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श्रीदेवी की विरासत सिनेमा को दिशा देती

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SamacharToday.co.in - श्रीदेवी की विरासत सिनेमा को दिशा देती - Image Credited by jAGRAN

भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी की विरासत आज भी उतनी ही मजबूत है, जितनी उनके जीवनकाल में थी। 2018 में उनके अचानक निधन के बाद भी उनकी लोकप्रियता और प्रभाव में कोई कमी नहीं आई है।

श्रीदेवी ने मात्र 4 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सहित लगभग 300 फिल्मों में काम किया। उनकी अभिनय क्षमता ने उन्हें क्षेत्रीय सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक एक अलग पहचान दिलाई। 1980 के दशक में उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उस समय जब फिल्म इंडस्ट्री पुरुष अभिनेताओं के इर्द-गिर्द घूमती थी, श्रीदेवी ने अपने दम पर फिल्में हिट कराईं। इसी वजह से उन्हें बॉलीवुड की पहली “फीमेल सुपरस्टार” कहा गया।

उनकी प्रमुख फिल्मों में हिम्मतवाला, मिस्टर इंडिया, चांदनी और सदमा शामिल हैं। सदमा में उनका अभिनय आज भी सबसे बेहतरीन प्रदर्शन में गिना जाता है। वहीं मिस्टर इंडिया में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया। लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने 2012 में इंग्लिश विंग्लिश से शानदार वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने एक आम गृहिणी के किरदार को इतनी संवेदनशीलता से निभाया कि यह दर्शकों के दिलों को छू गया।

सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

24 फरवरी 2018 को दुबई के एक होटल में उनका निधन हो गया था। फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौत बाथटब में दुर्घटनावश डूबने के कारण हुई थी। इस घटना के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर काफी विवाद हुआ था। पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा था, “श्रीदेवी की मौत की कवरेज भारतीय टीवी पत्रकारिता के लिए एक निचला स्तर थी।” कई चैनलों द्वारा दिखाए गए ग्राफिक्स और अनुमानित रिपोर्टिंग की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हुई थी।

हाल के वर्षों में उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा होती रही है। कुछ रिपोर्ट्स में उनकी सुंदरता बनाए रखने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी की बात कही गई, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उनके पति बोनी कपूर ने साफ किया है कि श्रीदेवी पर कोई बायोपिक नहीं बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे उनकी यादों को गरिमा के साथ संजोकर रखना चाहते हैं। आर्थिक रूप से भी श्रीदेवी काफी सफल थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 247 करोड़ रुपये थी।

आज भी उनकी विरासत उनके परिवार और फिल्मों के माध्यम से जीवित है। फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा ने कहा, “श्रीदेवी सिर्फ एक स्टार नहीं थीं, बल्कि एक युग थीं।” 2026 में भी श्रीदेवी का प्रभाव भारतीय सिनेमा पर साफ दिखाई देता है। उनका जीवन और करियर यह साबित करता है कि प्रतिभा और समर्पण से कोई भी कलाकार अमर हो सकता है।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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