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एआई दिग्गज अलेक्जेंड्र वांग का बड़ा फैसला: न्यूरालिंक के बाद ही बनेंगे पिता

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SamacharToday.co.in - एआई दिग्गज अलेक्जेंड्र वांग का बड़ा फैसला न्यूरालिंक के बाद ही बनेंगे पिता - Image Credited by The Financial Express

तकनीकी जगत और बाल विकास हलकों में हलचल पैदा करने वाले एक कदम के तहत, मेटा (Meta) के 28 वर्षीय मुख्य एआई अधिकारी अलेक्जेंड्र वांग ने घोषणा की है कि वह पिता बनने के निर्णय को तब तक टालेंगे जब तक कि ‘न्यूरालिंक’ (Neuralink) जैसी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो जाती। अक्सर दुनिया के सबसे कम उम्र के स्व-निर्मित अरबपति और मेटा के “सुपरइंटेलिजेंस लैब्स” के सूत्रधार के रूप में वर्णित, वांग का तर्क है कि कृत्रिम सुपरइंटेलिजेंस के प्रभुत्व वाले युग में प्रासंगिक बने रहने के लिए विकसित होते मानव मस्तिष्क में सीधे एआई को एकीकृत करना ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए एकमात्र रास्ता है।

हाल ही में द शॉन रयान शो में की गई यह घोषणा, बीसीआई (BCI) के क्लिनिकल अनुप्रयोगों—जो वर्तमान में लकवाग्रस्त रोगियों की गतिशीलता बहाल करने के लिए उपयोग किए जाते हैं—से हटकर बातचीत को स्वैच्छिक मानव संवर्धन (elective human enhancement) के एक उत्तेजक दृष्टिकोण की ओर ले जाती है।

न्यूरोप्लास्टिसिटी का दांव: प्रकाश की गति से सीखना

वांग का तर्क “न्यूरोप्लास्टिसिटी” (neuroplasticity) नामक एक जैविक घटना पर आधारित है—जो मस्तिष्क की खुद को पुनर्गठित करने की एक अनूठी क्षमता है, विशेष रूप से जीवन के पहले सात वर्षों के दौरान। वह बीसीआई एकीकरण की अवधि की तुलना दृष्टि विकास की महत्वपूर्ण अवधि से करते हैं।

वांग ने समझाया, “जीवन के पहले सात वर्षों में, आपका मस्तिष्क किसी भी अन्य समय की तुलना में कहीं अधिक न्यूरोप्लास्टिक होता है।” उन्होंने मोतियाबिंद के साथ पैदा हुए शिशुओं का उदाहरण दिया; यदि शुरुआती बचपन में मोतियाबिंद नहीं हटाया जाता है, तो मस्तिष्क कभी भी “देखना” नहीं सीख पाता क्योंकि विजुअल सिग्नल्स को प्रोसेस करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। “जब हमें न्यूरालिंक और ये अन्य तकनीकें मिलेंगी, तो जो बच्चे इनके साथ पैदा होंगे, वे इनका उपयोग अविश्वसनीय तरीकों से करना सीख जाएंगे। यह उनके मस्तिष्क का इस तरह से हिस्सा बन जाएगा जो किसी वयस्क के लिए कभी संभव नहीं होगा।”

मस्तिष्क को कंप्यूटर के साथ निर्बाध रूप से जोड़ने वाली तकनीक की प्रतीक्षा करके, वांग एक ऐसी पीढ़ी की कल्पना करते हैं जो केवल एआई का “उपयोग” नहीं करती, बल्कि इसके साथ सहजीवन (symbiosis) में रहती है, और मानव जैविक विकास की सीमाओं को पीछे छोड़ देती है।

कौन हैं अलेक्जेंड्र वांग? मेटा के एआई भविष्य के पीछे का चेहरा

वांग के बयान के महत्व को समझने के लिए, तकनीकी पारितंत्र में उनके प्रभाव को देखना होगा। चीनी अप्रवासी भौतिकविदों की संतान, वांग ने 19 साल की उम्र में एमआईटी (MIT) छोड़ दिया था ताकि वह ‘स्केल एआई’ (Scale AI) की सह-स्थापना कर सकें। यह कंपनी एनवीडिया, अमेज़न और अमेरिकी रक्षा विभाग जैसे दिग्गजों के लिए एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने हेतु आवश्यक उच्च गुणवत्ता वाला डेटा प्रदान करती है।

