अंबानी परिवार की छोटी बहू राधिका मर्चेंट एक बार फिर अपने अनोखे फैशन स्टाइल को लेकर चर्चा में हैं। स्वदेश के एक साल पूरे होने के अवसर पर राधिका एक खूबसूरत कॉर्सेट ड्रेस में नजर आईं। उनके इस आउटफिट में पारंपरिक भारतीय कला और आधुनिक फैशन का खास मेल देखने को मिला। फैशन डिजाइनर मयूर गिरोत्रा द्वारा तैयार की गई इस ड्रेस पर हाथ से पेंट की गई कलमकारी कलाकारी ने खास ध्यान खींचा।
राधिका की ड्रेस में स्कल्पचरल सिल्हूट, बारीक कढ़ाई और आधुनिक डिजाइन तकनीकों को शामिल किया गया। आउटफिट की खासियत इसकी कलात्मक बनावट और पारंपरिक शैली को नए अंदाज में पेश करना रही। लहराते दुपट्टे के साथ कॉर्सेट डिजाइन ने इस लुक को अलग पहचान दी। ड्रेस पर दिखाई गई कृष्ण लीला की झलक ने भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को फैशन के माध्यम से सामने रखा।
ड्रेस पर हाथ से उकेरी गई कलमकारी की खूबसूरती
राधिका मर्चेंट के इस आउटफिट की सबसे खास विशेषता हाथ से बनाई गई कलमकारी कला है। इस पारंपरिक टेक्सटाइल कला में कपड़े पर बारीक चित्रों, सजावटी आकृतियों और पौराणिक कहानियों को बेहद सावधानी से उकेरा जाता है। इस ड्रेस में भी कलमकारी के जरिए भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक परिधान के साथ जोड़ा गया है।
डिजाइनर मयूर गिरोत्रा ने अपने सिग्नेचर स्टाइल के अनुरूप आउटफिट में पारंपरिक कलात्मकता और आधुनिक डिजाइन का संतुलन रखा। हाथ से तैयार किए गए चित्रों और बारीक कढ़ाई ने ड्रेस को एक विशेष रूप दिया। यही वजह है कि यह आउटफिट केवल फैशन परिधान नहीं, बल्कि भारतीय कला की प्रस्तुति के रूप में भी आकर्षक नजर आया।
क्या है कलमकारी कला की खासियत?
कलमकारी शब्द फारसी भाषा के ‘कलम’ शब्द से जुड़ा है। यह भारत की पारंपरिक टेक्सटाइल कलाओं में से एक है, जिसमें कपड़े पर हाथ से चित्रकारी की जाती है। इस कला के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों, पौराणिक पात्रों, प्राकृतिक आकृतियों और सजावटी डिजाइनों को जीवंत रूप दिया जाता है।
आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक मंदिर शहर श्रीकालाहस्ती को कलमकारी की प्रमुख पारंपरिक शैलियों में गिना जाता है। इस कला में बांस से बने कलम जैसे उपकरणों की मदद से कपड़े पर चित्र बनाए जाते हैं। पारंपरिक प्रक्रियाओं में पेड़-पौधों और खनिजों से प्राप्त प्राकृतिक रंगों का भी इस्तेमाल किया जाता है।
कलमकारी की खासियत इसकी बारीक रेखाएं, रंगों का संयोजन और चित्रों के जरिए कहानी कहने की क्षमता है। हर डिजाइन को तैयार करने में समय, धैर्य और कुशल कारीगरी की जरूरत होती है। यही विशेषताएं इसे सामान्य प्रिंट से अलग बनाती हैं।
पारंपरिक विरासत और आधुनिक फैशन का मेल
राधिका मर्चेंट का यह लुक दिखाता है कि पारंपरिक भारतीय कला को आधुनिक फैशन डिजाइन में किस तरह शामिल किया जा सकता है। कॉर्सेट की संरचना, लहराता दुपट्टा, बारीक कढ़ाई और हाथ से बनाई गई कलमकारी ने आउटफिट को एक विशिष्ट अंदाज दिया।
स्वदेश के एक साल पूरे होने के मौके पर पहनी गई इस ड्रेस में भारतीय शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता मिली। कृष्ण लीला से प्रेरित चित्रकारी ने परिधान को कहानी कहने वाला रूप दिया, जबकि आधुनिक सिल्हूट ने इसे समकालीन फैशन से जोड़ा।
राधिका मर्चेंट का यह आउटफिट उन डिजाइनों में शामिल है, जो पारंपरिक भारतीय कलाओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करते हैं। इसमें शिल्पकारों की बारीक मेहनत और आधुनिक डिजाइन की सोच का संगम दिखाई देता है।
