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मलयालम अभिनेता संतोष के. नायर का सड़क हादसे में निधन

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मलयालम अभिनेता संतोष के. नायर का सड़क हादसे में निधन - Samachartoday.co.in

भारतीय फिल्म जगत, विशेष रूप से मलयालम सिनेमा के लिए आज की सुबह एक अत्यंत दुखद खबर लेकर आई। मलयालम फिल्मों के दिग्गज अभिनेता संतोष के. नायर (65) का सोमवार को एक भीषण सड़क हादसे के बाद निधन हो गया। चार दशकों से अधिक लंबे करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले संतोष नायर अब हमारे बीच नहीं रहे।

पथानामथिट्टा जिले में हुए इस हादसे ने न केवल उनके परिवार को बल्कि उन लाखों प्रशंसकों को भी झकझोर कर रख दिया है, जिन्होंने उन्हें पर्दे पर विभिन्न भूमिकाओं में जीवंत होते देखा था।

हादसा: सुबह की शांति में छिपी त्रासदी

यह हृदयविदारक घटना 5 मई 2026 की सुबह करीब 6:30 बजे हुई। संतोष के. नायर अपनी पत्नी राजलक्ष्मी (जिन्हें कुछ रिपोर्टों में शुभश्री भी कहा गया है) के साथ अपनी कार में सफर कर रहे थे। वे केरल के पथानामथिट्टा जिले में एनाथु के पास प्रसिद्ध एमसी रोड (Main Central Road) से गुजर रहे थे।

पुलिस के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एनाथु के पास उनकी कार अचानक अनियंत्रित हो गई और विपरीत दिशा से आ रहे एक पार्सल ट्रक से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और दंपत्ति को कार से बाहर निकाला।

उन्हें तुरंत अडूर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन अस्पताल में उपचार के दौरान ही संतोष नायर को दिल का दौरा (Cardiac Arrest) पड़ा। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी पत्नी राजलक्ष्मी को गंभीर चोटें आई हैं और वे फिलहाल आईसीयू में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। ट्रक चालक सुधीश को भी मामूली चोटें आई हैं।

1982 से 2026: एक बेमिसाल फिल्मी सफर

संतोष के. नायर ने मलयालम सिनेमा में उस समय कदम रखा था जब यह फिल्म उद्योग अपने ‘स्वर्ण युग’ की ओर बढ़ रहा था। उन्होंने 1982 में फिल्म ‘इतु न्जांगलूड कथा’ (यह हमारी कहानी है) से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी।

80 और 90 के दशक में, जब ममूटी और मोहनलाल जैसे सुपरस्टार अपनी पहचान बना रहे थे, संतोष नायर ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा के दम पर अपनी एक अलग जगह बनाई। उन्होंने नायक, खलनायक, और चरित्र अभिनेता—हर भूमिका को पूरी शिद्दत से निभाया।

प्रतिभा के विविध आयाम

संतोष नायर को उनकी विविधता के लिए जाना जाता था। वे किसी एक छवि में बंधकर नहीं रहे:

  • खलनायक के रूप में: कई फिल्मों में उन्होंने ऐसे नकारात्मक किरदार निभाए जिन्हें देखकर दर्शक वाकई उनसे नफरत करने लगते थे।

  • हास्य भूमिकाएं: उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी। वे गंभीर से गंभीर फिल्म में भी सहज हास्य पैदा करने में माहिर थे।

  • चरित्र अभिनेता: अपने करियर के उत्तरार्ध में उन्होंने पिता, पुलिस अधिकारी और मार्गदर्शक की भूमिकाओं में अपनी एक गंभीर और सुलझी हुई छवि पेश की।

सिनेमा जगत के एक विशेषज्ञ ने उनके बारे में कहा, “संतोष के. नायर एक ‘डायरेक्टर्स एक्टर’ थे। उन्हें किसी फिल्म को सफल बनाने के लिए सुपरस्टार की चमक की जरूरत नहीं थी; वे उस नींव की तरह थे जिस पर फिल्म की कहानी टिकी होती थी।”

आखिरी फिल्म: ‘मोहिनीअट्टम’ और एक अधूरा संयोग

यह बेहद भावुक कर देने वाला संयोग है कि संतोष के. नायर की आखिरी फिल्म ‘मोहिनीअट्टम’ (जिसे भरतनाट्यम 2 भी कहा जा रहा है) इस समय सिनेमाघरों में चल रही है। दर्शक आज भी उन्हें बड़े पर्दे पर देख रहे हैं, लेकिन हकीकत में वे अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। यह फिल्म अब उनकी अंतिम विरासत के रूप में याद रखी जाएगी।

एम.जी. कॉलेज और मोहनलाल के साथ रिश्ता

मूल रूप से तिरुवनंतपुरम के रहने वाले संतोष नायर की शिक्षा शहर के प्रतिष्ठित महात्मा गांधी (MG) कॉलेज से हुई थी। यह कॉलेज मलयालम फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियों की नर्सरी रहा है। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि संतोष नायर कॉलेज के दिनों में मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल के जूनियर थे। उन्होंने अपने करियर में मोहनलाल के साथ कई फिल्मों में काम किया और दोनों के बीच कॉलेज के दिनों से शुरू हुआ यह रिश्ता हमेशा बना रहा। वे अक्सर अपनी पुरानी यादें फिल्म के सेट पर साझा किया करते थे।

फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर

संतोष नायर के निधन की खबर मिलते ही दक्षिण भारतीय फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। ‘एएमएमए’ (Association of Malayalam Movie Artists) ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

सुपरस्टार मोहनलाल ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, “संतोष के जाने की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। कॉलेज के दिनों से ही हमारा एक खास जुड़ाव था। वे एक अत्यंत मेहनती कलाकार और एक बेहतरीन इंसान थे। मेरी प्रार्थनाएं उनके परिवार के साथ हैं और मैं उनकी पत्नी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”

सोशल मीडिया पर पृथ्वीराज सुकुमारन, ममूटी और अन्य कलाकारों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। प्रशंसकों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि वह कलाकार जो कुछ दिनों पहले तक पर्दे पर हंसता-खिलखिलाता दिख रहा था, वह अब शांत हो गया है।

अंतिम विदाई

अभिनेता के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के बाद उनके पैतृक निवास तिरुवनंतपुरम ले जाया जाएगा। वहां फिल्म जगत की हस्तियां और उनके चाहने वाले अंतिम दर्शन कर सकेंगे। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है, क्योंकि उन्होंने चार दशकों तक केरल की कला और संस्कृति की सेवा की है।

एक नज़र में: संतोष के. नायर (1961–2026)

विवरण जानकारी
उम्र 65 वर्ष
जन्म स्थान तिरुवनंतपुरम, केरल
पहली फिल्म इतु न्जांगलूड कथा (1982)
कुल फिल्में 100 से अधिक
निधन का कारण सड़क हादसे के बाद हार्ट अटैक
अंतिम फिल्म मोहिनीअट्टम (2026)
शिक्षा एम.जी. कॉलेज, तिरुवनंतपुरम

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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