जून 2025 में, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने स्केल एआई में 49% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 14.3 बिलियन डॉलर का एक ऐतिहासिक सौदा किया और वांग को मेटा की नवगठित सुपरइंटेलिजेंस लैब्स (MSL) का नेतृत्व करने के लिए शामिल किया। वर्तमान में मेटा में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी के रूप में कार्यरत वांग को ‘आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस’ (AGI) प्राप्त करने के लिए कंपनी के अनुसंधान और बुनियादी ढांचे को एकीकृत करने का काम सौंपा गया है। “सुपरइंटेलिजेंस” में उनका विश्वास इतना गहरा है कि वह यांत्रिक सहायता के बिना जैविक मानव बुद्धि को मौलिक रूप से अप्रचलित मानते हैं।

न्यूरालिंक: चिकित्सा चमत्कार से संज्ञानात्मक अपग्रेड तक

जबकि वांग भविष्य की ओर देख रहे हैं, एलन मस्क की न्यूरालिंक वर्तमान में पहले से ही प्रगति कर रही है। 2026 की शुरुआत तक, कंपनी ने कई मानव रोगियों में सफलतापूर्वक चिप्स इम्प्लांट किए हैं। शुरुआत में “टेलीपैथी” (विचार द्वारा उपकरणों को नियंत्रित करना) और “ब्लाइंडसाइट” (दृष्टि बहाल करना) के रूप में ब्रांडेड इस तकनीक ने रीढ़ की हड्डी की चोट और एएलएस (ALS) से पीड़ित व्यक्तियों को टाइप करने, वीडियो गेम खेलने और यहां तक कि रोबोटिक अंगों को सटीकता से संचालित करने की अनुमति दी है।

मस्क ने लंबे समय से संकेत दिया है कि न्यूरालिंक का दीर्घकालिक लक्ष्य “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ सहजीवन” है ताकि मनुष्यों को पीछे छूटने से बचाया जा सके। वांग का रुख उनके जैसे कद के किसी व्यक्ति द्वारा इस दृष्टिकोण का पहला बड़ा समर्थन है, जो सुझाव देता है कि यह “अपग्रेड” मानव विकास के प्रारंभिक चरण में ही होना चाहिए।

विशेषज्ञों की चिंताएं: नैतिकता बनाम विकास

वैज्ञानिक समुदाय में हर कोई वांग के उत्साह को साझा नहीं करता है। नीतिशास्त्रियों और बाल रोग विशेषज्ञों ने बच्चे के मनोवैज्ञानिक और जैविक विकास पर गैर-चिकित्सीय तंत्रिका प्रत्यारोपण (neural implants) के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में चेतावनी दी है।

सामाजिक नीति विशेषज्ञ और शोधकर्ता डॉ. रीतिका खेड़ा ने इस तरह की तकनीकी निर्भरता के व्यापक निहितार्थों पर टिप्पणी की:

“एक बच्चे के मस्तिष्क को व्यावसायिक एआई इंटरफेस से जोड़ने का विचार एजेंसी और असमानता के बारे में गहरे नैतिक प्रश्न उठाता है। यदि संज्ञानात्मक वृद्धि ‘सफलता’ का नया मानक बन जाती है, तो हम उन लोगों के बीच एक स्थायी जैविक विभाजन पैदा करने का जोखिम उठाते हैं जो इन अपग्रेड्स को वहन कर सकते हैं और जो नहीं। हम जन्म से ही मानव मन के वस्तुकरण (commodification) की बात कर रहे हैं।”

मानवता के लिए एक नया मोर्चा

अलेक्जेंड्र वांग का निर्णय केवल एक व्यक्तिगत जीवनशैली विकल्प नहीं है; यह उस दार्शनिक दिशा का संकेत है जिसकी ओर सिलिकॉन वैली बढ़ रही है। जैसे-जैसे एआई “सुपरइंटेलिजेंट” स्तरों तक पहुँच रहा है, इंसान होने की परिभाषा—और हम अपने बच्चों को कैसे पालते हैं—को चुनौती दी जा रही है।

फिलहाल, वांग उस सुपरइंटेलिजेंस के निर्माण पर केंद्रित हैं जिसके बारे में उनका मानना है कि उनके भविष्य के बच्चों को जुड़ने की आवश्यकता होगी। दुनिया “एआई-नेटिव” मनुष्यों की पीढ़ी के लिए तैयार है या नहीं, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन यह बहस विज्ञान कथाओं से निकलकर अब पालने (nursery) तक पहुँच गई है।

देवाशीष एक समर्पित लेखक और पत्रकार हैं, जो समसामयिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से सीधा जुड़ाव बनाने वाली है। देवाशीष का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच फैलाने की जिम्मेदारी भी निभाती है। वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न केवल जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों को विचार और समाधान की दिशा में प्रेरित भी करते हैं। समाचार टुडे में देवाशीष की भूमिका: स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, पठन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक विमर्श।

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