खेलो इंडिया से वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की ओर भारत

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भारत का खेल परिदृश्य पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदल रहा है। केंद्र सरकार की दीर्घकालिक रणनीति, बढ़ते निवेश, आधुनिक खेल अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान ने देश को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान किया है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए पुनर्गठित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) को बढ़ी हुई सहायता को मंजूरी दी है। दोनों योजनाओं के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार का उद्देश्य खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें स्कूलों और गांवों से प्रतिभा की पहचान कर उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण, मनोवैज्ञानिक सहयोग, बेहतर कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर मिल सके। यह पहल वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स, भविष्य के ओलंपिक और पैरालंपिक अभियानों तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से भी जुड़ी हुई है।

सरकार ने खेल क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ाया है। वर्ष 2013-14 में खेल मंत्रालय का बजट 1,219 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2026-27 में 4,479.88 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, खेलो इंडिया योजना के तहत शुरुआती वर्षों से लेकर अब तक लगातार वित्तीय आवंटन बढ़ाया गया है, जिससे खेल सुविधाओं, खिलाड़ियों और प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तार संभव हुआ है।

खेलो इंडिया कार्यक्रम वर्ष 2017 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देशभर में खेल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं का आयोजन और आधुनिक खेल अवसंरचना का विकास करना है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जिले में कम से कम एक खेलो इंडिया प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना और खेल विज्ञान व तकनीक के माध्यम से विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार करना है।

जुलाई 2026 तक देशभर में 349 नई खेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा 1,067 खेलो इंडिया केंद्र, 267 अकादमियां और 2,745 खेलो इंडिया खिलाड़ी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, चिकित्सा सहायता और मासिक वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

नई योजना के तहत खेलो इंडिया फीडर स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया प्रशिक्षण केंद्र और मान्यता प्राप्त अकादमियों को एकीकृत ढांचे में जोड़ा जाएगा। इससे खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से लेकर उच्च प्रदर्शन तक एक सतत विकास प्रणाली उपलब्ध होगी। साथ ही महिला खिलाड़ियों, पैरा खिलाड़ियों और स्वदेशी खेलों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।

सरकार खेलों में तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिट इंडिया अभियान, राष्ट्रीय कोच मान्यता बोर्ड, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रतिभा पहचान तथा वैज्ञानिक प्रदर्शन मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाएं खिलाड़ियों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगी। निजी क्षेत्र और कॉर्पोरेट संस्थानों की भागीदारी बढ़ाकर खेल पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने की भी योजना है।

भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 39 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल रहे। कई पदक विजेता खिलाड़ी खेलो इंडिया कार्यक्रम से जुड़े रहे हैं, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

सरकार का मानना है कि खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), किरती (KIRTI) कार्यक्रम, खेल अवसंरचना विस्तार और खेल उपकरण निर्माण जैसी पहलों के माध्यम से भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक खेल मंच पर और अधिक मजबूत उपस्थिति दर्ज करेगा। यह रणनीति केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में खेल संस्कृति को मजबूत कर नई पीढ़ी को विश्वस्तरीय अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

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