विश्व प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन में निधन हो गया। वह 43 वर्ष के थे। अपनी असाधारण पर्वतारोहण उपलब्धियों और रिकॉर्ड समय में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने के कारण निर्मल पुर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद लोकप्रिय थे।
जानकारी के अनुसार, निर्मल पुर्जा 10 सदस्यीय पर्वतारोहण दल के साथ ब्रॉड पीक की चोटी पर पहुंचने के अभियान में शामिल थे। अभियान के दौरान पिछले गुरुवार को अचानक हिमस्खलन आने से पूरी टीम इसकी चपेट में आ गई। हादसे के बाद बड़े स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया गया।
निर्मल पुर्जा के निधन की पुष्टि अभियान का संचालन करने वाली कंपनी एलीट एक्सपेड (Elite Exped) ने की। कंपनी ने बताया कि दुर्घटना के बाद पर्वतारोहियों की तलाश जारी रही और अंततः उनके निधन की पुष्टि की गई।
पाकिस्तानी पर्वतारोहण अधिकारियों के अनुसार, पर्वत से चार शव बरामद किए गए हैं। बचाव दल ने कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच राहत एवं खोज अभियान चलाया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरती गई।
निर्मल पुर्जा को आधुनिक दौर के सबसे सफल और प्रेरणादायक पर्वतारोहियों में गिना जाता था। उन्होंने दुनिया की सभी 14 आठ-हजार मीटर से ऊंची चोटियों को महज छह महीने से कुछ अधिक समय में फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनकी इस उपलब्धि ने पर्वतारोहण की दुनिया में नया इतिहास रचा और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।
उनकी सफलता ने नेपाल को अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाई। कठिन परिस्थितियों में साहस, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति के लिए जाने जाने वाले निर्मल पुर्जा युवा पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहे। उनकी उपलब्धियों ने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के दम पर असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
निर्मल पुर्जा के निधन की खबर सामने आने के बाद पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। दुनिया भर के पर्वतारोही, खेल प्रेमी और उनके प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के पर्वतारोहियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।
ब्रॉड पीक दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों में से एक मानी जाती है, जहां मौसम में अचानक बदलाव और हिमस्खलन जैसी घटनाएं पर्वतारोहियों के लिए बड़ा खतरा बन जाती हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में अभियान संचालित करना हमेशा जोखिम भरा माना जाता है। निर्मल पुर्जा का निधन वैश्विक पर्वतारोहण समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
