Connect with us

International Relations

भारत-यूरोपीय संघ सौदे पर अमेरिका ने जताई कड़ी नाराजगी, रूस-तेल विवाद गहराया

Published

on

SamacharToday.co.in - भारत-यूरोपीय संघ सौदे पर अमेरिका ने जताई कड़ी नाराजगी, रूस-तेल विवाद गहराया - Image Credited by MSN

नई दिल्ली / वाशिंगटन — 2026 का भू-राजनीतिक परिदृश्य ट्रांस-अटलांटिक (अमेरिका और यूरोप) तनाव में तेज वृद्धि का गवाह बना है। भारत के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद संयुक्त राज्य सरकार ने यूरोपीय संघ की तीखी आलोचना की है। “सभी सौदों की जननी” (Mother of All Deals) कहे जाने वाले इस समझौते ने न केवल वैश्विक व्यापार को एक नया आकार दिया है, बल्कि इसने ट्रंप प्रशासन के क्रोध को भी भड़का दिया है। अमेरिका ने ब्रुसेल्स (यूरोपीय संघ मुख्यालय) पर यूक्रेन के मानवीय संकट के ऊपर वाणिज्य और व्यापार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को एक दो-टूक आकलन में यूरोपीय रुख को “बेहद निराशाजनक” बताया। यह टकराव यूरोप द्वारा वाशिंगटन के उस प्रस्ताव में शामिल होने से इनकार करने के कारण पैदा हुआ है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की निरंतर खरीद के लिए नई दिल्ली पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी।

“रूसी तेल” की पहेली

2022 में संघर्ष की शुरुआत के बाद से, भारत प्रतिबंधित रूसी तेल के एक प्रमुख खरीदार के रूप में उभरा है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी ने एक ऐसी “खामी” (लूपहोल) की ओर इशारा किया है जिसमें यूरोपीय देश भारत से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहे हैं, जिससे प्रभावी रूप से रूसी अर्थव्यवस्था को ही बल मिल रहा है।

बेसेंट ने टिप्पणी की, “अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। यूरोपीय लोग हमारे साथ शामिल होने के इच्छुक नहीं थे, और अब पता चला है कि वे यह व्यापारिक सौदा करना चाहते थे।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि हर बार जब यूरोपीय नेता यूक्रेनी लोगों के महत्व की बात करते हैं, तो उन्हें याद रखना चाहिए कि “वे व्यापार को यूक्रेनी लोगों से ऊपर रखते हैं।”

रणनीतिक मतभेद: वैश्वीकरण बनाम संरक्षणवाद

वाशिंगटन की यह आलोचना आर्थिक दर्शन में एक मौलिक अंतर को दर्शाती है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमिसन ग्रीर के अनुसार, जहाँ राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका घरेलू उत्पादन और “मार्केट एक्सेस फीस” की ओर मुड़ गया है, वहीं यूरोपीय संघ “वैश्वीकरण पर दांव” लगाता दिख रहा है।

फॉक्स बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में ग्रीर ने सुझाव दिया कि भारत इस सौदे का प्राथमिक लाभार्थी है। ग्रीर ने “मोबिलिटी पैक्ट” (गतिशीलता समझौता) का जिक्र करते हुए कहा, “स्पष्ट रूप से कहूँ तो मुझे लगता है कि इस सौदे में भारत शीर्ष पर है। उन्हें यूरोप में अधिक बाजार पहुंच और अतिरिक्त आव्रजन अधिकार मिले हैं,” जो यूरोपीय संघ के श्रम बाजार में भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाता है।

“यूरोपीय संघ व्यापार पर इतना निर्भर है कि यदि वे अपना सारा माल संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं भेज सकते, तो उन्हें अन्य विकल्पों की तलाश करनी होगी।” — जैमिसन ग्रीर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि।

“सभी सौदों की जननी”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा द्वारा नई दिल्ली में हस्ताक्षरित यह एफटीए (FTA) दो अरब लोगों का एक विशाल बाजार तैयार करता है। यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

समझौते के प्रमुख घटक:

  • टैरिफ में कटौती: यूरोपीय संघ भारतीय निर्यात के 99% हिस्से पर टैरिफ समाप्त कर देगा, जबकि भारत यूरोपीय संघ की 97% से अधिक वस्तुओं पर शुल्क में कटौती करेगा।

  • लाभान्वित क्षेत्र: भारतीय कपड़ा, चमड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्रों में उछाल आने की उम्मीद है, जबकि यूरोपीय ऑटोमोबाइल, वाइन और फार्मास्यूटिकल्स को भारतीय मध्यम वर्ग तक अभूतपूर्व पहुंच प्राप्त होगी।

  • गतिशीलता और रक्षा: रक्षा सहयोग बढ़ाने और भारतीय प्रतिभाओं के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए दो अलग-अलग समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

आगे की राह: भारत का कूटनीतिक संतुलन

भारत के लिए चुनौती यह है कि वह एक तरफ यूरोपीय संघ के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को गहरा करे, और दूसरी तरफ अमेरिका के साथ अपने सामरिक संबंधों को टूटने से बचाए। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की नाराजगी यह संकेत देती है कि आने वाले महीनों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापारिक वार्ता काफी कठिन होने वाली है।

देवाशीष पेशे से इंजीनियर हैं और वर्ष 2017 से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें 2017 से पत्रकारिता में निरंतर अनुभव प्राप्त है, जिसके आधार पर उन्होंने डिजिटल और समाचार जगत में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। उन्हें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विषयों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टि के लिए जाना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), संसद, केंद्र सरकार और नीति-निर्माण से जुड़े मामलों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। उनकी मुख्य रुचि और विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय समाचारों, प्रबंधन, व्यापार (बिज़नेस) और खेल जगत की कवरेज में रही है। इसके साथ ही वे सीमित रूप से राजनीति और न्यूज़ प्लेसमेंट से जुड़े विषयों को भी कवर करते हैं। Samachar Today में देवाशीष का फोकस वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक गतिविधियों, खेल समाचारों और रणनीतिक विषयों पर निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और संतुलित रिपोर्टिंग प्रदान करना है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2017-2026 SamacharToday.