वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। एसबीआई रिसर्च की प्री-मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अनुमान पहले की अपेक्षाओं से अधिक है और भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत सुधार के संकेत देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए पहले अपने विकास अनुमान में कमी की थी, लेकिन हाल के आर्थिक संकेतकों में सुधार के चलते अब वृद्धि की संभावनाएं पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं। अप्रैल से जून के दौरान कई प्रमुख आर्थिक सूचकांकों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिली है।
एसबीआई रिसर्च ने कहा कि पहली तिमाही के दौरान घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली। जून महीने में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 24.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं बिजली की मांग में 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यात में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया और इसमें 15.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा औद्योगिक ऋण (Industrial Credit) में 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जून में 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा। इन सभी संकेतकों से स्पष्ट होता है कि पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियां व्यापक स्तर पर मजबूत हुई हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताएं अभी भी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में सुधार ने वैश्विक चुनौतियों के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया है।
एसबीआई रिसर्च ने मानसून की स्थिति को भी आर्थिक वृद्धि के लिए सकारात्मक कारक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण देश में वर्षा की कमी घटकर लगभग 13 प्रतिशत रह गई है। साथ ही प्रमुख जलाशयों का जलस्तर सामान्य स्तर पर पहुंच गया है, जिससे कृषि गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में केवल 4.7 प्रतिशत कम रही है। यदि आने वाले सप्ताहों में मौसम अनुकूल बना रहता है, तो बेहतर फसल उत्पादन की संभावना बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण मांग में सुधार होगा और इसका सकारात्मक प्रभाव देश की समग्र आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ेगा।
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी, निर्यात में सुधार और बेहतर मानसून की संभावनाओं के कारण भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है, तो पूरे वित्त वर्ष में आर्थिक विकास को अतिरिक्त गति मिलने की संभावना है।
