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96 साल बाद बंद होगा ऐतिहासिक अन्नपूर्णा भंडार

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SamacharTOday.co.in - 96 साल बाद बंद होगा ऐतिहासिक अन्नपूर्णा भंडार - Image Credited by Times NOW

पुरानी दिल्ली के पाक इतिहास का एक सुनहरा अध्याय समाप्त होने जा रहा है। चांदनी चौक में पिछले 96 वर्षों से अपनी मिठास बिखेर रहा प्रसिद्ध ‘अन्नपूर्णा भंडार’ 31 दिसंबर, 2025 को अंतिम बार बंद हो जाएगा। यह उस प्रतिष्ठित संस्थान का अंत है, जिसने जवाहरलाल नेहरू से लेकर 1983 की विश्व कप विजेता क्रिकेट टीम तक, देश की महान हस्तियों को अपनी मिठाइयों का स्वाद चखाया।

1929 में ब्रिटिश रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी एम.एम. मुखर्जी द्वारा स्थापित यह दुकान एक ऐतिहासिक बदलाव की उपज थी। 1911 में जब राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित हुई, तो मुखर्जी भी यहाँ आ गए। उन्होंने उत्तर भारतीय मिठाइयों के बीच ताजे ‘छेना’ और हल्की चाशनी वाली बंगाली मिठाइयों को पहचान दिलाई।

पिछले 60 वर्षों से, इस दुकान की कमान संस्थापक के पोते, 81 वर्षीय मिहिर मुखर्जी के हाथों में है। उनकी देखरेख में शुद्धता का कड़ा मानक बना रहा। मुखर्जी कहते हैं, “यहाँ सब कुछ हर दिन ताजा बनाया जाता था। कुछ भी स्टोर करके नहीं रखा जाता था।” उन्होंने बताया कि बंगाली मिठाइयों की शेल्फ लाइफ महज 30 घंटे होती है, इसलिए ताजगी ही उनकी पहचान थी।

अन्नपूर्णा भंडार का सबसे यादगार पल 1983 में हैदराबाद हाउस में आयोजित स्वागत समारोह था। भारत की ऐतिहासिक क्रिकेट जीत के बाद, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विशेष रूप से कपिल देव और उनकी टीम के लिए गुलाबी रसगुल्ला, चमचम और संदेश तैयार करने का जिम्मा इसी दुकान को सौंपा था।

दुकान बंद करने का निर्णय मकान मालिक के साथ चल रहे तीन साल के कानूनी विवाद और किराए में भारी वृद्धि के कारण लिया गया है। साथ ही, नई पीढ़ी इस श्रम-साध्य व्यवसाय को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं ले रही है। इसके बंद होने के साथ ही दिल्ली न केवल एक दुकान, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और यादों का एक हिस्सा भी खो देगी।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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