Business
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: मध्य पूर्व में तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले 93.94 तक गिरा
मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकालने के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
रुपये में गिरावट और मुख्य कारण
सोमवार को बाजार खुलते ही रुपये में 41 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछला रिकॉर्ड निचला स्तर शुक्रवार को 93.7350 था, जिसे पार करते हुए रुपया अब 94 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। पिछले चार हफ्तों में, जब से खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू हुआ है, भारतीय मुद्रा में लगभग 3% की गिरावट आई है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, केवल भारतीय रुपया ही नहीं, बल्कि अन्य एशियाई मुद्राओं में भी 0.1% से 0.8% तक की गिरावट देखी गई है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे वे डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
तेल की कीमतों का दबाव और आईईए की चेतावनी
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर रुपये पर पड़ता है। इस महीने कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक का उछाल आया है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने मौजूदा स्थिति को 1970 के दशक के तेल संकट से भी अधिक गंभीर बताया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका ने ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का डर पैदा कर दिया है, जिससे आयात बिल बढ़ गया है।
शेयर बाजार में गिरावट और विदेशी निवेश की निकासी
मुद्रा बाजार के साथ-साथ शेयर बाजार (दलाल स्ट्रीट) में भी भारी गिरावट देखी गई:
-
निफ्टी 50: 416 अंक (1.80%) गिरकर 22,698.55 पर आ गया।
-
सेंसेक्स: 1,365 अंकों (1.83%) की गिरावट के साथ 73,168.18 पर कारोबार करता दिखा।
बाजार में इस गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही बिकवाली है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।
निष्कर्ष और भविष्य का अनुमान
बोफा (BofA) ग्लोबल रिसर्च ने रुपये के अनुमानित स्तर को संशोधित किया है। पहले जून 2026 तक रुपये के 89 पर रहने का अनुमान था, जिसे अब बढ़ाकर 94 कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द ही शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में रुपया और भी कमजोर हो सकता है। फिलहाल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कार्रवाई और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
