Commodity Market
बुलियन बाउंस बैक: भारी गिरावट के बाद चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार
नई दिल्ली — वैश्विक कमोडिटी बाजार में नाटकीय घटनाक्रम के बीच, शुक्रवार, 13 फरवरी, 2026 को बुलियन (सोना-चांदी) बाजार में तेज “यू-टर्न” देखा गया। एक बेहद खराब सत्र के बाद, जिसमें चांदी की कीमतों में 10% की भारी गिरावट आई थी और सोना लगभग 4% टूट गया था, ‘बार्गेन हंटर्स’ (सस्ते भाव पर खरीदने वाले निवेशक) ने बाजार को संभालने के लिए मोर्चा संभाल लिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव ₹5,300 से अधिक उछला, जबकि सोने ने ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को फिर से हासिल कर लिया।
यह सुधार अत्यधिक अस्थिरता के समय आया है, जहाँ डिजिटल और भौतिक संपत्तियां भू-राजनीतिक वार्ताओं के जटिल जाल, अमेरिकी डॉलर की बदलती मजबूती और ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदों पर प्रतिक्रिया दे रही हैं।
सुधार का विश्लेषण (Anatomy of a Rebound)
पिछला सत्र कीमती धातुओं के लिए किसी “ब्लडबाथ” (भीषण गिरावट) से कम नहीं था। चांदी का मार्च वायदा ₹26,000 के भारी नुकसान के साथ ₹2,36,435 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। सोने ने भी इसी राह पर चलते हुए ₹6,000 से अधिक की गिरावट दर्ज की और ₹1,52,836 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
इस गिरावट का प्राथमिक कारण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का “दोहरा झटका” था। जनवरी की ‘नॉन-फार्म पेरोल’ रिपोर्ट में 1,30,000 नौकरियों की अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई, जो कि 50,000 के पूर्वानुमान से दोगुनी से भी अधिक थी। अमेरिकी श्रम बाजार की इस मजबूती ने अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) को तेजी से ऊपर धकेल दिया, जिससे मार्च में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना लगभग समाप्त हो गई।
हालांकि, शुक्रवार को “बार्गेन हंटिंग” की लहर आई। निवेशकों ने सोने के $5,000 से नीचे के स्तर और चांदी में 10% की गिरावट को एक आकर्षक ‘एंट्री पॉइंट’ के रूप में देखा और खरीदारी शुरू कर दी।
बाजार की ताजा स्थिति (13 फरवरी, 2026)
| संपत्ति | वर्तमान दर (MCX) | परिवर्तन (%) | कुल बदलाव |
| चांदी (5 मार्च) | ₹2,41,798 / किग्रा | +2.2% | +₹5,363 |
| सोना (अप्रैल) | ₹1,54,837 / 10 ग्राम | +1.3% | +₹2,001 |
भू-राजनीति और वैश्विक कारक
हालांकि अमेरिकी डॉलर तत्काल कीमतों को नियंत्रित करता है, लेकिन बाजार की मूल भावना महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक हलचलों से तय हो रही है। विश्लेषक चार प्रमुख विषयों की ओर इशारा करते हैं:
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अमेरिका-ईरान परमाणु कूटनीति: ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी की मध्यस्थता में मस्कट में हुई परोक्ष वार्ता को “अच्छी शुरुआत” बताया गया है। हालांकि, अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि अमेरिकी प्रशासन ने समझौता न होने की स्थिति में “कठोर परिणाम” भुगतने की अपनी बात दोहराई है।
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रूस-यूक्रेन फ्रेमवर्क: यूक्रेन शांति समझौते से जुड़ी प्रस्तावित अमेरिका-रूस आर्थिक साझेदारी की खबरों ने कमोडिटी ट्रेडर्स को सतर्क कर दिया है। व्यापार के सामान्य होने से प्राकृतिक संसाधनों और सुरक्षित संपत्तियों (Safe-haven assets) की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
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“ट्रंप प्रभाव”: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया में “सबसे कम ब्याज दरों” की मांग और अमेरिकी ट्रेजरी की मजबूत डॉलर के प्रति प्रतिबद्धता के बीच मुद्रा बाजारों में खींचतान जारी है।
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लूनर न्यू ईयर (चीनी नव वर्ष): चीन की मौसमी मांग एक प्रमुख सहायक कारक बनी हुई है, क्योंकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित निधि को डॉलर से हटाकर विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञ विश्लेषण: “गिरावट पर खरीदें” बनाम “देखो और प्रतीक्षा करो”
सुधार के बावजूद, बाजार के दिग्गज सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। पृथ्वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन का कहना है कि बुलियन बाजार “उच्च-अस्थिरता चक्र” के बीच में है।
“बुलियन मार्केट कई वैश्विक ट्रिगर्स के कारण तेज उतार-चढ़ाव देख रहा है। हालांकि हम MCX गोल्ड के लिए ₹1,50,000 और सिल्वर के लिए ₹2,28,800 पर तत्काल सपोर्ट देख रहे हैं, लेकिन निवेशकों को आगामी सीपीआई (CPI) आंकड़ों के बाद अस्थिरता कम होने तक नई आक्रामक पोजीशन लेने से बचना चाहिए,” जैन ने कहा।
इसी तरह, आनंद राठी के नवीन माथुर का सुझाव है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोने के दीर्घकालिक बुनियादी तत्व मजबूत बने हुए हैं, लेकिन चांदी को अपने औद्योगिक चक्रों के प्रति अधिक संवेदनशीलता के कारण कुछ दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
प्रमुख शहरों में खुदरा कीमतें
भौतिक आभूषण या सिक्के खरीदने वालों के लिए, खुदरा दरें एक स्थिर लेकिन ऊंचे बाजार को दर्शाती हैं:
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दिल्ली: 24K सोना ₹1,26,832 / 8 ग्राम; 22K सोना ₹1,16,272 / 8 ग्राम।
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मुंबई: 24K सोना ₹1,26,712 / 8 ग्राम; 22K सोना ₹1,16,152 / 8 ग्राम।
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चेन्नई: 24K सोना ₹1,27,416 / 8 ग्राम; 22K सोना ₹1,16,792 / 8 ग्राम।
2026 की तेजी (Bull Run)
वर्तमान अस्थिरता को समझने के लिए 2025-26 के व्यापक संदर्भ को देखना आवश्यक है। सोने की कीमतें $2,800/औंस से बढ़कर 2026 की शुरुआत में $5,500/औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू चुकी हैं। यह तेजी रिकॉर्ड ईटीएफ (ETF) निवेश और केंद्रीय बैंकों (मुख्य रूप से चीन और भारत) द्वारा प्रति तिमाही लगभग 585 टन सोना जमा करने के कारण आई थी। वर्तमान सुधार को कई लोग एक मजबूत बाजार में “स्वस्थ विश्राम” (healthy breather) के रूप में देख रहे हैं।
आगे की राह
निवेशक अब अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। यदि महंगाई 2.5% से नीचे आती है, तो यह ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है, जिससे सोना और चांदी और ऊपर जा सकते हैं। भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए, इन उतार-चढ़ाव वाले समय में गोल्ड ईटीएफ में ‘सिप’ (SIP) दृष्टिकोण अपनाना सबसे समझदारी भरा रास्ता बना हुआ है।
