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प्रेम चोपड़ा का साक्षात्कार: सिनेमा, विरासत और स्वास्थ्य पर चर्चा

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SamacharToday.co.in - प्रेम चोपड़ा का साक्षात्कार सिनेमा, विरासत और स्वास्थ्य पर चर्चा - Image Credited by News India Times

महान अनुभवी अभिनेता प्रेम चोपड़ा, जिनका नाम कभी पर्दे पर आतंक और प्रतिष्ठित संवादों का पर्याय था, ने इस सप्ताह अपने जीवन और भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य पर एक दुर्लभ और मार्मिक झलक पेश की। मुंबई में कार्यक्रमों की एक श्रृंखला में बोलते हुए, 90 वर्षीय अभिनेता ने अपने हृदय के गंभीर ऑपरेशन के बाद सुधार से लेकर आधुनिक फिल्म निर्माण की बेबाक आलोचना तक, हर विषय पर चर्चा की।

चोपड़ा, जो 2025 के अंत में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बाद हाल ही में फिर से सुर्खियों में आए हैं, हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर और आज के चकाचौंध भरे युग के बीच की कुछ जीवित कड़ियों में से एक हैं।

‘धुरंधर’ की आलोचना और आधुनिक हिंसा

15 अप्रैल, 2026 को चोपड़ा ने हालिया बॉक्स-ऑफिस सनसनी ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) पर अपने विचार साझा किए। आदित्य धर द्वारा निर्देशित और रणवीर सिंह व अक्षय खन्ना अभिनीत इस जासूसी-थ्रिलर के उच्च निर्माण मानकों की उन्होंने सराहना की, लेकिन आधुनिक कहानियों की दिशा पर एक महत्वपूर्ण चिंता भी जताई।

“यह अच्छी थी, लेकिन बहुत लंबी थी,” चोपड़ा ने प्रेस के साथ बातचीत के दौरान कहा। उन्होंने भावनात्मक कहानी कहने के बजाय “हिंसक दृश्यों” की ओर बढ़ते झुकाव की ओर इशारा किया।

“मैं गाली-गलौज और ऐसी चीजों को कम रखने का सुझाव देता। सिनेमा विकसित हो रहा है और दर्शक बड़े पैमाने पर थिएटर में लौटे हैं, लेकिन हिंसा के शोर में कहानी की आत्मा नहीं खोनी चाहिए।” — प्रेम चोपड़ा

उन्होंने रणवीर सिंह की प्रशंसा की और उनके शुरुआती दिनों को याद किया जब वे एक स्थानीय क्लब में “ब्रेक पाने की कोशिश” कर रहे थे। चोपड़ा ने सिंह के विकास पर आश्चर्य व्यक्त किया, लेकिन नोट किया कि ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना की भूमिका जनता (गैलरी) को अधिक पसंद आई।

स्वास्थ्य का सफर: हृदय की रिकवरी और एक सुपरस्टार का व्यवहार

पिछले एक साल के उनके मेडिकल इतिहास को देखते हुए अभिनेता की हालिया सार्वजनिक उपस्थिति उत्साहजनक है। 2025 के अंत में, चोपड़ा को ‘एओर्टिक स्टेनोसिस’ (Aortic Stenosis) का पता चला था, जो हृदय के वाल्व को सिकोड़ देता है।

उनके दामाद, अभिनेता शर्मन जोशी ने पुष्टि की कि चोपड़ा की TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) प्रक्रिया सफल रही। यह एक न्यूनतम आक्रामक (minimally invasive) प्रक्रिया है जिसमें बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के कैथेटर के जरिए नया वाल्व डाला जाता है। अब उनकी स्थिति स्थिर है।

सुधार की इस कहानी में गर्मजोशी जोड़ते हुए, चोपड़ा ने अपने पुराने सह-कलाकार और मित्र अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक मार्मिक किस्सा साझा किया। “जब से मैं बीमार हुआ हूँ, हर सुबह उनका एक संदेश आता है: ‘जल्द स्वस्थ हो जाओ, प्रेम। तुम्हारे लिए प्रार्थनाएँ’।” उन्होंने मजाक में कहा कि बच्चन को यह बताने के बाद भी कि वे ठीक हो गए हैं, सुपरस्टार व्हाट्सएप पर रोजाना हाल-चाल लेना जारी रखते हैं।

विरासत: “पत्नियों को छिपाने” से लेकर कपूरों की चार पीढ़ियों तक

अपने छह दशक के करियर को याद करते हुए, चोपड़ा ने खलनायक की भूमिका निभाने के दोधारी तलवार होने पर बात की। 70 और 80 के दशक के दौरान उनका ऑन-स्क्रीन व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि इसका असर उनके निजी जीवन पर भी पड़ता था।

“जब लोग मुझे देखते थे, तो वे अपनी पत्नियों को छिपा लेते थे,” उन्होंने हंसते हुए याद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि वे अक्सर पारिवारिक शादियों में जाने से बचते थे क्योंकि मेहमान उनसे सचमुच डरते थे। उनके पिता को अक्सर अजनबियों को यह समझाना पड़ता था कि उनका बेटा कैमरे के पीछे एक “साधारण और नेक दिल इंसान” है।

चोपड़ा ने कपूर परिवार के साथ अपने अनोखे संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने राज कपूर से लेकर रणबीर कपूर (जिनके साथ उन्होंने ‘एनिमल’ में काम किया) तक, कपूर खानदान की चार पीढ़ियों के साथ काम किया है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अब मैं रणबीर की बेटी राहा के साथ काम करने को उत्सुक हूँ।”

शुरुआत को श्रद्धांजलि

14 अप्रैल, 2026 को चोपड़ा ने ‘फोर बंगला गुरुद्वारा’ के संस्थापक सरदार सिंह सूरी की सातवीं पुण्यतिथि में भाग लिया। एक भावुक श्रद्धांजलि में, चोपड़ा ने सूरी को पंजाबी फिल्म ‘एह धरती पंजाब दी’ में नायक के रूप में अपना पहला ब्रेक देने का श्रेय दिया।

अपने दौर के बदलाव को याद करते हुए, उन्होंने अमिताभ बच्चन के उदय के दौरान राजेश खन्ना के “खामोश दर्द” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “जिसने बेमिसाल स्टारडम का आनंद लिया हो, उसके लिए अचानक बदली हुई स्थिति को स्वीकार करना बेहद कठिन होता है।”

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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