अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर मिसाइल हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। दोनों देशों द्वारा ताजा हमले किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। कुछ समय की शांति के बाद शुरू हुई इस नई सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इस टकराव में अन्य देशों के भी शामिल होने का खतरा बढ़ सकता है।
ताजा घटनाक्रम के बीच जॉर्डन ने बताया कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान की ओर से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं कुवैत ने जानकारी दी कि देश के उत्तरी हिस्से में एक चीनी कंपनी की इमारत पर ईरानी हमले का असर हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और भवन को भारी नुकसान पहुंचा।
इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में मिस्र के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमलों के कारण जहाजों में आग लग गई थी। वहीं सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों की ओर से उसके खिलाफ हमले किए गए हैं। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
मौजूदा तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की। यह हमला जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पहले हुए ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े कई सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन सुविधाओं के साथ-साथ तटीय निगरानी एवं रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि क़ेश्म द्वीप पर हुए एक हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
ताजा मिसाइल हमलों से एक दिन पहले भी अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ समन्वय कर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर कार्रवाई की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में कम से कम 20 लड़ाके और ईरान के छह सैन्य सलाहकार मारे गए। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया।
लगातार हो रहे हमलों ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर करीब से नजर रखे हुए है और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि निकट भविष्य में तनाव कम होने की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है और क्षेत्रीय स्थिरता के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
