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नोरा फतेही का नया गाना ‘अश्लीलता’ के कारण हटा

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SamacharToday.co.in - नोरा फतेही का नया गाना 'अश्लीलता' के कारण हटा - Image Credited by MSN

मुंबई – एक नाटकीय घटनाक्रम में, आगामी फिल्म केडी: द डेविल (KD: The Devil) में नोरा फतेही पर फिल्माया गया नवीनतम गाना भारी विरोध के बाद सार्वजनिक मंचों से हटा लिया गया है। “सरके चुनर तेरी सरके” (हिंदी) और “सरसे निन्ना सेरगा सरसे” (कन्नड़) शीर्षक वाले इस गाने को इसके रिलीज के कुछ ही घंटों के भीतर यूट्यूब पर ‘प्राइवेट’ कर दिया गया। गाने के बोल और इसकी कोरियोग्राफी को लेकर सोशल मीडिया पर मचे बवाल ने निर्माताओं को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

यह गाना, जिसे फिल्म के अखिल भारतीय प्रचार के लिए एक मुख्य आकर्षण माना जा रहा था, भारतीय सिनेमा में ‘वस्तुकरण’ (objectification) और सेंसरशिप पर एक नई बहस का केंद्र बन गया है।

आक्रोश का मुख्य कारण

1970 के दशक के एक ‘डांस बार’ की पृष्ठभूमि पर आधारित इस वीडियो में नोरा फतेही पुरुषों की भीड़ के बीच पारंपरिक घाघरा चोली में नृत्य करती नजर आती हैं। हालांकि नोरा अपने तकनीकी नृत्य कौशल के लिए जानी जाती हैं, लेकिन दर्शकों ने इसकी कोरियोग्राफी को “अनावश्यक रूप से अश्लील” बताया। रकीब आलम द्वारा लिखे गए बोलों को “द्विअर्थी” (double meaning) होने के कारण कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।

जैसे ही #BoycottKD ट्रेंड करने लगा, निर्देशक प्रेम और उनकी टीम ने वीडियो तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया। अब इस लिंक पर जाने वाले यूजर्स को “वीडियो अनुपलब्ध है” का संदेश दिखाई दे रहा है।

संस्थानों की कड़ी प्रतिक्रिया

यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने मुख्यधारा के मनोरंजन में ऐसी सामग्री के सामान्यीकरण पर सवाल उठाए।

कानूनगो ने कहा: “हमें यह पूछना चाहिए कि कौन अपने सभ्य परिवार के साथ बैठकर इसे देख सकता है? ‘मनोरंजन’ के नाम पर महिलाओं का इस तरह का वस्तुकरण सामाजिक चिंता का विषय है। हमने जनता की भावनाओं पर गौर किया है और हम निर्माताओं को नोटिस जारी करने की आवश्यकता का मूल्यांकन कर रहे हैं।”

सेंसरशिप पर बहस

इस घटना ने फिल्म जगत के भीतर भी सेंसरशिप के मानकों पर बहस छेड़ दी है। फिल्म निर्माता ओनिर ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए सेंसर बोर्ड की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां बोर्ड फिल्मों के नाम बदलने में व्यस्त है, वहीं ऐसी “बकवास” सामग्री को छूट दी जा रही है।

“सरके चुनर तेरी सरके” का अचानक गायब होना फिल्म निर्माताओं के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि आज के दर्शक ऐसी सामग्री के प्रति बेहद सतर्क हैं जिसे वे अपमानजनक मानते हैं। यह देखना बाकी है कि क्या फिल्म के निर्माता इस गाने का कोई संशोधित संस्करण फिर से जारी करेंगे या यह विवाद फिल्म की मुख्य कहानी पर हावी रहेगा।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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