवल एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। आईटी में प्रोजेक्ट-आधारित नियुक्तियों को देखते हुए, यह पात्र लाभार्थियों की संख्या में बड़ी वृद्धि करेगा।

  • वार्षिक अवकाश नकदीकरण (Annual Leave Encashment): कंपनियों के लिए अब 30 दिनों से अधिक की किसी भी छुट्टी के वार्षिक नकदीकरण की अनुमति देना अनिवार्य होगा। यह पुरानी दीर्घकालिक देनदारी को बार-बार होने वाले नकदी प्रवाह (cash outflow) में बदल देता है।

  • हाथ में आने वाले वेतन (Take-Home Pay) में कमी: विरोधाभासी रूप से, जहाँ नियोक्ता की लागत बढ़ेगी, वहीं कर्मचारियों के हाथ में आने वाले वेतन में 4% से 6% की गिरावट देखी जा सकती है क्योंकि उनका व्यक्तिगत पीएफ योगदान (उच्च मजदूरी आधार पर गणना) भी बढ़ जाएगा।

जेफ़रीज ने एऑन (Aon) के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए नोट किया कि लगभग 66% आईटी कंपनियां इन नए मानदंडों के तहत अपनी कुल कर्मचारी लागत में सालाना 5% तक की वृद्धि की उम्मीद करती हैं।

विजेता और हारने वाले: असमान प्रभाव

इन परिवर्तनों का बोझ समान रूप से साझा नहीं किया जाएगा। जेफ़रीज का कहना है कि मजबूत मार्जिन प्रोफाइल और बेहतर लागत संरचना वाली कंपनियां इस संकट का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगी।

मजबूत शेयर (कम प्रभाव) संवेदनशील शेयर (अधिक प्रभाव)
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कोफोर्ज (Coforge)
इन्फोसिस (Infosys) एलटीआईमाइंडट्री (LTIMindtree)
आईकेएस हेल्थ (IKS Health) टेक महिंद्रा (Tech Mahindra)

जेफ़रीज ने आगे कहा, “श्रम-कोड का प्रभाव धीमी राजस्व वृद्धि और AI द्वारा संचालित बिजनेस मिक्स में बदलाव के कारण पहले से बढ़ रही मार्जिन की चिंताओं को और बढ़ा देता है।” इसके अलावा, उद्योग को वित्त वर्ष 2027 में अमेरिकी H1-B वीजा नियमों में संभावित बदलावों से जुड़ी उच्च ऑनसाइट मजदूरी के जोखिम का भी सामना करना पड़ सकता है।

अब क्यों?

भारत सरकार ने 2019 और 2020 में चार श्रम कोड—मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा—पेश किए थे। इसका लक्ष्य देश के पुराने श्रम कानूनों को आधुनिक बनाना, अनुपालन को सरल बनाना और गिग इकोनॉमी एवं फिक्स्ड-टर्म श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करना था। हालाँकि, कोविड-19 महामारी और विभिन्न हितधारकों के विरोध के कारण कार्यान्वयन कई बार टला।

नवंबर 2025 के रोलआउट को भारत की “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” रैंकिंग में सुधार करने के लिए एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि यह सेवा क्षेत्र के लिए अल्पावधि में “ईज ऑफ प्रॉफिटेबिलिटी” की चुनौती पेश करता है।

निवेश दृष्टिकोण: चयनात्मक आशावाद

मुनाफे के निराशाजनक पूर्वानुमान के बावजूद, जेफ़रीज “चयनात्मक रूप से तेजी” (selectively bullish) पर कायम है। ब्रोकरेज ने मूल्यांकन समर्थन और अर्निंग लचीलेपन का हवाला देते हुए लार्ज-कैप में इन्फोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। मिड-कैप क्षेत्र में, वह कोफोर्ज और एमफैसिस को पसंद करता है, जबकि बीपीओ क्षेत्र में सजिलिटी (Sagility) और आईकेएस उसके पसंदीदा शेयर हैं।

हालाँकि, व्यापक बाजार धारणा सतर्क बनी हुई है। रिपोर्ट के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.4% गिर गया, जिसमें एचसीएल टेक 2% नीचे रहा। जेफ़रीज ने निष्कर्ष निकाला कि इस क्षेत्र के लिए “प्राइस-टू-अर्निग (PE) रीरेटिंग की सीमित गुंजाइश है,” जो यह संकेत देता है कि आसमान छूते आईटी शेयरों के दौर पर कुछ समय के लिए विराम लग सकता है।

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। समाचार टुडे में अनूप कुमार की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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